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यूपी सरकार ने प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला किया? BJP का प्लान समझिए

साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी एक साल पहले ही तैयारियों में जुट गई है। योगी सरकार के इस फैसले को लोग, विधानसभा चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं।

Uttar Pradesh Deputy Chief Minister with Brajesh Pathak with Pradhan

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रधानों के साथ। Photo Credit: BrajeshPathak/X

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उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक बना दिया है। इस फैसले का राजनीतिक असर तुरंत दिखने लगा है। ग्राम प्रधान और ब्लॉक प्रमुख संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। संगठनों ने कहा है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पूरा सहयोग देंगे।

ग्राम प्रधानों से जुड़े कई संगठनों ने कहा है कि इस फैसले का सकारात्मक संदेश गांवों तक पहुंच गया है। ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि संगठन की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो गई है। प्रधान अब प्रशासक के रूप में पूरी मेहनत से काम करेंगे और सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाएंगे।

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क्या कह रहे हैं प्रशासक?

डॉ. अखिलेश, राष्ट्रीय पंचायतीराम ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसे क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि संगठन आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार को रिटर्न गिफ्ट  देगा। धीरेंद्र प्रताप सिंह सेनानी, ब्लॉक प्रमुख संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार ब्लॉक प्रमुखों को भी प्रधानों की तरह प्रशासक बना देगी।

इस फैसले की इनसाइड स्टोरी क्या है?

इस फैसले से भारतीय जनता पार्टी को ग्रामीण क्षेत्रों में अपना जनाधार मजबूत करने और विकास योजनाओं को लगातार चलाने में मदद मिलेगी। ग्राम प्रधान गांवों में पार्टी के मुख्य स्तंभ माने जाते हैं। उन्हें प्रशासक बनाए जाने से उनका राजनीतिक प्रभाव बना रहेगा और चुनाव के समय बीजेपी को ग्रामीण वोट बैंक का सीधा लाभ मिलेगा।

 

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विकास कार्य नहीं रुकेंगे

अगर अधिकारियों को प्रशासक बनाया जाता तो काम की रफ्तार धीमी पड़ सकती थी। प्रधानों को प्रशासक बनाने से गांवों में निर्माण और कल्याणकारी योजनाएं लगातार चलती रहेंगी। इससे सरकार की छवि जनता के बीच सकारात्मक बनी रहेगी। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण प्रशासन पहले से व्यस्त है, ऐसे में प्रधानों के प्रशासक बनने से गांव स्तर पर काम आसानी से चलेंगे।

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क्षेत्र और जिला पंचायत अध्यक्षों पर भी नजर

प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद अब क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों और जिला पंचायत अध्यक्षों की नजरें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। क्षेत्र पंचायत का कार्यकाल 19 जुलाई को और जिला पंचायत का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। सरकार इस मामले में जुलाई में फैसला ले सकती है। ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को भी प्रशासक बनाए जाने की उम्मीद बढ़ गई है। यह फैसला गांवों में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है।


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