आरोप लगाए फिर U-टर्न, पंजाब में सरूपों के बहाने क्यों छिड़ी राजनीति?
पंजाब में गायब सरूपों को लेकर शुरू हुई राजनीति में अब भगवंत मान और AAP ही घिरने लगे हैं। शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने अब भगवंत मान का इस्तीफा मांगा है।

विपक्ष के निशाने पर आए भगवंत मान, Photo Credit: Khabargaon
पंजाब में विधानसभा के चुनाव अगले साल होने हैं लेकिन सियासी माहौल अभी से गर्म होने लगा है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) पंथक राजनीति के सहारे चलने वाली शिरोमणि अकाली दल पर हमलावर है। ऐसा ही एक हमला अब खुद AAP और मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए गले की फांस बन गया है। दिसंबर 2025 में भगवंत मान ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों (स्वरूपों) के गायब होने के आरोप लगाए थे। अब उनकी ही सरकार ने इस पर यू-टर्न ले लिया है और इसे गलतफहमी बताया है। इसी को लेकर अब विपक्ष AAP और भगवंत मान पर हमलावर हो गया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने अब भगवंत मान का इस्तीफा मांगा है।
माघी मेले में सीएम भगवंत मान ने दावा किया था कि 169 सरूप नाभ कंवल राजा साहिब डेरे से बरामद किए गए हैं। उनके बयान से ऐसा लग रहा था, जैसे ये सरूप वहां अवैध रूप से रखे गए हों। अब पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है, 'नाभ कंवल राजा साहिब डेरे के पास मौजूद 169 सरूपों का रिकॉर्ड पूरी तरह सही है, न ही कोई गलती पाई गई है और न ही कोई मुकदमा दर्ज किया गया है।' सीएम मान के दावों पर उन्होंने कहा कि यह गलतफहमी है। यानी 328 सरूपों की जांच आगे भी जारी रहेगी।
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घिर गई AAP?
इसी मामले पर AAP और भगवंत मान सरकार को घेरते हुए कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने X पर लिखा है, 'अब जब वित्त मंत्री हरपाल चीमा और आम आदमी पार्टी ने गायब हुए सरूपों के बारे में लगाए गए अपने आरोपों पर यू टर्न ले लिया है तो मैं भगवंत मान से अपील करता हूं कि सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें क्योंकि उन्होंने एक संवेदनशील मुद्दे पर सिख समुदाय को गुमराह किया।'
https://twitter.com/SukhpalKhaira/status/2013264951448948868
अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने पूछा है, 'अगर रिकॉर्ड सही थे तो सीएम ने माघी मेले जैसे पवित्र मंच से झूठे दावे क्यों किए? सीएम ने बिना तथ्यों की जांच किए संगत की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्हें अपनी गलती माननी चाहिए और तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।'
अब चुनाव से ठीक पहले ऐसी गलती AAP की मुश्किलें बढ़ा रही है। रोचक बात है कि जिस क्षेत्र से 169 सरूपों की बरामदगी का दावा भगवंत मान ने किया था, वहां के विधायक सुखविंदर सिंह सुखी ने एक दिन पहले ही कैबिनेट रैंक के बराबर के दर्ज वाले पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। जब हरपाल चीमा ने इस मामले को गलतफहमी बताया, तब भी सुखविंदर सुखी AAP नेताओं के साथ मौजूद नहीं थे। कहा जा रहा है कि सुखविंदर सुखी इसी दावे से नाराज थे जिसमें कहा गया कि 169 सरूप उनके इलाके के डेरे से बरामद किए गए हैं।
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कहां से शुरू हुआ विवाद?
दिसंबर 2025 की 29 तारीख को भगवंत मान ने कुछ आरोप लगाए जिससे खलबली मच गई। पंजाब सरकार ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का आदेश दिया। इस पर SGPC ने इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बताया। भगवंत मान ने SGPC अध्यक्ष को शिरोमणि अकाली दल का कठपुतली बताया दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि यह धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं है क्योंकि सरकार के पास कानूनी अधिकारी है कि वह गायब सरूपों के बारे में जांच करे।
भगवंत मान ने यह भी कहा था कि वह दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराएंगे। सीएम मान ने आरोप लगाए कि श्री अकाल तख्त साहिब को ढाल बनाया जा रहा है। इसी के बाद SIT ने SGPC के कई सदस्यों से पूछताछ की। श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से एक आदेश जारी किया गया था कि इस जांच में SGPC की ओर से पूरा सहयोग किया जाएगा।

169 सरूपों का क्या मामला है?
15 जनवरी को भगवंत मान को श्री अकाल तख्त के समन पर पेश होना था। इससे ठीक एक दिन पहले यानी 14 जनवरी को सीएम भगवंत मान ने एक खुलासा किया। उन्होंने कहा, 'इस मामले की जांच कर रही SIT ने नवांशहर के बंगा में स्थित नाभ कंवल राजा साहिब डेरे से 169 रूप बरामद किए गए हैं। इनमें से 139 सरूपों का कोई रिकॉर्ड नहीं है, सिर्फ 30 सरूप ही रिकॉर्ड पर हैं।'
क्या है सरूपों के गायब होने का मामला?
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पास एक प्रेस है जिसे गोल्डन प्रेस कहा जाता है। श्री रामसर साहिब में स्थापित इस प्रेस में गुरु ग्रंथ साहिब की छपाई होती है और SGPC के बजट में गोल्डन प्रेस के लिए अलग से बजट रखा जाता है। छपाई और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के मैनेजमेंट से जुड़ा कामकाज SGPC का पब्लिकेशन डिपार्टमेंट देखता है। यही डिपार्टमेंट इसका भी हिसाब रखा जाता है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की कितनी प्रतियां छपीं, कितनी बांटी गईं और कितनी रखी गई हैं। हर कॉपी के लिए रसीद कटती है। इन्हीं कॉपियों को पंजाबी में सरूप यानी स्वरूप कहते हैं।
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मामला इसी रिकॉर्ड में गड़बड़ी का है। 2013 से 2016 के रिकॉर्ड में देखा गया तो पता चला कि 328 सरूप ऐसे हैं जिनका कुछ रिकॉर्ड ही नहीं मिला। इन्हें ही गायब माना गया। एक बार RTI लगाई गई तब SGPC ने बताया कि कुल 267 सरूप गायब हैं। तेलंगाना हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज ईश्वर सिंह की कमेटी से जांच कराई गई तब भी यही निकला कि 328 सरूप गायब हैं।
आरोप लगे कि प्रकाशन विभाग ने छपाई के दौरान खराब हुए पन्नों को जोड़कर गैरकानूनी तरीके से बिना बिल के ही एक बार 61 और एक बार 125 सरूप और तैयार कर लिए। इसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसी तरह की कई और गड़बड़ियां भी पाई गईं। 2016 के मई महीने में रामसर साहिब गुरुद्वारे में आग लगी तो SGPC के अधिकारियों ने बताया कि कुछ सरूप भी जल गए। बाकायदा इन सरूपों का अंतिम संस्कार हुए। जले हुए सरूपों की संख्या को लेकर भी कई तरह के सवाल उठते हैं।
फिर रामसर साहिब के सुपरवाइजर रिटायर हुए तो SGPC ने उन पर कुछ सरूपों की रिकवरी डाल दी। यहीं से यह बात सार्वजनिक मंचों पर आ गई। आगे चलकर SGPC ने कई कर्मचारियों और अधिकारियों को निलंबित किया और कुछ की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं।
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