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जेन जी, आंदोलन, चुनाव आयोग, ट्रेंडिंग मुद्दों के सहारे चुनाव जीतेगी कांग्रेस?

कांग्रेस हर उस मुददे को उठा रही है, जिसकी गूंज सोशल मीडिया पर सुनाई दे रही है। 2027 के चुनावों के लिए कांग्रेस ने 'ट्रेंडिंग' राजनीति चुन ली है।

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पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर वॉटर कैनन छिड़कती पुलिस। Photo Credit: PTI

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कई साल से मुद्दों की राजनीति पर सहयोगी दलों से पीछे छूट रही कांग्रेस को अब नया मुददा मिल गया है। कांग्रेस अब किसी एक मुद्दे के पीछे नहीं पड़ रही है, हर उस मुद्दे को उठा रही है जिसका जिक्र सोशल मीडिया पर हो रहा है। 

चुनाव आयोग से लेकर 'जेन जी' तक, हर उस मुद्दे को कांग्रेस अपना मुद्दा बताकर सत्तारूढ़ सरकार को घेर रही है। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस की इस नई रणनीति से परेशान है। दिन भर टीवी चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक, बीजेपी प्रवक्ता पल-पल बदलते मुद्दों पर अपना पक्ष रख रहे हैं।

 

साल 2027 में गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव मार्च से लेकर मई के बीच हुए हैं। दिसंबर तक दो और राज्यों में चुनाव होंगे गुजरात और हिमाचल प्रदेश। सभी चुनावी राज्यों में एक जैसी सियासी चाल कांग्रेस चल रही है।

यह भी पढ़ें: चिराग, उपेंद्र कुशवाहा से TDP तक, ज्ञानेश कुमार पर अलग जाएंगे BJP के अपने?

कांग्रेस को कौन से नए मुद्दा मिल गए?

कांग्रेस अब सोशल मीडिया पर चल रहे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की की एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मनमाने ढंग से फैसले लेते है, अपने सहायक आयुक्तों के न तो सुझाव मानते हैं, न ही उनकी अपील को सुनते हैं। वह राज्य की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) प्रक्रियाओं में भी सीधा दखल देते है, जबकि यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्ति जताई थी। SIR पर चुनाव आयोग की आंतरिक कलह और कथित मतभेद के बाद ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रही है। 

कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कांग्रेस अब आरोप लगा रही है कि सरकार के इशारे पर करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं। 

25 सितंबर को दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, चंडीगढ़ समेत कई शहरों में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की। राहुल गांधी ने इसे वोट चोरी करार दिया। कांग्रेस प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर निशाना साध रही है। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की भी मांग की है। 

यह भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफे की मांग तेज, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी हिरासत में

महाराष्ट्र के UCC को भी जोर शोर से उठा रही कांग्रेस?

कांग्रेस ने महाराष्ट्र समान नागरिक संहिता (UCC) ड्राफ्ट समिति से पूर्व जज के इस्तीफे को लेकर भी बीजेपी सरकार को घेर रही है। कांग्रेस ने केंद्र पर आरोप लगाया कि यह बंटवारे और विवाद पैदा करने का माध्यम बन गया है। कांग्रेस झारखंड में खनन संशोधन विधेयक के खिलाफ भी प्रदर्शन का एलान किया है। 29 सितंबर को होने वाली बैठक में कांग्रेस कई मुद्दों पर सरकार को घेरने वाली है।

कांग्रेस के मुद्दे पर नाच रहा विपक्ष?

कांग्रेस ने सबसे आक्रामक तरीके से विरोध करना शुरू किया, जिसके बाद अब पूरा विपक्ष साथ देता नजर आ रहा है। कांग्रेस के साथ अब CPI(M), CPI और CPI(ML)-लिबरेशन सहित कई दलों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR प्रक्रिया तुरंत रोकने की मांग की है।

ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए क्या पैंतरा चल रही कांग्रेस?

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अब विपक्षी दल CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का नया नोटिस तैयार कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो यह विपक्ष का तीसरा ऐसा प्रयास होगा। 

यह भी पढ़ें: 'ऐसे कितने दिन जिंदा रहोगे', ज्ञानेश कुमार के साथ विपक्ष पर क्यों बरसे अभिजीत?

कांग्रेस कैसे मुद्दों को भुना रही है?

जुलाई 2026 में NEET पेपर लीक मामले पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा। कांग्रेस नेताओं ने इस आंदोलन के चेहरों से शुरुआती तौर पर परहेज किया, आईटी सेल ने आंदोलन को फेल बताया। बाद में जब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ तो कांग्रेस नेताओं ने क्रेडिट लेने की पूरी कोशिश की। राहुल गांधी ने इस्तीफे के कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री कार्यकालय के बाहर धरना दिया, हंगामा मचा। NEET आंदोलन में लाठी चार्ज, पैलेट गन के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने उन्हें घेरा। कांग्रेस युवाओं की नाराजगी को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है।  

क्या कह रहे हैं राजनीति के जानकार?

सोशल मीडिया पर एक वर्ग ऐसा है जिसका मानना है कि ये मुद्दे कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनसे सत्ता विरोधी माहौल बनता है और युवा वर्ग में असंतोष उभरता है। दूसरी ओर कई विश्लेषक यह भी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने वाले मुद्दे और आंदोलन जरूरी नहीं कि जमीन पर वोट में तब्दील हों। 

कांग्रेस के सामने चुनौतियां क्या हैं?

कांग्रेस सोशल मीडिया के मुद्दों को जमकर उठा रही है। जेनजी को जोड़ने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस की तरफ से इन्हें जमीनी आंदोलन में बदलने की तैयारियां भी चल रहीं हैं। यूपी से लेकर राजस्थान तक कांग्रेस इसी राजनीति पर आगे बढ़ रही है। साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस इन मुद्दों के सहारे अपनी राजनीति साध रही है। 


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