logo

मूड

ट्रेंडिंग:

क्या बिना इंश्योरेंस के नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल? SC के सुझाव से बढ़ी हलचल

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि बिना वैध बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल न मिले। कोर्ट ने केंद्र और IRDAI से इस व्यवस्था पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा है।

Supreme court suggests no fuel for without insurance vehicle at petrol pump

पेट्रोल पंप का कर्मचारी गाड़ी में फ्यूल भरता हुआ, Photo Credit: ANI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर मुआवजा मिले और सड़क सुरक्षा बेहतर हो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा सुझाव दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) से कहा है कि ऐसा पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाए जिसमें जिन वाहनों का वैध बीमा नहीं है उन्हें पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या डीजल न दिया जाए। अगर यह नियम लागू होता है तो बिना इंश्योरेंस वाले वाहन चलाने वालों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

 

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा कि देश में बड़ी तादाद में ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं जिनका बीमा नहीं है। ऐसे में अगर सड़क हादसा होता है तो पीड़ितों को मुआवजा मिलने में काफी देरी होती है और उन्हें लंबे समय तक कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन कानून के तहत हर वाहन का बीमा होना जरूरी है लेकिन इस नियम का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है।

 

यह भी पढ़ें: 'हमारा कोई लेना-देना नहीं', शेख हसीना के कार्यक्रम पर भारत सरकार ने दिया जवाब

56% वाहन बिना बीमा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि देश में लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। इसे देखते हुए अदालत ने सुझाव दिया कि पेट्रोल पंपों पर वाहन के बीमा की जांच की जाए और यदि बीमा वैध नहीं हो तो उसे ईंधन न दिया जाए। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर सिद्धांत रूप से कोई आपत्ति नहीं जताई है। अदालत का मानना है कि इससे लोग समय पर अपने वाहनों का बीमा कराने के लिए प्रेरित होंगे।

 

अदालत ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया कि सड़कों और हाईवे पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों को बीमा डेटाबेस और वाहन (VAHAN) पोर्टल से जोड़ा जाए। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान अपने आप हो सकेगी और उनके खिलाफ ई-चालान जारी किया जा सकेगा। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस और मोबाइल ऐप उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है, जिनकी मदद से मौके पर ही वाहन के बीमा की जांच की जा सके।

 

यह भी पढ़ें: एक झटके में 300 फीट नीचे आ गई Air India की फ्लाइट, दर्जनों यात्री हुए घायल

सुप्रीम कोर्ट ने और भी कई सुझाव दिए

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब नई प्राइवेट कार खरीदने पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस 3 साल नहीं बल्कि 4 साल के लिए लेना होगा। वहीं, नए दोपहिया वाहनों के लिए यह अवधि 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दी गई है। कोर्ट ने बीमा कंपनियों से यह भी कहा है कि वे ग्राहकों को साफ-साफ बताएं कि कौन-सा बीमा लेना जरूरी है और कौन-सा वैकल्पिक है।

 

इसके अलावा, सड़क हादसों में मुआवजे से जुड़े मामलों में हो रही देरी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने सभी राज्यों की पुलिस को पुराने मामलों में डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (DAR) जल्द दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, सभी संबंधित पक्षों से 14 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट देने और 18 अगस्त को अगली सुनवाई के दौरान प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।


और पढ़ें