भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग और कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर, टीवी से लेकर टेलीकॉम और डिजिटल सिस्टम तक, हर जगह इलेक्ट्रॉनिक सामान और पुर्जों की जरूरत बढ़ी है। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में तेज बढ़ोतरी के बावजूद अभी भी कुछ जरूरी कंपोनेंट्स और मटेरियल के लिए भारत आयात पर निर्भर है। इनमें PCB, कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल, कनेक्टर, कैपेसिटर, लिथियम-आयन सेल से जुड़े कंपोनेंट और रेयर-अर्थ मैग्नेट शामिल आदि शामिल है।
सरकार अब इस निर्भरता को कम करने और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के जरिए इनकी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर जोर दे रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने अगस्त 2026 तक ECMS के तहत 31 और प्रस्तावों को मंजूरी दी, अब स्कीम में मंजूर प्रोजेक्ट की कुल संख्या 106 हो गई है।
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भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में तेजी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले लगभग एक दशक में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में काफी तेजी से विकास हुआ है। 2014- 15 में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये था, 2025-26 में यह बढ़कर 13.11 रुपये लाख करोड़ हो गया। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात 2014-15 में 38,000 करोड़ से अधिक था, जो अब 2025-26 में यह बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों के उत्पादन का लक्ष्य
सरकार का अब अगला लक्ष्य केवल इलेक्ट्रॉनिक्स को असेंबल करना नहीं है, बल्कि उसके जरूरी पुर्जों और कच्चे माल का भी भारत में उत्पादन करना है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा। इसके लिए सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम यानी ECMS को मजबूत बना रही है। इसका मकसद भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स के जरूरी पुर्जों का उत्पादन बढ़ाना है।
आज भी कई जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सामान और कच्चे माल के लिए भारत को दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है। जैसे प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल, कनेक्टर, कैपेसिटर, लिथियम-आयन सेल, रेयर-अर्थ मैग्नेट आदि। ECMS के तहत इन जैसे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, सब-असेंबली, सप्लाई-चेन से जुड़े उत्पाद और जरूरी मशीनरी बनाने को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ECMS के तहत क्या कर रही सरकार?
ECMS का मकसद भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स के जरूरी पुर्जे और कच्चा माल बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है, यह योजना 8 अप्रैल 2025 को शुरू हुई। शुरुआत में बजट 22,919 करोड़ था लेकिन अब यानी 2026-27 में इसे बढ़ाकर 40,000 करोड़ किया गया। इसके अलावा, अगस्त 2026 तक 15 राज्यों में 106 परियोजनाओं को मंजूरी मिली।
इसके अलावा, इन परियोजनाओं में 69,548 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इसके साथ ही 38 प्लांटों में उत्पादन शुरू हो चुका है। इन परियोजनाओं से लगभग 5.34 लाख करोड़ का उत्पादन और 3.25 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार की उम्मीद है।