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3 साल की हिंसा, मैतेई, कुकी, नगा में अनबन, अब कैसी है मणिपुर की सियासी तस्वीर?

मणिपुर में अगले साल विधासनभा चुनाव होने वाले हैं। 3 साल से हिंसा और आगजनी झेल रहे राज्य में अब सियासी पार्टियों का हाल क्या है, आइए जानते हैं।

BJP Politics

PM नरेंद्र मोदी, नितिन नवीन मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT

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मणिपुर में मैतेई, कुकी, नगा और जो समूह के टकराव ने राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है। मणिपुर के ज्यादातर जिले हिंसा की चपेट में है, जनजातिय समूह आपसी हिंसा और झड़प से जूझ रहे हैं। पहले यह लड़ाई सिर्फ मैतेई बनाम कुकी की थी, अब जो, नागा और कई दूसरे स्थानीय समुदाय टकरा रहे हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद इस कलह को शांत करने की कवायद में हैं लेकिन हालात संभल नहीं रही है।

शनिवार को सीएम चुराचांदपुर जिले पहुंचे। उन्होंने बीजेपी विधायक वुंगजागिन वाल्टे के अंतिम संस्कार में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। यह 3 मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद किसी मुख्यमंत्री की इस कूकी बहुल जिले में पहली यात्रा है। वह मैतेई समुदाय से आते हैं। मैतेई और कुकी समुदाय के बीच 3 साल से ऐसा तनाव है कि लोग एक-दूसरे के इलाके में बने हुए अपने घर छोड़कर शरणार्थी शिविरों में चले गए हैं। 

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बीजेपी सरकार क्या कोशिश कर रही है?

सीएम युमचंद का यह दौरा चर्चा में इसलिए है कि जिस विधायक के अंतिम संस्कार में वह गए थे, वह भीड़ के हमले के शिकार हो गए थे। विधायक वुंगजागिन वाल्टे मई 2023 में इम्फाल के नागामापाल में भीड़ के हमले का शिकार हुए थे। हमला तब हुआ था जब वह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से मिलकर लौट रहे थे। इस हमले में गंभीर रूप से घायल वाल्टे का इलाज गुरुग्राम के अस्पताल में चल रहा था। 20 फरवरी को उन्होंने दम तोड़ दिया लेकिन उनकी लाश परिवार ने महीनों तक मोर्चरी में ही रखी।

वुंगजागिन के घरवालों ने केंद्र सरकार से जोमी जनजाति के लिए अलग जिले बनाने और मामले की नेशनल इन्वेस्टिगेशन टीम से जांच की मांग की थी। पत्नी की तबीयत खराब होने के कारण परिवार ने अंत में शव का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। सियासी जानकारों का कहना है कि यह दौरा, चुनाव से पहले की तैयारी है, जिसमें एक बार फिर मैतेई और कुकी को करीब लाना अहम एजेंडे का हिस्सा है। 

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BJP किस कवायद में जुटी है?

मणिपुर में बीजेपी अपना जनाधार खो रही है। वाई सुरचंद्र सिंह, एल राधाकिशोर सिंह और उत्तमकुमार निंगथौजम जैसे नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। कई कुकी विधायक बीजेपी के नाराज हैं। ज्यादातर नेताओं को बीजेपी की नीतियों से एतराज है। 3 साल से हिंसा नहीं रुक रही है। आए दिन मैतेई,कुकी और नगा समुदाय के लोग आपस में उलझ रहे हैं। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2024 में तगड़ा झटका झेला है। मैतेई, कुकी और दूसरे जनजातीय समूह भी बीजेपी से नाराज नजर आ रहे हैं। केंद्र से लेकर राज्य तक में बीजेपी की सरकार है, ऐसे में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनती यह है कि कैसे जनता में अपना पक्ष रखा जाए। 

क्यों बीजेपी सबके निशाने पर है?

मई 2023 से मणिपुर में चल रहे जातीय हिंसा और अशांति को की वजह से बीजेपी सबके निशाने पर है। बीजेपी के प्रति लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ी है। मणिपुर में जारी हिंसा न तो बीरेन सिंह रोक सके, न राष्ट्रपति शासन के दौरान थमा, न ही नए मुख्यमंत्री युमचंद के शासनकाल में।

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कांग्रेस क्या कर रही है?

मणिपुर में कांग्रेस स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों की नियुक्ति में जुटी है। कांग्रेस ने जिला परिषद और ब्लॉक स्तर पर कई नियुक्तियां हैं। 3 साल की हिंसा और बीजेपी के खिलाफ बने माहौल की वजह से कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार बीजेपी के पक्ष में आंकड़े हैं। 

फरवरी 2026 में ही कांग्रेस चुनावी मोड में आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह को मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमिटी (MPCC) का अध्यक्ष बनाया गया था, तब से वह लगातार सक्रिय है। मणिपुर में कांग्रेस के पास 5 विधानसभा सीटें हैं। राज्य की दोनों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को 2024 के चुनाव में जीत मिली है। बीजेपी बुरी तरह घिरी है। 

राज्य की जातीय अशांति-हिंसा के मुद्दे पर BJP सरकार की आलोचना की कांग्रेस की मुख्य रणनीति है। इबोबी सिंह के नेतृत्व में इंडो-म्यांमार बॉर्डर गांवों का दौरा किया जा रहा है। कई दौर की बैठकें हो रही हैं। मणिपुर का चुनाव, बीजेपी के लिए इस बार आसान नहीं होने वाला है। 

नागा पीपुल फ्रंट की तैयारी क्या है?

सेनापति और उखरुल जैसे इलाकों में नगा समुदाय के लोग सरकार से नाराज हैं। नागा पीपुल फ्रंट, अपना जनाधार बचाने की कोशिश कर रहा है। अभी पार्टी के पास 5 विधायक हैं। सेनापति और उखरुल जैसे इलाकों में पार्टी का दबदबा रहा है। एक बार फिर NPP अपने कोर वोट बैंक को साधने की कवायद में है। अब मणिपुर में ध्रुवीकरण इस हद तक बढ़ गया है कि ये पार्टियां, अपने प्रभुत्व वाले क्षेत्रों से अलग जाने की कोशिश भी नहीं कर रही हैं। NPP नेता अवांगबो न्यूमाई अभी बीजेपी की पिच पर ही खेल रहे हैं। वह कांग्रेस को कोस रहे हैं। 

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नेशनल पीपुल्स पार्टी की तैयारी क्या है?

नेशनल पीपुल्स पार्टी बीजेपी गठबंधन का हिस्सा रही है, अब नाराज है। पार्टी के पास अभी 6 विधायक हैं और वह 2027 में ज्यादा बड़ी तैयारी के साथ उतरना चाहती है। NPP के मणिपुर प्रमुख डॉ. लोरहो एस फोजे एनडीए के साथ जाना भी चाह रहे हैं लेकिन अभी मणिपुर की सियासत में अनिश्चितता ही है। 

मणिपुर का हाल कैसा है?

मणिपुर में मैईती और कूकी-जो  समुदायों के बीच हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक 260 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। 59 हजार से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। रह-रहकर हिंसा की खबरें सामने आती हैं। कुकी और नगा समुदायों के बीच भी इस दौर में हिंसक झड़पें हुईं है। राज्य की ज्यादातर जनजातीय आबादी, अपने लिए अलग सूबे की मांग कर रही है। साल 2027 का चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और दूसरे राजनीतिक दलों की कवायद है कि किसी भी तरह से राज्य में स्थाई शांति आए।


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