चुनाव आयोग, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (
SIR
) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लगातार सड़कों पर जोर पकड़ती जा रही है। इन तीनों मांगों को लेकर सोमवार को कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सेंट्रल दिल्ली के बाराखंभा रोड पर अरसे बाद शक्ति प्रदर्शन दिखाया। इस प्रदर्शन में विपक्ष की अधिकतर पार्टियां शामिल हैं, मगर इसमें आम आदमी पार्टी (AAP) और
कॉकरोच जनता पार्टी
ने दूसरी बनाकर रखी है।
बाराखंबा रोड पर कांग्रेस और उससे जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं की संख्या दस से पंद्रह हजार के बीच जुटी। इसके अलावा भारी संख्या में वामदलों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद रहे। तमाम बड़े नेता
राहुल गांधी
और
प्रियंका गांधी
के साथ मार्च करते हुए दिखाई दिए।
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AAP ने बनाई दूरी
यह बड़ा प्रदर्शन दिल्ली में हो रहा है लेकिन इससे आम आदमी पार्टी ने दूरी बनाई है। जबकि 10 अक्टूबर को AAP और उसके नेता
अरविंद केजरीवाल
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन में शामिल रहे। पुलिस ने केजरीवाल को हिरासत में लिया था। इसमें दिलचस्प बात यह है कि 10 अक्टूबर वाले प्रदर्शन में कांग्रेस नहीं शामिल हुई थी।
कांग्रेस ने AAP से क्यों बनाई दूरी?
दरअसल, कांग्रेस दबी ज़ुबान में मानती है कि एक सही मुद्दे की आड़ में आम आदमी पार्टी और बीजेपी कॉकरोच जनता पार्टी को खड़ी कर रही है। यह कवायद भविष्य के चुनावों में कांग्रेस के वोटरों में सेंध लगाने के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस बारे में अभी कांग्रेस नेता अंदरूनी तौर पर बातचीत जरूर करते हैं लेकिन सार्वजनिक तौर पर अभी कोई नहीं बोल रहा।
वहीं, आम आदमी पार्टी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के तमाम बड़े नेता 10 अक्टूबर में सड़कों पर आने के बाद खामोश हैं। मगर उसके नेता कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी वीडियो और फोटो पर जरूरत पोस्ट कर रहे हैं और उन पर लिख-बोल रहे हैं।
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कांग्रेस का क्या प्लान?
CJP नेतृत्व को स्वीकारने वाली आम आदमी पार्टी और नकारने वाली कांग्रेस के बीच में एक बुनियादी अंतर ये है कि आम आदमी पार्टी को लगता है बदलाव सिविल सोसाइटी को आगे रखकर आएगा जबकि कांग्रेस अब वहां पहुंच चुकी है जहां राहुल गांधी को पूरे क्रेडिट से कम कोई शर्त स्वीकार नहीं है। INDIA ब्लॉक की आखिरी मीटिंग में राहुल ने जब खुद को नीलकंठ कहा था तभी अपनी चाहत को उन्होंने खुलकर जाहिर कर दिया था।