वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, 2025 में दुनिया में करीब 12 लाख नए HIV (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) संक्रमण के मामले सामने आए। वहीं साल के अंत आखिर तक वैश्विक स्तर पर लगभग 4.1 करोड़ लोग HIV के साथ जी रहे थे। आंकड़ों से साफ जाहिर है कि इलाज और रोकथाम में हुई प्रगति के बावजूद हर साल लाखों नए संक्रमण अब भी हो रहे हैं।
भारत की बात करें तो देश में लगभग 24 से 25 लाख लोग HIV के साथ जी रहे हैं। वहीं, हर साल औसतन 63,000 के करीब नए HIV संक्रमण के मामले सामने आते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में नए मामलों और इससे होने वाली मौतों में कमी आई है। हालांकि, अभी भी संक्रमण की रोकथाम दुनिया के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत में HIV से बचाव और रोकथाम के लिए PrEP यानी प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस की गाइडलाइन मौजूद है। भारत के नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) ने 2022 में PrEP के इस्तेमाल को लेकर राष्ट्रीय तकनीकी गाइडलाइन जारी की थी। इसमें सरकारी केंद्रों के जरिए PrEP उपलब्ध कराने और जरूरत के आधार पर लोगों की पहचान कर इसे देने की बात कही गई थी। हालांकि अब तक इसका सार्वजनिक स्तर पर रोलआउट नहीं हुआ है।
जरूरतमंदों तक PrEP दवा की पहुंच
बता दें कि PrEP HIV से बचने की एक एडवांस रोजाना खाई जाने वाली दवा है, जिसे HIV होने से पहले ही सुरक्षा के तौर पर लिया जाता है। इसे लेने से HIV संक्रमण होने का खतरा कम हो जाता है। इस दवा के बारे में लोगों के बीच जागरूकता की कमी है और आम लोगों की पहुंच भी सीमित है। मेडिकल रिसर्च प्लेटफॉर्म PubMed (PMC) के एक सर्वे के मुताबिक भारत में उच्च जोखिम वाले समूहों (जैसे MSM यानी पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुष और सुई से नशा करने वाले लोग) में PrEP के प्रति जागरूकता 10% से भी कम पाई गई है। हालांकि इसे अपनाने की इच्छा 50% से अधिक लोगों में देखने को मिली।
एक स्टडी के मुताबिक ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने PrEP के लिए दवाओं (TDF/FTC) को मंजूरी दी है, पर इनका राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार बेहद सीमित पायलट प्रोजेक्ट्स तक ही सिमटा हुआ है। WHO के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर PrEP का लक्ष्य 2025 तक 1 करोड़ लोगों तक पहुंचना था, जिसमें अफ्रीका और पश्चिमी देश आगे हैं लेकिन भारत में इसका सरकारी स्तर पर अभाव है।
मार्केट में महंगी है PrEP दवा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निजी बाजार में PrEP की एक महीने की दवा की कीमत करीब 2,200 से 3,000 रुपये है। इसके अलावा HIV, हेपेटाइटिस B और C, किडनी की जांच और दूसरे यौन संक्रमणों की जांच पर भी खर्च होता है। हालांकि, कुछ गैर-लाभकारी संस्थाएं इसे सब्सिडी वाली कीमत पर देती हैं। कुछ एक संस्थाओं में महीने की PrEP करीब 400 रुपये में दी जाती है, जबकि कम आय वाले छात्रों या ट्रांसजेंडर लोगों के लिए यह कीमत 200 रुपये तक हो सकती है।
इंजेक्शन का नया विकल्प
बता दें कि अब HIV से बचाव के लिए रोज PrEP की गोली लेने के अलावा लेनाकापाविर (Lenacapavir - LEN) नाम का नया इंजेक्शन भी नया विकल्प बनकर सामने आया है। यह एक लॉन्ग-एक्टिंग PrEP इंजेक्शन है, जिसे साल में सिर्फ दो बार यानी हर 6 महीने में एक बार दिया जाता है। यह वैक्सीन नहीं है। इसका इस्तेमाल HIV निगेटिव लोगों में HIV संक्रमण से बचाव के लिए किया जाता है। WHO ने जुलाई 2025 में इसे HIV से बचाव के लिए PrEP के एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर इसका सुझाव दिया है।
WHO ने इसे HIV से बचाव में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। इसके अलावा लो और मिडिल इनकम वाले देशों में इस इंजेक्शन के जेनेरिक वर्जन बनाने के लिए लाइसेंस भी दिए गए हैं। इनमें भारत की कंपनियां भी शामिल हैं। यानी दुनिया के कई देशों तक यह इंजेक्शन भारत से पहुंच सकता है। ऐसे में एक सवाल फिर उठता है कि भारत में इसके बनने से क्या देश के मरीजों को यह आसानी से उपलब्ध हो सकेगा? हमारे पास पहले से मौजूद और सस्ता विकल्प यानी PrEP क्या जरूरतमंद लोगों तक सही तरीके से पहुंच पाया है?