नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने'क्राइम इन इंडिया 2024' में बताया है कि हर साल दहेज की वजह से 5737 महिलाओं की मौत होती है। हर दिन, कम से कम 15 लड़कियों को दहेज के लिए मार दिया जाता है। ये आंकड़े 2023-24 के हैं। निक्की भाटी, दीपिका नागर और त्विषा शर्मा जैसी कितनी लड़कियों के घरवालों ने आरोप लगाए कि ससुराल वाले दहेज का दबाव बना रहे थे, नहीं समय से दहेज दे सके तो बेटी को मार डाला।
2024 में जो मामले सामने आए, उनमें भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज मामले 3057 थे और भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज केस 2680 थे। 1 जुलाई 2024 से पहले दर्ज सभी मामले, IPC के तहत ही आते थे। 1 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता लागू हुआ।
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देश में दहेज उत्पीड़न के आंकड़े क्या हैं?
दहेज उत्पीड़न के मामले, बेहद भयावह हैं। साल 1961 में ही दहेज प्रतिषेध अधिनियम आया था। साल 2023-24 के बीच इस अधिनियम के तहत कुल 13479 केस दर्ज हुए, 2023 में ये आंकड़े बढ़र 15489 हुए और 2024 में आंकड़ों में थोड़ी गिरावट आई और 12343 मामले सामने आए। भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 और भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (बी) दहेज हत्या से संबंधित है।
विशाल अरुण मिश्रा, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट:-
दहेज हत्या के ज्यादातर मामलों को साबित कर पाना इसलिए कठिन होता है क्योंकि साक्ष्य नहीं मिल पाते हैं। दहेज हत्या को खुदकुशी दिखा दिया जाता है। जो गवाह हो सकती थी, उसकी मौत हो चुकी होती है, इसलिए पीड़ित का पक्ष आ ही नहीं पाता। खुदकुशी के लिए उकसाने की अधिकतम सजा 10 साल है। इसे अदालत में साबित करना जटिल है।
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एडवोकेट विशाल अरुण मिश्रा ने कहा, 'जिन्होंने महिला का उत्पीड़न देखा है वे आमतौर पर पड़ोसी या घरवाले होते हैं। घरवाले, अपने घर के सदस्य के खिलाफ तहरीर नहीं देते, गवाही से मुकर जाते हैं। पड़ोसियों पर भी दबाव रहता है, ससुराल पक्ष के रिश्तेदार भी खुलकर अपने घरवालों का साथ देते हैं। आरोप को साबित करने की जिम्मेदारी पीड़ित पक्ष की होती है। पीड़ित पक्ष,अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद ही नहीं होता।'
दहेज हत्या की परिभाषा क्या है?
सु्प्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, विशाल अरुण मिश्रा ने बताया, 'भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 दहेज हत्या से संबंधित है। अगर किसी महिला की शादी के 7 साल के अंदर असामान्य परिस्थितियों में जलने, चोट लगने या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है और मौत से ठीक पहले उसके पति या ससुराल वाले दहेज की मांग को लेकर उससे क्रूरता (मारपीट, तंग करना या मानसिक यातना) बरत रहे हों तो इसे दहेज हत्या माना जाएगा।'
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कितनी सजा होती है?
एडवोकेट विशाल अरुण मिश्रा ने कहा, 'दहेज हत्या की स्थिति में पति और उसके रिश्तेदारों को ही मौत का जिम्मेदार माना जाएगा। इस अपराध की सजा कम से कम 7 साल जेल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है। यह केस संज्ञेय, गैर-जमानती अपराध है और सेशन कोर्ट में ही सुनवाई होती है।'
दहेज क्या है?
एडवोकेट विशाल अरुण मिश्रा ने कहा, 'दहेज की परिभाषा, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2 में दी गई है। शादी के लिए दोनों पक्षों में से एक किसी पक्ष का, शादी के बदले पैसे, सामान या जमीन की मांग करना दहेज है। दहेज लेने वाले पक्ष को धारा 3 के मुताबिक कम से कम 6 महीने और अधिकम 2 साल की सजा हो सकती है। 10 हजार रुपये जुर्माना भी देना पड़ सकता है।'
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शहरों में भी खूब होती हैं दहेज हत्याएं
दहेज हत्या के मामलों में महानगर भी कम नहीं हैं। कानपुर में साल 2024 में 54 केस सामने आए। दिल्ली में 111, जयपुर में 25 और बेंगलुरु में 25 मौतें, दहेज हत्या के तौर पर दर्ज हुईं। लखनऊ में 22 महिलाएं और पटना में 30 महिलाएं दहेज की भेंट चढ़ीं।
किन राज्यों में ज्यादा बुरे हालात हैं?
'क्राइम इन इंडिया 2024' के आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 में देशभर में 5,737 दहेज मौतें दर्ज की गईं, जो 2015 के 7,634 मामलों से काफी कम है। हालांकि, औसतन रोजाना 15 से अधिक महिलाओं की दहेज संबंधी हिंसा में मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 2,038 मामले सामने आए, जबकि बिहार में 1,078, मध्य प्रदेश में 450, राजस्थान में 386 और पश्चिम बंगाल में 337 मामले दर्ज हुए। दहेज प्रताड़ना की वजह से साल 2024 में पति और ससुराल वालों की ओर से बरती गई क्रूरता के 1.20 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इन मामलों की संख्या सबसे अधिक रही। दहेज निषेध अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में 37 प्रतिशत मामले लंबित हैं।