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भारत से पहले किन देशों में दी जा रही है इच्छामृत्यु? शर्तें भी जान लीजिए

सुप्रीम कोर्ट ने 31 साल के हरिश राणा को इच्छामृत्यु का अधिकार दिया है। भारत के अलावा कई देशों में भी इच्छामृत्यु का अधिकार दिया जाता है। दूसरे देशों में किस प्रकार इच्छामृत्यु दी जाती है, जानिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit - X

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सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को एक अहम फैसला लिया है, जहां कोर्ट के जजों ने 31 साल के हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत दी है। भारत का यह पहला फैसला है, जहां किसी व्यक्ति को कोर्ट में इच्छामृत्यु का अधिकार दिया गया हो। यह फैसला भले ही पहला है लेकिन भारत में इच्छा मृत्यु का अधिकार पहले से मौजूद है। भारत के अलावा कई ऐसे देश हैं, जहां लोगों को इच्छामृत्यु का अधिकार मिला हुआ है।

 

भारत में उस व्यक्ति को इच्छामृत्यु दी जाती है जो जीवन बचाने वाली मशीन यानी वेंटिलेटर के सहारे जी रहा हो। साथ ही डॉक्टर यह पुष्टि कर दें कि वह व्यक्ति ठीक नहीं हो सकता। हरीश राणा भी कई सालों से कोमा में हैं और वेंटिलेटर के सहारे जीवित हैं। इस फैसले के बाद वेंटिलेटर हटा दिया जाएगा, जिससे उनकी की मृत्यु हो जाएगी। भारत में जहर देकर इच्छा मृत्यु नहीं दी जाती है। इच्छा मृत्यु का अधिकार किसी व्यक्ति को तभी दिया जाता है, जब वह ठीक न होने वाली बीमारी से ग्रस्त हो। भारत के अलावा कई ऐसे देश हैं, जहां इच्छामृत्यु का अधिकार दिया जाता है।

 

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भारत में आत्महत्या का अधिकार नहीं है लेकिन इच्छा मृत्यु का अधिकार है। इसी वजह से यह अधिकार अक्सर सवालों के घेरे में रहता है। भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कोलंबिया, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड में भी इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाती है। अब सवाल उठता है कि इन देशों में किस प्रकार इच्छामृत्यु दी जाती है।

 

अमेरिका में इच्छामृत्यु के नियम

अमेरिका में एक्टिव इच्छामृत्यु अवैध है लेकिन अमेरिका के 10 ऐसे राज्य हैं जहां डेथ विद डिग्निटी कानून लागू है। इन राज्यों में कैलिफोर्निया, ओरेगन और वाशिंगटन जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में डॉक्टर की मदद से दवा देकर इच्छा मृत्यु मिल सकती है। हालांकि, 18 साल से कम उम्र के लोग इच्छा मृत्यु नहीं ले सकते। नियमों के अनुसार वही लोग इच्छा मृत्यु का अधिकार ले सकते हैं जो गंभीर बीमारी से ग्रस्त हों और जिनके ठीक होने की कोई उम्मीद न हो।

 

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ऑस्ट्रेलिया

यहां के लोगों को इच्छामृत्यु का अधिकार है लेकिन कुछ शर्तों के साथ। इसकी शुरुआत 2019 में हुई थी। इच्छामृत्यु उसे मिल सकती है जो वयस्क हो और खुद निर्णय लेने में सक्षम हो। साथ ही उसे लाइलाज बीमारी हो। यहां लाइलाज बीमारी होने पर व्यक्ति डॉक्टर से सलाह ले सकता है, जिसके बाद डॉक्टर मरीज को दवा देते हैं, जिससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।


नीदरलैंड

इस देश में 2002 से पहले इच्छामृत्यु अवैध थी। 2002 में एक कानून लाया गया, जिसके बाद इच्छामृत्यु को वैध कर दिया गया। यहां 12 साल की उम्र के बाद व्यक्ति को इच्छामृत्यु का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, 12 से 16 साल के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी होती है।

 

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कनाडा

यहां इच्छामृत्यु को कानूनी इजाजत 2016 में दी गई थी। यहां डॉक्टरों और नर्सों की मदद से इच्छामृत्यु दी जाती है। यह अधिकार केवल वयस्कों के लिए है। हालांकि इस नियम को लेकर बहस भी होती रहती है, क्योंकि कुछ मामलों में डिप्रेशन के मरीजों को भी इच्छा मृत्यु दिए जाने की बात सामने आई है।


बेल्जियम

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यहां भी कड़े कानूनों के साथ इच्छामृत्यु को वैध माना गया है। 2002 में यहां यह कानून लागू किया गया था। इसके तहत उन लोगों को इच्छा मृत्यु की इजाजत मिलती है जो शारीरिक और मानसिक रूप से गंभीर पीड़ा का सामना कर रहे हों और जिनके ठीक होने की कोई उम्मीद न हो।


स्विट्जरलैंड

इस देश में भी इच्छा मृत्यु कानूनी रूप से लागू है। यहां जहरीली दवा देकर व्यक्ति को अपनी इच्छा से मरने की अनुमति है। यहां की सरकार ने कुछ साल पहले 'सुसाइड पॉड' को भी कानूनी मंजूरी दी थी। सुसाइड पॉड एक मशीन है, जिसमें व्यक्ति लेटकर एक बटन दबाता है जिसके तुरंत  बाद उसकी मृत्यु होती है और दवा के जरिए उसकी मृत्यु हो जाती है।

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