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डायबिटीक मरीजों के हाथ पैर में क्यों बढ़ता है इंफेक्शन का खतरा?

डायबिटीक एक गंभीर बीमारी है। अगर लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर की समस्या है तो इसका असर शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है। खासतौर से त्वचा और आंखों पर प्रभाव पड़ता है।

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प्रतिकात्मक, Photo credit: freepik

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डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है। ICMR-INDIAB की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 101 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित है। डायबिटीज में हाई ब्लड शुगर को कंट्रोल नहीं करने की वजह से शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं। डायबिटीक मरीजों में स्किन इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है। 

 

डायबिटीज कई तरह से त्वचा को प्रभावित कर सकता है। खासतौर से जब आपका ब्लड शुगर लंबे समय से बढ़ा रहता है। ब्लड में ग्लूकोज का लेवल ज्यादा होने से ड्राइनेस, खुजली की समस्या हो सकती है। डायबिटीज के कारण ब्लड सर्कुलेशन और नसों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है जिससे किसी भी चोट या घाव को भरने में ज्यादा समय लगता है। कुछ लोगों के त्वचा पर धब्बे बन जाते हैं। बार बार खुजली, फुंसी-फोड़े की समस्या हो सकती है। इसलिए शुगर को नियंत्रण में रखना बहुत जरूरी होता है। डायबिटिक मरीज अपना कैसे ख्याल रख सकते हैं? इस बारे में हमने बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट Endocrinology डॉक्टर महेश डी.एम से बात की।

 

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प्री डायबिटीक मरीज 

वहीं प्री डायबिटीक मरीजों की त्वचा में कुछ बदलाव आ सकते हैं। ये बदलाव इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से हो सकते हैं। इनमें सबसे आम है एकेंथोसिस निग्रिकन्स जिसमें त्वचा का रंग गहरा होता है, त्वचा मोटी हो जाती है। ऐसा खासकर गर्दन, कांख और जांघ के आसपास होता है। कुछ लोगों को त्वचा में ड्राइनेस और बार बार इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है हालांकि ये लक्षण प्री डायबिटीज तक सीमित नहीं है। अगर किसी की त्वचा असमान्य रूप से गहरी और मोटी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

डायबिटीक मरीज में हाथ पैर के इंफेक्शन का खतरा क्यों होता है

डायबिटीक वाले लोगों को स्किन इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और ब्लड सर्कुलशन पर असर पड़ता है। ब्लड सर्कुलेशन कम होने की वजह से चोट वाली जगह पर ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स का पहुंचना और घाव का भरना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा नसों में सेंसेशन भी कम हो जाता है। इस वजह से छोटे मोटे चोट और घाव का पता नहीं चलता है और इनके जरिए शरीर में बैक्टीरिया और फंगस घुस सकते हैं। पैरों और पैरों के निचले हिस्स में ब्लड सर्कुलेशन और नसों से जुड़ी समस्याएं आम होती हैं। इसलिए त्वचा को साफ रखना चाहिए, सूखा रखना चाहिए और घांव का तुरंत इलाज करवाना चाहिए ताकि इनफेक्शन का खतरा कम किया जा सकें।

 

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कैसे नियंत्रित कर सकते हैं?

सबसे जरूरी है कि ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें। डायबिटीज वालों को अपनी स्किन साफ और मॉश्चराइज रखनी चाहिए। बहुत ज्यादा गर्म पानी से बचना चाहिए। आरामदायक और सही साइज के जूते पहनने चाहिए।
खुजली वाली जगहों को खरोचने से बचें। 
अगर घाव ठीक न हो उसमें दर्द हो, लाल हो जाए या सूजन आ जाए या लिक्विड फ्लूड निकले तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
रेगुलर एक्सरसाइज करें।
संतुलित आहार लें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

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