logo

मूड

ट्रेंडिंग:

महात्मा गांधी ने कौनसी किताबें लिखीं? उनके जन्मदिन पर जान लीजिए

महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने न सिर्फ देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी, बल्कि लोगों को अहिंसा का मार्ग समझाया। गांधी के बारे में जानने के लिए आपको कुछ खास किताबें पढ़नी चाहिए।

 Gandhi

मोहनदास करमचंद गांधी, Photo Credit- Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

आज के दिन देश के तमाम लोग मोहनदास करमचंद गांधी की जयंती मना रहे हैं। महात्मा गांधी सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने कई ऐसी किताबें लिखी थीं, जिन्हें पढ़कर आज की जेनरेशन जेड के लोग अहिंसा और संयम का मार्ग समझ सकते हैं। गांधी ने अपनी किताबों के जरिए जीवन, अहिंसा और राजनीति के बारे में अपने विचार साझा किए हैं। इसके साथ ही गांधी ने कई अखबार प्रकाशित करवाए थे, जिन्हें पढ़कर लाखों लोगों ने न सिर्फ जानकारी हासिल की, बल्कि वे लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक भी हुए। तो उन किताबों और अखबारों के बारे में हर व्यक्ति को जानना चाहिए।

 

गांधी ने हिंद स्वराज, सत्य के प्रयोग नाम की आत्मकथा, गोखले मेरे राजनीतिक गुरु और दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास लिखी थी। इसके अलावा गांधी ने नवजीवन, यंग इंडिया, हरिजन अखबार और इंडियन ओपिनियन अखबार प्रकाशित किए थे। गांधीजी की किताबों को पढ़कर आपको भी अहिंसा और संयम की अहमियत समझ आएगी। अब सवाल उठता है कि हर किताब में गांधी ने क्या लिखा है? आइए जानते हैं।

 

यह भी पढ़ें: 'BJP आज मेरे साथ है, कल हो न हो', कंगना रनौत ने क्यों दिया यह बयान?

हिंद स्वराज

हिंद स्वराज गांधी की खास किताबों में से एक है, जो उनके जीवन के विचारों को गहराई से समझाती है। गांधी ने यह किताब 1909 में लिखी थी। यह किताब पढ़ने से आज के दौर के युवाओं को भी समझ आ जाएगा कि 1909 में स्वतंत्रता संग्राम की परिस्थिति क्या थी।

सत्य के प्रयोग

इस किताब के जरिए गांधी ने अपने जीवन के हर अनुभव को सच्चाई के साथ बयां किया है। इसमें उन्होंने अपने जीवन की गलतियों समेत अपनी आध्यात्मिक और दार्शनिक यात्रा के बारे में लिखा है। गांधी ने अपने जीवन से जुड़े सच्चे किस्से-कहानियां 1925 से लेकर 1929 तक लिखी थीं, जो उनकी पत्रिका नवजीवन में छपती थीं। इसे सबसे पहले गुजराती भाषा में लिखा गया, उसके बाद किताब को हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया।

 

यह भी पढ़ें: चीनी का होगा आयात, अवैध स्टॉक रखने वालों पर होगी कार्रवाई, दाम में आएगी गिरावट

गोखले मेरे राजनीतिक गुरु

गांधी गोपाल कृष्ण गोखले को अपना गुरु मानते थे। वह मानते थे कि सेवा भाव उन्हें गोपाल कृष्ण गोखले से ही सीखने को मिला था। गांधी ने इस किताब में लिखा है कि उन्हें गोपाल कृष्ण गोखले से सीख मिली, तभी वह कई उपलब्धियां हासिल कर पाए। महात्मा गांधी की यह पुस्तक 1955 में प्रकाशित हुई थी, जिसमें गांधी और गोखले के लेखों का संकलन किया गया है। जानकारी के लिए बता दें कि गांधी ने गुजराती भाषा में लेख लिखा था, जिसे बाद में अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया।

दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास

गांधी कई साल तक दक्षिण अफ्रीका में रहे थे। वहां के राष्ट्रीय संघर्ष की कहानी उन्होंने इस किताब में लिखी है। इस किताब में उन्होंने न सिर्फ समाज के संघर्ष की कहानी लिखी है, बल्कि यह भी लिखा है कि देश के संघर्ष से बचने के लिए लोगों को हिंसा के बजाय अहिंसा के मार्ग पर चलना चाहिए। गांधी की आत्मकथा के बाद यह किताब बेहद खास मानी जाती है, जिसे आज के युवाओं को जरूर पढ़नी चाहिए।

 

यह भी पढ़ें: 14 राज्यों से 253 गिरफ्तार, स्वतंत्रता दिवस पर आतंकी हमलों का था प्लान

गांधी जी के अखबार

नवजीवन एक ऐसा अखबार है, जो आज भी प्रकाशित होता है। इसका पहला प्रकाशन 7 सितंबर 1919 में हुआ था। यह गुजरात में प्रकाशित होने वाला गुजराती अखबार था, जो पिछले कई सालों से प्रकाशित हो रहा है। इसके अलावा महात्मा गांधी ने इंडियन ओपिनियन, यंग इंडिया और हरिजन भी प्रकाशित किए थे। गांधी जी से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि जब उन्होंने पहली बार नवजीवन अखबार को प्रकाशित कराया था, तब उन्होंने साफ तौर पर बता दिया था कि इस अखबार में विज्ञापन नहीं छपेगा।

Related Topic:#National News

और पढ़ें