प्रेग्नेंसी का मतलब बेड रेस्ट नहीं है। अगर आपकी प्रेग्नेंसी में कोई मेडिकल कॉम्प्लिकेशन नहीं है, तो एक्टिव रहना आपके शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार करने और तनाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। प्रेग्नेंसी के दौरान एक्सरसाइज करने की सलाह अब तो डॉक्टर भी देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि अगर आप थोड़े-बहुत हल्के से मीडियम स्पीड वाले एक्सरसाइज करते रहेंगे तो जेस्टेशनल डायबिटीज और पीठ दर्द जैसी समस्याओं का खतरा काफी कम हो जाता है।
हालांकि, हर महिला का शरीर अलग होता है। जो वर्कआउट आप प्रेग्नेंसी से पहले कर रही थीं, उसमें अब थोड़े बदलाव की जरूरत हो सकती है। सुरक्षित रहने के लिए अपने शरीर के सिग्नल को सुने और भारी वजन उठाने या गिरने के जोखिम वाले खेलों से जरूर बचे।
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प्रेग्नेंसी में एक्सरसाइज सेफ है या नहीं?
प्रेग्नेंसी के दौरान फिट रहने के लिए आपको जिम में पसीना बहाने की जरूरत नहीं है। बस शरीर को एक्टिव रखना ही काफी है। अगर आप रेगुलर एक्सरसाइज करते हैं तो इससे आपको कई फायदे मिल सकते हैं।
प्रेग्नेंसी में महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या होती है कि उनके पीठ में बढ़ते वजन के साथ दर्द की समस्या भी बढ़ जाती है। अगर आप इस दौरान एक्सरसाइज करते हैं तो आपके शरीर का पोस्चर सुधरता है और मांसपेशियों का स्ट्रेस काफी हद तक कम हो जाता है।
इस समय कई महिलाओं को नींद की समस्या बहुत होती है। अगर आपका शरीर थका रहेगा तो आपको रात में बेहतर नींद भी आएगी इसलिए एक्सरसाइज करना सही माना जाता है। महिलाओं को इस दौरान मूड स्विंग्स भी होता है जिस पर उनका कंट्रोल करना मुश्किल होता है। एक्सरसाइज से एंडोर्फिन रिलीज होता है जो स्ट्रेस कम करता है।
डॉक्टर ऐसा कहते हैं कि अगर आप अपने शरीर को लचीला बनाए रखते हैं तो नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है और प्रक्रिया भी आसान हो जाती है।
कौन सी एक्सरसाइज हैं सबसे बेस्ट?
विशेषज्ञ आमतौर पर इन गतिविधियों की सलाह देते हैं:
- ब्रिस्क वॉकिंग (तेज चलना): यह जोड़ों पर दबाव डाले बिना कार्डियो वर्कआउट का सबसे सरल तरीका है।
- डिलीवरी से पहले एक्सरसाइज : इसमें कुछ सांस से संबंधित एक्सरसाइज शामिल है। यह आपके शरीर में फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाता है और सांस लेने की सही तकनीक सिखाता है।
- स्विमिंग: पानी शरीर के वजन को सपोर्ट करता है, जिससे जोड़ों में दर्द नहीं होता।
- पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज: यह डिलीवरी के समय और उसके बाद रिकवरी में मदद करती है।
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कब रुकना चाहिए?
डॉक्टर का यह साफ कहना होता है कि जब भी आपको अटपटा या कुछ निम्न लगे तो तुरंत रुक जाएं। जैसे-
- चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना।
- सांस फूलना जिस कारण आप बात न कर पाएं।
- पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द या संकुचन।
- ब्लीडिंग या फ्लूइड डिस्चार्ज।