चोरी का राज खुलने से, CEO बनवाने तक, 'अयोध्या कांड' की पूरी कहानी
7 जून 2026 को अखिलेश यादव के एक ट्वीट के साथ अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ा चंदा चोरी का मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। चंपत राय के इस्तीफे से लेकर CEO की नियुक्ति तक, जानिए कब क्या हुआ।

चंपत राय, जीतेंद्र मिश्र और अखिलेश यादव, Photo Credit-Social Media Ayodhya Ram Mandir
समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है। ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है। अखिलेश यादव , राष्ट्रीय अध्यक्ष-समाजवादी पार्टी
7 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट शेयर करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा कर दिया। अखिलेश यादव के इस ट्वीट के साथ ही अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ा चंदा चोरी का मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। इस पूरे मामले में आगे चलकर SIT जांच बैठी, चंपत राय को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देना पड़ा। अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की नियुक्ति की है।
इस पद के लिए ट्रस्ट ने वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को चुना गया है। जीतेंद्र मिश्र इसी साल मई में पश्चिमी वायु कमान के कमांडिंग इन चीफ के पद से रिटायर हुए थे। राम मंदिर ट्रस्ट के कार्यकारी महामंत्री कृष्ण मोहन ने ट्रस्ट की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की जानकारी दी है।
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क्या है पूरा विवाद?
अखिलेश यादव के इस ट्वीट से पहले ही राम मंदिर चोरी का मामला सामने आ चुका था। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की डायरी से पता चला कि अप्रैल 2026 में एक कर्मचारी को चोरी के शक में हटाया गया था लेकिन तब इसे बड़ा मामला नहीं माना गया। जून 2026 की शुरुआत में ट्रस्ट के ऑडिट के दौरान दानपात्र से फिर नकदी गायब मिली, बाद CCTV फुटेज खंगाली गई।
जांच में पता चला कि दान गिनने वाले कई कर्मचारी लंबे समय से मिलकर पैसे चुरा रहे थे, करोड़ों की चंदा चोरी हुई है। रात में गिनती पूरी होने के बाद एक व्यक्ति रकम निकालता और बाकी लोग उसके चारों ओर घेरा बनाकर कैमरे से बचाने की कोशिश करते थे। आरोपी अविनाश शुक्ला को जब 45 दिनों की CCTV फुटेज दिखाई गई, तो उसने चोरी कबूल कर ली और बताया कि उस पैसे से उसने कार भी खरीदी थी। इस मामले में कुल 8 लोगों की गिरफ्तार हुई है।
कौन हैं इसमें शामिल?
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी के मामले में पुलिस और एसआईटी (SIT) ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, जो श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर और करीबी सहयोगी था। पुलिस को जांच में पता चला कि इसके पास दान गिनती कक्ष और दान पेटियों की चाबियों तक पहुंच थी। इसके अलावा, इसमें रमाशंकर मिश्र, लवकुश मिश्रा, अनुक्ल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष कुमार यादव करुणेश पांडे और सुभाष श्रीवास्तव का नाम शामिल था।
दूसरी ओर अखिलेश यादव सामने आए, जिन्होंने 7 जून 2026 को ट्वीट कर सबसे पहले मामला उजागर किया और भारतीय जनता पार्टी BJP पर जमकर निशाना साधा, बाद में अजय राय कांग्रेस नेता भी इसमें शामिल हो गए। उन्होंने इस इस मुद्दे को उठाया और मंदिर प्रबंधन में आस्था से जुड़े व्यक्ति की नियुक्ति की मांग की। चंपत राय सवालों में घिर गए थे। उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा।
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कहां से उठा यह मामला?
यह पूरा विवाद उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र मंदिर परिसर से जुड़ा है। चोरी की यह घटना मंदिर के अंदर बने दान गिनती कक्ष (जहां चढ़ावे की गिनती होती है) और दान पेटियों के आसपास हुई थी। इस मामले की जांच भी अयोध्या में ही चल रही है, जहां पुलिस और SIT की टीम आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
कब क्या हुआ?
- जून की शुरुआत: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई।
- 7 जून: अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर योगी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि मंदिर के चढ़ावे को लेकर सामने आई जानकारी गंभीर चिंता का विषय है।
- 10 जून: BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने माना कि चंदा चोरी की जांच सरकार करा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही।
- 13 जून: CM योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की।
- 21 जून: जांच के सातवें दिन SIT ने करीब 140 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।
- 25 जून: ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर 8 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज हुआ।
- 26 जून: सभी 8 नामजद आरोपी गिरफ्तार किए गए।
- 27 जून को चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया।
- 28 जून: पुलिस ने सभी 8 आरोपियों के घरों पर छापेमारी की लाखों रुपये बरामद किए गए।
- 6 जुलाई: ट्रस्ट ने चंपत राय का इस्तीफा मंजूर किया कर लिया।
- 7 जुलाई: 40 दिनों की CCTV फुटेज में करीब 70 घटनाओं की रिपोर्ट आई।
- 18 अगस्त: SIT की फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय-अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिला, 8 आरोपी ही दोषी माने गए।
- 2 सितंबर: ट्रस्ट में बड़ा बदलाव हुआ स्वामी गोविंद देव गिरि नए महासचिव बने (चंपत राय की जगह) और रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ट्रस्ट के पहले CEO नियुक्त हुए।

कैसे हुई चोरी?
रात में चढ़ावे की गिनती पूरी होने के बाद एक व्यक्ति रकम निकालता, बाकी आरोपी उसके चारों ओर घेरा बनाकर CCTV कैमरे से बचाने की कोशिश करते थे। इनमें से जो मुख्य आरोपी था, जिसका नाम रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू (चंपत राय का पूर्व ड्राइवर) के पास दान गिनती कक्ष और दान पेटियों की चाबियों तक पहुंच थी। जून की शुरुआत में ऑडिट के दौरान नकदी गायब मिलने पर CCTV फुटेज खंगाली गई। तब इस चोरी का पता चला। आरोपी अविनाश शुक्ला को जब 45 दिनों की CCTV फुटेज दिखाई गई, तो उसने चोरी कबूल की और बताया कि चुराए पैसों से उसने कार खरीदी थी।
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अभी भी खत्म नहीं हुई बहस, अब आगे क्या?
ट्रस्ट में नए महासचिव और पहले CEO की नियुक्ति के साथ प्रशासनिक स्तर पर मामला खत्म होता नजर आ रहा है। कांग्रेस नेता अजय राय ने भी मंदिर की जिम्मेदारी किसी धर्माचार्य को सौंपने की मांग दोहराई है। यह मुद्दा 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी सियासी हथियार बनता दिख रहा है। अखिलेश यादव ने फिर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'रामधन की चोरी न भगवान माफ करेंगे, न जनता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच में बड़े नामों को क्लीन चिट मिल गई तो छोटे कर्मचारियों को जेल में क्यों रखा गया है, उन्हें भी रिहा किया जाना चाहिए।'
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