देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। भारत सरकार ने शनिवार को कच्चे तेल और फ्यूल सप्लाई का रिव्यू किया, खासकर मिडिल ईस्ट में तनावपूर्ण हालात के बीच। सरकार ने कहा कि वह घरेलू सप्लाई पक्का करने के लिए हर कदम उठा रही है और हालात पर नजर रखती रहेगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने कच्चे तेल, LPG और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता का रिव्यू करने के लिए मंत्रालय और पब्लिक सेक्टर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीटिंग की। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'हम लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं और देश में फ्यूल की उपलब्धता और अफोर्डेबिलिटी पक्का करने के लिए सभी कदम उठाएंगे।'
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क्यों बढ़ी है भारत की चिंता?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 85 प्रतिशत आयात पर निर्भर करता है, ज्यादातर तेल पश्चिमी एशिया से आता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर वैश्विक कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर की बढ़ोतरी होती है तो भारत का सालाना तेल आयात बिल लगभग 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है। इससे महंगाई बढ़ती है, चालू खाता घाटा बढ़ता है और घरेलू ईंधन की कीमत तय करना मुश्किल हो जाता है।
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सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, इन चीजों पर भी पड़ेगा असर
कच्चा तेल सिर्फ ईंधन का स्रोत नहीं है। यह डिटर्जेंट, बिस्कुट, टूथपेस्ट, पेंट और पैकेजिंग सामग्री जैसे रोजमर्रा के उत्पादों में भी काम आता है। साबुन, शैम्पू, क्रीम, हेयर ऑयल और प्लास्टिक की बोतलों में भी पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं। FMCG कंपनियों की उत्पादन लागत का 25 प्रतिशत और पेंट कंपनियों का लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल से जुड़ा है। इसलिए तेल की लंबी अवधि तक बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
वैश्विक सप्लाई चेन ठप क्यों हुआ?
हालात तब और खराब हो गए जब कतर की सरकारी कंपनी कतरएनर्जी ने ईरानी ड्रोन हमलों के बाद लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का प्रोडक्शन रोक दिया। इससे यूरोप में गैस की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई। सऊदी अरब ने भी अपनी रास तनुरा ऑयल रिफाइनरी की कुछ यूनिट्स को कुछ समय के लिए बंद कर दिया।
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कतर एनर्जी ने कहा कि रास लफ्फान और मेसाईद इंडस्ट्रियल एरिया में मिलिट्री हमलों की वजह से LNG और उससे जुड़े उत्पादों का प्रोडक्शन रोक दिया गया है। हालांकि, किसी के घायल होने की खबर नहीं है। इस संकट का असर वैश्विक मार्केट पर पड़ा है और यूरोप में गैस की कीमतें लगभग 50 परसेंट बढ़ गई हैं। जिससे सप्लाई संकट के और लंबे समय तक बने रहने का डर बढ़ गया है।