logo

मूड

ट्रेंडिंग:

बचपन में फ्रूट जूस और शुगर ड्रिंक्स पीने से हाई BP का खतरा, स्टडी में दावा

शरीर के लिए पैकेट वाला जूस हेल्दी नहीं होता है। अगर इसे अधिक मात्रा में पीते हैं तो हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा बढ़ जाता है।

child drinking juice image created by ai

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: AI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

एक ग्लास जूस को हमेशा से हेल्दी ऑप्शन माना जाता है। लोगों का मानना है कि सॉफ्ट ड्रिंक से ज्यादा हेल्दी फलों का जूस होता है। हालांकि सर्कुलेशन में एक स्टडी पब्लिश हुई है जिसमें बताया गया है कि अगर बच्चा अधिक मात्रा में फ्रूट जूस या शुगर वाली ड्रिंक्स पीता है तो बड़े होने पर उनमें हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है। 

 

इस स्टडी में पाया गया कि जो बच्चे और टीएनजर्स रोजाना चीनी वाली ड्रिंक्स की दो या उससे ज्यादा सर्विंग लेते थे। उनमें बाद में हाइपरटेंशन होने का खतरा 52% से ज्यादा था उनके मुकाबले जो हफ्ते में तीन बार स्वीट ड्रिंक पीते थे। वहीं, जो फ्रूट जूस 1.5 या उससे ज्यादा की सर्विंग लेते थे। उनमें  35% ज्यादा खतरा पाया गया, उनके मुकाबले जिन्होंने कभी कोई फ्रूट जूस नहीं पिया। 

 

यह भी पढ़ें: Tai Chi Walking: ताई ची वॉकिंग क्या है? जानें इसके फायदे और करने का सही तरीका

स्टडी में क्या पाया गया?

इस स्टडी में पाया गया कि अगर आप फल खा रहे हैं तो कोई नुकसान नहीं है। इस स्टडी में न्यूट्रिशन प्रिंसिपल के सिद्धांत को बताया गया है जिसके मुताबिक चीनी की मात्रा के साथ-साथ उसका सोर्स भी मायने रखता है। साबुत फल में मिलने वाली चीनी का शरीर पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है। रोजाना चीनी वाली ड्रिंक्स की जगह पर एक साबुत फल खाते हैं तो हाइपरटेंशन का खतरा 22% कम हो गया। वहीं अगर आप फलों के जगह पर साबुत फल लेते हैं तो खतरा 19% तक कम हो जाता है।

चीनी से क्यों बढ़ता है बीपी?

साबुत फल में फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर करता है और चीनी धीरे एब्जॉर्ब होता है जिससे ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है। इस दौरान एकदम से शुगर का लेवल नहीं बढ़ता है। जबकि फलों का जूस बनाने से उसका फाइबर काफी हद तक निकल जाता है और शरीर में शुगर एकदम से एब्जॉर्ब होता है। ब्लड में लगातार ग्लूकोज और इंसुलिन का लेवल बढ़ने से इंसुलिन रजिस्टेंट बढ़ता है। इससे सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव होता है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का काम करता है।

 

यह भी पढ़ें: सेहत के लिए हानिकारक है ये फूड कॉम्बिनेशन, बढ़ेगा बीमारियों का खतरा

 

शुगर वाली ड्रिंक्स में फ्रुक्टोज की मात्रा अधिक होती जो मुख्य रूप से लिवर में मेटाबोलाइज होती है। जब लिवर के आसपास फैट जमने लगता है तो फैटी लिवर की समस्या हो सकती है, ट्राइग्लिसराइडस और पेट के आसपास फैट जमा होने लगता है। जब शुगर की मात्रा अधिक होती है तो नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर कम हो जाता है जिससे ब्लड वेसल्स ठीक से फैल नहीं पाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके अलावा फ्रक्टोज के टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने से ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है, साथ ही नाइट्रिक ऑक्साइड का लेवल भी कम हो सकता है। इससे ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।


वहीं, साबुत फल में पोटैशियम, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल होता है। ये सभी चीजें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। इस वजह से साबुत फल में मौजूद फाइबर हृदय के लिए नुकसानदायक नहीं होता है। यह स्टडी भारत के लिए भी जरूरी है। भारत में पैकेज्ड फ्रूट जूस, चीनी वाली ड्रिंक्स का मार्केट बढ़ रहा है। पेरेंट्स अपने बच्चों को पैकेट वाली जूस पीने के लिए देते हैं जिसमें पोषक तत्व न के बराबर होते हैं। आप बच्चों को जूस की जगह पर साबुत फल खाने को दें।

Related Topic:#Health News

और पढ़ें