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'कानून व्यवस्था आपके दायरे में नहीं तो इस्तीफा दें', CJI सूर्यकांत से कांग्रेस

केरल कांग्रेस ने देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत से इस्तीफा मांग लिया है। केरल कांग्रेस का कहना है कि अगर उनके दायरे में कानून व्यवस्था नहीं है तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।

CJI Suryakant

भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत। Photo Credit: PTI

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केरल कांग्रेस ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से इस्तीफा देने को कहा है। सोमवार को CJI ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों और पाबंदियों पर पूछे गए सवाल पर कहा था कि यह कानून-व्यवस्था का मुद्दा है और उनका विषय नहीं है। इसी बयान पर कांग्रेस केरल ने X पर पोस्ट किया। कांग्रेस ने लिखा कि अगर कानून-व्यवस्था उनका दायरा नहीं है, तो वह अभी इस्तीफा दें, उनकी जगह संभाल सकने वाला व्यक्ति खोज लिया जाएगा।

CJI दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बात कर रहे थे। हाल के दिनों में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई प्रदर्शन हुए हैं। विपक्ष मतदाता सूची के संशोधन ( SIR ) में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रही है। यह भी आरोप लगा रही है कि ज्ञानेश कुमार, अपने सह आयुक्तों के सुझावों को नहीं मानते हैं।

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CJI सूर्यकांत ने क्या कहा था?

CJI सूर्यकांत ने कहा था कि यह कानून-व्यवस्था का मुद्दा है और उनका विषय नहीं है। उन्होंने INDIA गठबंधन के मार्च और उनसे मिलने की मांग पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। विपक्षी नेताओं से मुलाकात में उन्होंने असमर्थता जताई। उनके मुताबिक मामला पहले से कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए नेताओं को याचिका दायर करनी चाहिए।

 

 

CJI ने बताया कि उन्हें मुलाकात की मांग वाला पत्र रविवार को मिला था और उन्होंने उसी रात जवाब दे दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को लिखे पत्र की बातें उन्होंने गोपनीय रखने की बात कही। बाद में कांग्रेस ने यह पत्र अपने X अकाउंट पर साझा किया।

CJI ने क्यों असमर्थतता जताई थी?

दो पेज के पत्र में CJI ने लिखा कि जिन मुद्दों का जिक्र है, वे सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। उनके मुताबिक लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक करना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ होगा। उन्होंने यह भी लिखा कि संवैधानिक ढांचे में सुप्रीम कोर्ट के पास पत्र में उठाए मुद्दों से निपटने की कोई प्रशासनिक शक्ति नहीं है।

CJI ने पत्र में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत कोर्ट नागरिकों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को न्यायिक पक्ष में देखने के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि ज्ञापन देने के बजाय कोर्ट की न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करना ज्यादा उचित होगा। उन्होंने बताया कि ऐसे ही मुद्दों से जुड़े कुछ मामलों की सुनवाई मंगलवार को होने वाली है।

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विपक्ष को CJI ने क्या राह बताई थी?

CJI ने नेताओं से कहा कि वे चाहें तो सोमवार को सुबह 10:30 से शाम 4:30 बजे के बीच सुप्रीम कोर्ट में सीधे याचिका दे सकते हैं। ई-फाइलिंग से किसी भी दिन और समय याचिका दी जा सकती है। उन्होंने भरोसा दिया कि ऐसी याचिका कानून के मुताबिक जल्द से जल्द सुनी जाएगी।

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के प्रदर्शन के अपील को देखते हुए केंद्र ने 20,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए थे। शनिवार को 45 मेट्रो स्टेशन बंद रहे और शहर की सीमाओं पर कड़ी जांच हुई। प्रदर्शनों के दौरान CJP के शीर्ष नेताओं और चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया। अब राहुल गांधी याचिका दायर करने सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं।

 


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