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'क्या PLA ने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग रोक दी है?', ओवैसी का मोदी सरकार से सवाल

असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने क्या भारत की पेट्रोलिंग रोक दी है, उन्होंने कहा है कि सरकार असली स्थिति तत्काल बताए।

Asaduddin Owaisi

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी। Photo Credit: PTI

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर चीन के साथ कथित टकराव और मौजूदा स्थति पर सरकार से जवाब मांगा है। असदुद्दीन ओवैसी ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अरुणाचल प्रदेश से कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रहा था कि यहां चीन की गतिविधियां बढ़ती जा रहीं हैं। 

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'क्या PLA ने भारतीय सेना के गश्ती दल को उस क्षेत्र में जाने से रोक दिया है, जहां भारतीय सैनिक अब तक नियमित रूप से गश्त करते रहे हैं। क्या भारतीय क्षेत्र में हमारी सेना की गश्ती टीम द्वारा बनाए गए अस्थायी ढांचे को पीएलए ने नष्ट कर दिया है।'

 

यह भी पढ़ें: अरुणाचल का नक्शा अपडेट होते ही क्या भारत-चीन सीमा बदल गई? जानें क्या हुआ बदलाव

असदुद्दीन ओवैसी, चीफ, AIMIM:-
क्या पीएलए ने उस इलाके में तंबू लगाए हैं, जहां पहले हमारी गश्ती टीमें जाती थीं और जो स्पष्ट रूप से भारतीय क्षेत्र है? क्या सरकार सेना पर इस बात के लिए दबाव डाल रही है कि वह उस क्षेत्र में गश्त के अधिकार को मजबूती से बनाए रखने पर जोर न दे, जहां चीन कथित तौर पर परेशानी पैदा कर रहा है।

डोकलाम पर याद दिला रहे हैं ओवैसी?

असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल किया, 'क्या ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सरकार अगले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दिल्ली यात्रा के लिए सामान्य माहौल दिखाना चाहती है। क्या मोदी सरकार ने देश की जनता को चीन के साथ सीमा पर होने वाली घटनाओं से अनजान रखने का फैसला किया है जैसा कि उन्होंने 2017 में डोकलाम और 2020 में लद्दाख में किया गया था।'

 

 

 

यह भी पढ़ें: 'अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा', चीन को MEA ने दिया करारा जवाब

'संप्रभुता से किसी कीमत पर समझौता नहीं'

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वह मोदी सरकार की चुप्पी को देखकर ये सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी को यह समझना चाहिए कि सरकारें आती-जाती रहती हैं और प्रधानमंत्री भी आते-जाते रहते हैं, लेकिन भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सर्वोपरि है।


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