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मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी दो धुर विरोधी, अब चर्चा में क्यों आए?

मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी के बीच मुलाकात की एक तस्वीर सामने आई है, जो गाजीपुर जिले के सियासी परिदृश्य में एक बहस का विषय बन गई है।

Manoj Sinha Afzal Ansari

मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी। Photo Credit- Social Media

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रविवार (31 मई) को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई, जिसपर सियासत को पसंद करने वाले लोगों की नजरें थम गईं। यह तस्वीर जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी की है। दोनों नेता गाजीपुर जिले के ही रहने वाले हैं। दोनों के घरों के बीच की दूरी की बात करें तो वह मुश्किल से 30-35 किलोमीटर है। मगर, दोनों नेता कभी एक दूसरे के साथ सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई दिए। इस एक तस्वीर ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोग चर्चा करने लगे हैं। 

 

दरअसल, यह दोनों नेता एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि अफजाल जिस 'अंसारी' परिवार से आते हैं, उसके बीजेपी पार्टी से कभी रिश्ते मधुर नहीं रहे। हमेशा अंसारी परिवार और बीजेपी में 36 का ही आंकड़ा रहा है। वायरल तस्वीर में सांसद अफजाल अंसारी और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा एक-दूसरे को सम्मानित करते हुए खुश दिखाई दे रहे हैं। 

 

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पूर्वांचल में बीजेपी का चेहरा बने मनोज सिन्हा

केंद्र में मोदी-शाह के उभार के बार पूर्वांचल में बीजेपी ने मनोज सिन्हा को अपना प्रमुख चेहरा बनाया था। धीरे-धीरे गाजीपुर की राजनीति में दोनों ध्रुव बन गए। गाजीपुर से मनोज सिन्हा तीन बार बीजेपी के सांसद रह चुके हैं। सिन्हा 1996 और 1999 में गाजीपुर से बीजेपी के सांसद रहे। इसके बाद 2014 में तो वह गाजीपुर से जीतने के बाद पूरे पांच साल केंद्रीय मंत्री रहे। मगर, 2019 में सिन्हा अफजाल अंसारी के सामने हार गए। इस हार के बाद दोनों खेमों के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया। 

लंबे संघर्ष की कहानी

अफजाल यहां से 2024 में एक बार फिर से जीतकर संसद पहुंचे। मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी के बीच की सियासी अदावत पूर्वांचल और गाजीपुर की राजनीति की सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्विताओं में गिनी जाती है। यह सिर्फ दो नेताओं की लड़ाई नहीं रही, बल्कि बीजेपी और अंसारी परिवार के राजनीतिक प्रभाव के बीच लंबे संघर्ष के तौर पर देखी जाती है।

 

1990 और 2000 के दशक में गाजीपुर और आसपास के इलाके में अंसारी परिवार का मजबूत राजनीतिक प्रभाव रहा है। हालांकि, पहले जैसा तो नहीं लेकिन इस परिवार का प्रभाव जिसे पर आज भी है। अफजाल अंसारी यहां से विधायक और तीन बार सांसद रहे हैं जबकि उनके भाई मुख्तार अंसारी भी पूर्वांचल की राजनीति का बड़ा नाम थे।

 

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आरोप-प्रत्यारोप का दौर

अफजाल अंसारी कई बार सार्वजनिक मंचों से आरोप लगाते रहे हैं कि गाजीपुर और पूर्वांचल में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर उनके खिलाफ कार्रवाई के पीछे मनोज सिन्हा का प्रभाव है। 2022 में उन्होंने यहां तक कहा था कि उन्हें मनोज सिन्हा को हराने की सजा मिल रही है कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा। वहीं भाजपा का आरोप रहा है कि अंसारी परिवार ने लंबे समय तक गाजीपुर-मऊ क्षेत्र की राजनीति को जातीय और बाहुबल आधारित राजनीति की ओर धकेला। बीजेपी ने हमेशा से चुनावों में कानून-व्यवस्था और मुख्तार अंसारी से जुड़े मामलों को बड़ा मुद्दा बनाया है।

कड़वाहट को कम करने का प्रयास?

ऐसे में मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी के बीच हुई यह मुलाकात गाजीपुर जिले के सियासी परिदृश्य में एक बहस का विषय बन गई है। मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी के बीच की यह मुलाकात कई सवालों को जन्म देती है। क्या यह दोनों नेताओं के बीच की कड़वाहट को कम करने का प्रयास है, या फिर यह एक राजनीतिक खेल है?

 

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