केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं क्लास के नतीजों के बाद एक नया विवाद शुरू हो गया है। इस साल बोर्ड ने कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचने का एक नया डिजिटल सिस्टम शुरू किया था जिसे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OMS) कहा जा रहा है। कॉपियों की चेकिंग में गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया पर अलग-अलग स्कूलों के प्रिंसिपलों के वीडियो अचानक वायरल होने लगे। सभी प्रिंसिपल अपने वीडियो में बिल्कुल एक जैसी लाइनें और एक जैसे शब्द बोल रहे थे।
CBSE के रीजनल ऑफिस ने पहले ही प्रिंसिपलों को एक पेपर भेजा था जिसका नाम था मटीरियल फॉर प्रिंसिपल्स। इस पेपर में पूरी स्क्रिप्ट लिखी थी कि प्रिंसिपलों को कैमरे के सामने क्या बोलना है और इस नए सिस्टम का बचाव कैसे करना है।
बोर्ड ने यह पेपर सरकारी केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों समेत देश के सैकड़ों स्कूलों को भेजा था। इस पेपर में प्रिंसिपलों को आदेश दिया गया था कि वे सोशल मीडिया पर जाकर इस नए सिस्टम का सपोर्ट करें। उन्हें बोलने के लिए कुछ खास शब्द दिए गए थे जैसे यह नया सिस्टम साफ-सुथरा, एकदम सही, तेज और टेक्नॉलजी वाला है।
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स्क्रिप्ट में बोर्ड की तारीफ करने को कहा गया था कि बोर्ड बच्चों की बहुत परवाह करता है उनकी बातें सुनता है और बहुत जल्दी कदम उठाता है। प्रिंसिपलों को यह लाइन भी बोलने को कही गई थी कि शुरुआत में टेक्नोलॉजी में थोड़ी दिक्कतें आती हैं पर कोई भी बच्चा घबराए नहीं क्योंकि किसी भी बच्चे का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसमें यह भी लिखा था कि अगर किसी बच्चे के नंबर और उसकी ऑनलाइन कॉपी में अंतर दिखता है तो वह दोबारा चेकिंग के सरकारी तरीके का इस्तेमाल करे।
वीडियो में किस प्रिंसिपल ने क्या बोला?
सिलीगुड़ी के डीपीएस स्कूल की प्रिंसिपल अनीशा शर्मा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो डाला। उन्होंने कहा कि यह नया सिस्टम बहुत अच्छा, साफ-सुथरा और तेज है। उन्होंने कहा कि CBSE बच्चों की हर परेशानी और शिकायत को तुरंत सुनता है। इसी तरह सूरत की प्रिंसिपल सारिका सिंह ने वीडियो में कहा कि इस साल 98 लाख कॉपियों को कंप्यूटर पर लाया गया है जो अपने आप में एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड है। इससे नंबर जोड़ने की गलतियां नहीं होतीं और कागज भी बचता है।
उन्होंने भी कहा कि किसी बच्चे का नुकसान नहीं होगा। वडोदरा की प्रिंसिपल लीना नायर ने भी ठीक वही शब्द दोहराए कि यह नया तरीका बहुत बढ़िया, साफ-सुथरा है और इससे पर्यावरण को फायदा होता है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल तरीके ने परीक्षा के पूरे सिस्टम को बहुत मजबूत बना दिया है। एक और वीडियो सामने आया जिसमें एक प्रिंसिपल साफ तौर पर कैमरे के सामने लिखी हुई स्क्रिप्ट को देखकर पढ़ते हुए पकड़े गए।
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छात्रों को भी घसीटा गया
सोशल मीडिया साइट रेडिट पर एक छात्र ने अपनी आपबीती शेयर की। उसने लिखा कि उसके स्कूल के टीचर्स उसे जबरदस्ती इंस्टाग्राम पर अपनी फोटो और नंबर डालकर यह लिखने को कह रहे हैं कि मुझे CBSE की इस नई चेकिंग से कोई परेशानी नहीं है। इसके साथ ही इम्फाल के एक केंद्रीय विद्यालय का वीडियो भी सामने आया जिसमें छोटे-छोटे बच्चों से इस सिस्टम की तारीफ करवाई जा रही थी और उनसे इसे सच्चा और सही बुलवाया जा रहा था। सोशल मीडिया पर लोग इस बात से बहुत नाराज हैं कि अपनी गलती छुपाने के लिए स्कूल और बोर्ड छोटे-छोटे मासूम बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पेरेंट्स नाराज क्यों हैं?
12वीं क्लास के कई छात्रों का कहना है कि उनके नंबर उम्मीद से बहुत कम आए हैं। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इंटरनेट पर अपनी कॉपियां डाउनलोड करके देखीं तो उसमें लिखी हुई राइटिंग उनकी थी ही नहीं। इससे शक हो रहा है कि कॉपियां आपस में बदल गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस प्राइवेट कंपनी को डिजिटल चेकिंग का ठेका दिया गया है उसका सिस्टम सुरक्षित नहीं था और उसमें गड़बड़ी हुई है।
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CBSE ने अब क्या सफाई दी?
CBSE ने कंपनी को ठेका देने और सिस्टम लीक होने की सभी बातों को पूरी तरह गलत और झूठ बताया है। विवाद को बढ़ता देख CBSE ने बच्चों की मदद के लिए दिन-रात चलने वाला एक नया सपोर्ट सिस्टम शुरू कर दिया है। देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद इस मामले में दखल दिया है। उन्होंने अधिकारियों को साफ कहा है कि बच्चों की सभी दिक्कतों को बहुत जल्दी ईमानदारी और अच्छे तरीके से सुलझाया जाए। सरकार ने कहा है कि बच्चों के साथ कोई नाइंसाफी नहीं होगी।