logo

मूड

ट्रेंडिंग:

डिनर के बाद भी जारी है खाने का दौर, क्यों बढ़ रहा है देर रात खाने का चलन?

देर रात ऑनलाइन खाना मंगवाने की आदत तेजी से बढ़ रही है, जिससे शरीर का नेचुरल सिस्टम बिगड़ता है और मोटापे जैसी गंभीर बीमारियाँ होने का खतरा रहता है।

Symbolic Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में रात के खाने के बाद भी देर रात तक कुछ न कुछ खाते रहने की आदत बहुत आम हो गई है। हाल ही में आई स्विगी की रिपोर्ट 'हाउ इंडिया ईट्स 2025' में यह खुलासा हुआ है कि भारतीयों की खाने की आदतें तेजी से बदल रही हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, रात 11 बजे के बाद ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने वालों की संख्या में बहुत भारी उछाल आया है। देर रात के खाने के ऑर्डर की रफ्तार सामान्य डिनर के समय के मुकाबले 3 गुना ज्यादा तेज है।

 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में देर रात के ऑर्डर में पिज्जा सबसे ऊपर रहा, जिसे 1.5 लाख से ज्यादा बार ऑर्डर किया गया। इसके अलावा, रात के समय 50,000 से अधिक बार केक और लगभग 40,000 बार आइसक्रीम के ऑर्डर दर्ज किए गए। यह नया चलन यह दिखा रहा है कि लोग अपनी सुविधा और स्वाद के लिए आधी रात को भी खाने से परहेज नहीं कर रहे हैं।

 

देर रात तक खाने की इस बढ़ती आदत के पीछे कई बड़े वैज्ञानिक और शारीरिक कारण हैं। हमारे शरीर के अंदर एक नेचुरल घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहते हैं। यह घड़ी सूरज ढलने के बाद शरीर को अलग तरह से काम करने के संकेत देती है। दिन भर के काम का भारी तनाव, लगातार मोबाइल स्क्रीन का इस्तेमाल, और थकान के कारण हमारा दिमाग रात भर सतर्क रहता है, जिससे देर रात भी भूख महसूस होती है। जब हम दिन भर व्यस्त रहने के वजह से अपना खाना छोड़ देते हैं या बहुत कम खाते हैं, तो शरीर को शाम होते-होते एनर्जी की भारी कमी महसूस होने लगती है और शरीर तुरंत एनर्जी पाने के लिए ज्यादा कैलोरी वाले जंक फूड की डिमांड करने लगता है।

 

यह भी पढ़ें: थकान से तंग आ रही नई पीढ़ी, आखिर क्यों बढ़ रही है 'मी टाइम' की मांग?

हार्मोन का बिगड़ता संतुलन

अक्सर लोग तनाव, अकेलेपन या बोरियत से बचने के लिए खाने का सहारा लेते हैं। दिन भर की मानसिक थकान के बाद दिमाग को खुशी महसूस कराने वाले डोपामाइन की जरूरत होती है और ऐसे में जंक फूड एक आसान जरिया बन जाता है। इसके अलावा नींद की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है।

 

रिसर्च के मुताबिक, जब हम पूरी नींद नहीं लेते, तो हमारे शरीर में 'घ्रेलिन' नाम का हार्मोन बढ़ जाता है जो भूख को तेज करता है और 'लेप्टिन' नाम का हार्मोन कम हो जाता है जो हमें यह बताता है कि पेट भर गया है। यह है कि देर रात हमारा शरीर इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाता है जिससे ब्लड शुगर का स्तर अचानक गिर सकता है। इस वजह से शरीर को लगता है कि उसे तुरंत मीठा या एनर्जी चाहिए और हम बिना सोचे-समझे खाने लगते हैं।

देर रात खाने का शरीर पर बुरा असर

रात का समय हमारे शरीर को आराम करने और खुद को ठीक करने का होता है। जब हम देर रात भारी खाना खाते हैं तो शरीर को उसे पचाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है जिससे मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया सुस्त पड़ जाती है। बार-बार ऐसा करने से वजन बहुत तेजी से बढ़ता है और पेट में एसिडिटी की समस्या हो जाती है। इसके साथ ही, रात को खाना खाने से नींद की क्वालिटी भी खराब होती है और ब्लड शुगर का लेवल पूरी तरह अनियंत्रित हो जाता है, जिससे आगे चलके बड़ी बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। जब हम देर रात खाते हैं तो शरीर उस ऊर्जा को तुरंत इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे वह चर्बी के रूप में जमा होने लगती है।

 

यह भी पढ़ें: महिलाओं को क्यों पसंद आ रहा सोलो ट्रैवल? आंकड़ों का इशारा समझिए

इस आदत को कैसे सुधारें?

इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए दिन भर सही समय पर और संतुलित खाना खाना सबसे जरूरी है। अपने खाने में दाल, हरी सब्जियां, फल और फाइबर वाली चीजें शामिल करें ताकि आपका पेट लंबे समय तक भरा रहे और ब्लड शुगर का स्तर एक समान बना रहे। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल दिन में स्थिर रहेगा तो रात में अचानक भूख लगने वाली क्रेविंग अपने आप कम हो जाएगी। रात के समय फोन और लैपटॉप या फोन का इस्तेमाल कम करें क्योंकि इनकी नीली रोशनी भी हमारी नींद और शरीर की घड़ी को प्रभावित करती है। 


और पढ़ें