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दिल्ली HC जारी रखेगा सत्य निकेतन हादसे निगरानी, पूरे देश की समस्या पर रहेगी नजर

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से केस ट्रांसफर करने से मना कर दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट, Photo Credit: Supreme Court

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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले को अपने पास ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामले में अब आगे की कार्रवाई शुरू हो चुकी है और कार्रवाई बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट ही इसकी निगरानी जारी रखे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि यह सुनवाई सिर्फ दिल्ली या लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर इस समस्या पर निगरानी रखनी होगी। 

 

इस मामले की सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट मामले की निगरानी जारी रखेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से मामले की नियमित अंतराल पर निगरानी करने को कहा है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम को भी मौजूदा कार्यवाही के संबंध में अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

 

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अब तक क्या-क्या हुआ?

दिल्ली के मोती बाग के पास सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी की इमारत गिर गई। इस हादसे में दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों समेत कुल 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण, कमजोर इमारतों और पीजी-हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। यह मामला पहले से ही दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा है। हाई कोर्ट इस हादसे से जुड़े मामलों और इमारतों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर निगरानी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के सामने जब इस मामले को लाने और इसकी निगरानी अपने हाथ में लेने की बात आई, तो कोर्ट ने फिलहाल ऐसा करने से मना कर दिया।

लगातार जारी है कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की निगरानी जारी रखे और इसे उसके अंतिम नतीजे तक ले जाए। कोर्ट का मानना है कि फिलहाल हाई कोर्ट में कार्रवाई आगे बढ़ रही है और ऐसे समय में मामले को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं है। इस हादसे के बाद दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी गई है। दिल्ली नगर निगम ने कई ऐसी इमारतों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनमें नियमों का उल्लंघन पाया गया। कई इमारतों को गिराया गया है और कई अन्य के खिलाफ भी ध्वस्तीकरण या सीलिंग की कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

 

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कई सवाल हुए खड़े

शुरुआती जांच से इमारत में अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त मंजिलों से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। इसी वजह से यह मामला केवल एक इमारत गिरने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दिल्ली में भवन निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले को केवल सत्य निकेतन तक सीमित रखने के बजाय देशभर में भवन सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दे पर भी विचार कर रहा है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए देशभर में सुरक्षा मानकों और नियमित जांच को लेकर दिशा-निर्देशों की जरूरत पड़ सकती है।

 

कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त वरिष्ठ वकील (अमिकस क्यूरी) अजीत कुमार ने बताया कि दिल्ली के चार इलाकों और लखनऊ में जांच की जा चुकी है। पहले दिए गए आदेश के तहत दिल्ली के लाजपत नगर, साकेत, मालवीय नगर और सरोजिनी नगर के साथ लखनऊ के अलीगंज इलाके में भी जांच की गई। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हीं के सुझाव पर हाई कोर्ट को मामले की निगरानी जारी रखने के लिए कहा और समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा। इस मामले पर पूरे देश की नजर है। 

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