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रक्तदान के लिए ABHA-आधार OTP से होगी पहचान, ब्लड डोनेशन में Biometric की तैयारी

स्वास्थ्य मंत्रालय के सलाहकार बोर्ड ने हाल ही में ब्लड सेंटरों को e-RaktKosh से जोड़ने और रक्तदाताओं की पहचान ABHA ID या आधार-लिंक्ड OTP से करने की सिफारिश की है। साथ ही बायोमेट्रिक सिस्टम की भी तैयारी है।

Blood Donation, Blood Donor Identification,

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-Chat GPT

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स्वास्थ्य मंत्रालय के सलाहकार बोर्ड यानी ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने अगस्त 2026 में एक सिफारिश की है। एक बैठक में बोर्ड ने हर ब्लड सेंटर को e-RaktKosh पोर्टल पर रजिस्टर करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, रक्तदाता की पहचान ABDM/ABHA यानी आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ कार्ड आईडी या आधार-लिंक्ड OTP से हो, यह प्रस्ताव भी रखा गया।  आंकड़ों के मुताबिक, देश मे 2023 में 1.26 करोड़ यूनिट खून जमा हुआ था, जो 2024 में बढ़कर 1.46 करोड़ यूनिट हो गया। इसमें करीब 75% रक्तदान स्वैच्छिक था। बता दें कि यह खून 4,484 लाइसेंसी ब्लड सेंटरों में जमा होता है।

 

बता दें कि इस सिफारिश का मकसद बिखरे रिकॉर्ड की जगह एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना है। रिकॉर्ड एक जगह होगा, तो जोखिम वाले रक्तदाताओं की पहचान आसान होगी। इसके साथ ही कोई बिना पकड़े कई सेंटरों पर खून नहीं दे पाएगा। हालांकि अभी यह सिर्फ सिफारिश है, नियम नहीं। इस खास बदलाव से अगर कोई कहीं रक्तदान करता है, जैसे आप अगर शहर में खून दे आएं हैं, तो इससे गांव में मौजूद ब्लड बैंक को इसके बारे में जानकारी हो जाएगी। DTAB की नई सिफारिश इसी कमी को भरने की कोशिश है।

 

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e-RaktKosh रजिस्ट्रेशन और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन 

ब्लड डोनर्स के लिए e-RaktKosh रजिस्ट्रेशन और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत कानूनी नियमों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है। बोर्ड को नेशनल रिव्यू मीटिंग के निर्देशों के बारे में बताया गया ताकि एक ऐसा प्रोसेस बनाया जा सके जिससे सभी ब्लड सेंटर्स ब्लड के कलेक्शन, टेस्टिंग और जारी करने का अलग-अलग डेटा e-RakKosh पोर्टल पर अपलोड कर सकें। इसके साथ ही देश में ब्लड डोनर्स का पता लगाने और फॉलो-अप करने के लिए ABDM (आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन) ID/ या फिर आधार से जुड़े OTP वेरिफिकेशन के साथ इंटीग्रेट कर सकें।

 डोनर्स की सही पहचान और उनका रिकॉर्ड आसानी से मिलेगा

बोर्ड ने इस बदलाव की जरूरत पर ध्यान दिया है। इसका मकसद देश में सभी ब्लड डोनर्स की पहचान और उनके फॉलो-अप के लिए जरूरी ऑथेंटिकेशन लागू करना है। इसके लिए सभी ब्लड डोनर्स की ABDM (आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन) ID या आधार से जुड़े OTP वेरिफिकेशन का उपयोग किया जाएगा। इससे डोनर्स की सही पहचान और उनका रिकॉर्ड आसानी से पता लगाने में मदद मिलेगी। 

 

साथ ही, डोनेशन के बाद उनका पूरी तरह से फॉलो-अप किया जा सकेगा और अधिक जोखिम वाले या टाले गए डोनर्स को अलग-अलग स्थानों पर बार-बार ब्लड डोनेशन करने से तुरंत रोका जा सकेगा। बोर्ड को बताया गया कि इसपर पहली बार 24.06.2026 को हुई 69वीं DCC की बैठक में एजेंडा 04 के तहत विचार किया गया था।

 

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सब कमेटी बनाने की सिफारिश

बता दें कि ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) ने सिफारिश की थी कि एक सब-कमेटी बने। यह सब-कमेटी देखेगी कि ब्लड सेंटरों और कैंपों में डोनर्स की बायोमेट्रिक पहचान कैसे हो। सब-कमेटी ने इस पर विचार किया और सुझाव दिया कि रक्तदाता की पहचान ABDM आईडी/ABHA या आधार से जुड़े OTP से हो। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि ब्लड किसने दिया, और बाद में उससे संपर्क भी हो सकेगा।

 

आखिर में DTAB ने चर्चा की और ड्रग्स रूल्स के तहत दो चीजो के लिए नियम बनाने की सिफारिश की, पहला सभी ब्लड सेंटर e-RaktKosh पोर्टल पर रजिस्टर हों और अपना डेटा वहां अपलोड करें। डोनर्स की पहचान ABDM आईडी/ABHA या आधार-लिंक्ड OTP से हो, ताकि ब्लड का पता लगाना और रक्तदाता से फॉलो-अप करना आसान हो।


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