दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद तब बिहार में भी छात्र आंदोलन फिर से तेज हो गया था। इसी बात को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद सुधाकर सिंह पटना में एक दिन के धरने पर बैठे थे। उन्होंने सरकार पर पुलिस के जरिए ज्यादती करने का आरोप लगाया और कहा कि छात्रों और विपक्षी नेताओं को बिना किसी वजह के परेशान किया जा रहा है।
धरने के दौरान मीडिया से बात करते हुए सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री के भरोसे के बाद भी बिहार में छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों पर कार्रवाई बंद नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ नए-नए केस दर्ज किए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं को भी जेल भेजा जा रहा है। तेज प्रताप यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया और कई लोगों को पकड़ा गया है।
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छात्रों पर मुकदमे
आरजेडी सांसद ने मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
को चेतावनी दी है कि अगर सरकार का रवैया नहीं सुधरा तो बिहार में एक और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जहानाबाद, गया, कटिहार, दरभंगा, छपरा और सिवान जैसे कई जिलों में पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया। इस सबकी जांच के लिए सरकार ने कोई कमेटी नहीं बनाई। गलत काम करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय उलटा छात्रों को ही फंसाया जा रहा है।
सरकारी संपत्ति के नुकसान और पुलिस पर हमलों के बारे में उन्होंने कहा कि वह किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए कुछ बाहरी लोग और संघ से जुड़े लोग प्रदर्शन में घुस आए थे जिन्होंने हिंसा फैलाई ताकि छात्र आंदोलन को बदनाम किया जा सके।
रील बनाने से कोई नेता नहीं बनता
प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
द्वारा मंत्रियों को इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहने की सलाह पर सुधाकर सिंह ने कहा कि छात्रों ने सरकार और मंत्रियों से अपनी नाराजगी दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर रील और मीम बनाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इंस्टाग्राम चलाना ज्यादा अच्छे से नहीं आता लेकिन वह 'रील बनाने से नेता नहीं बने हैं।' वह जनता की परेशानियों को सड़क से लेकर संसद और विधानसभा तक उठाते रहेंगे।
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आपको बता दें कि बिहार में नीट पेपर लीक और दूसरी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर पिछले कुछ दिनों में बड़ा छात्र आंदोलन हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पटना के गांधी मैदान, डाकबंगला और सिवान समेत कई जिलों में पुलिस और छात्रों के बीच भिड़ंत हुई थी। इस दौरान कई छात्रों और विपक्षी नेताओं को पकड़ा गया था और कुछ मामलों में मुकदमे भी दर्ज हुए थे। आरजेडी और दूसरे विरोधी दल इसे सरकार की तानाशाही बता रहे हैं जबकि सरकार का कहना है कि शांति से प्रदर्शन करने की सबको छूट है लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।