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'पति को शारीरिक संबंध बनाने से लगातार मना करना क्रूरता'- सुप्रीम कोर्ट

वैवाहिक संबंधों में क्रूरता तलाक का एक आधार होती है। शारीरिक संबंधों से लगातार इनकार करना भी क्रूरता की श्रेणी में ही आता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT

अगर आप पति-पत्नी हैं और आपके के बीच एक अरसे से शारीरिक संबंध नहीं बने हैं तो इसे तकाल का वैध आधार माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने एक डॉक्टर दंपति के 15 साल पुराने रिश्ते को खत्म माना क्योंकि दोनों, 15 साल से अलग-अलग रह रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सेक्स से इनकार करना, पति के खिलाफ क्रूरता है। 

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि पति ने जो साक्ष्य दिखाए हैं, उसके आधार पर कह सकते हैं कि जब शारीरिक संबंध बन रहे थे तब कभी पत्नी जल्दी सो जाती थीं, कमरे का दरवाजा लॉक कर लेती थीं, अलग सोती थीं, दरवाजा बार-बार खटखटाने पर भी नहीं खोलती थीं, जिसकी वजह से पति को अलग रूम में सोना पड़ता था।

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'भावनात्मक क्रूरता है यौन संबंधों से इनकार करना'

पत्नी ने अदालत में सुनवाई के दौरान इस पति के आरोपों से पत्नी ने इनकार नहीं किया। यह फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने 2 जून को सुनाया। भारत की अलग-अलग अदालतों ने बार-बार कहा है कि शादी में रहते हुए यौन संबंधों से इनकार करने से भावनात्मक पीड़ा होती है, जिसका असर, शादी के बंधन पर पड़ता है।  


पति और पत्नी अपने-अपने वैवाहिक दायित्वों को पूरा करने में असफल रहे, यौन संबंध भी कुछ ही दिनों के रहे, हाई कोर्ट ने तलाक के लिए क्रूरता के दावे को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि शादी को बचाने की सारी कोशिशें बेकार गईं, इसलिए यह शादी टूट गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की डिक्री बरकरार रखी। 

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मामला क्या है?

दंपति की शादी 5 दिसंबर 2007 को गुजरात में हिंदू-रिवाजों के हिसाब से हुआ था। दोनों की कोई संतान नहीं थी। जब शादी हुई तब पत्नी एक सरकारी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ थी, पति राजस्थान में सरकारी डॉक्टर था। 

दोनों अलग-अलग सामाजिक बैकग्राउंड से आते थे, दोनों की जीवनशैली में अंतर की वजह से जीवन में दूसरी मुश्किलें पैदा हुईं। पति ने आरोप लगाया है कि पत्नी ने उनके साथ क्रूरतापूर्ण रवैया अख्तियार किया, 2 साल के शादीशुदा रिश्ते में सिर्फ 2 से 3 महीने ही उनके साथ रहीं। 

कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला?

पति ने साल 2009 में फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी थी। कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि वह पति ने जो आरोप लगाए हैं, वह पत्नी की क्रूरता के आरोपों को साबित करने में असफल रहा है। पति ने हाई कोर्ट में पति ने फैमिली कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तहरीर दी थी। 2025 में हाई कोर्ट ने फैसला पति के पक्ष में सुनाया।  

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पत्नी ने क्या कहा है?

पत्नी ने तर्क दिया कि वह हमेशा से शादी जारी रखने के लिए इच्छुक थी और उसने न तो पति के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया और न ही उसे छोड़ा। पत्नी ने दावा किया कि पति उसके खिलाफ क्रूरता के आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर पाए हैं।

पति ने क्या तर्क दिए हैं?

पति का कहना है कि पत्नी ने शादी बचाने की कोशिश ही नहीं की है। दोनों पक्ष, 15 साल से अलग रह रहे थे। पति ने कहा कि पत्नी ने कई बार पति के साथ यौन संबंध बनाने से इनकार कर दिया, जो क्रूरता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जोर दिया कि डेढ़ दशक तक, शादी में बिना यौन संबंधों के रहना, केस का अहम पहलू है। 
सु्प्रीम कोर्ट ने कहा है कि दोनों लोग, अपने-अपने काम और घरों को नहीं छोड़ना चाह रहे हैं, शादी भावनात्मक तौर पर नहीं है, इसलिए दोनों के हित में शादी का खत्म हो जाना है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा कि जिस पर गौर करना जरूरी है? 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी में जुड़े मामलों का लंबे वक्त तक लंबित रहना, सिर्फ कागजों पर ही शादी को स्थाई बना देता है। दोनों पक्षों और समाज के हित में यह है कि शादी के संबंध ऐसे दंपतियों के बीच खत्म हो जाए। 

कोर्ट ने कहा कि दंपति बहुत लंबे समय से अलग रह रहे हैं और अब उनके बीच विवाह की कोई पवित्रता नहीं बची है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शादी दोनों पक्षों की शादी खत्म की जा सकती है। कोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज कर दी। 

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