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देवरियाताल: वह झील जिसके पास भगवान शिव ने की थी घोर तपस्या

देवरियाताल भगवान शिव से संबंधित प्राचीन तीर्थस्थलों में से एक हैं। इस स्थान को भगवान शिव की तपोस्थली भी कहा जाता है। जानते हैं इस स्थान से जुड़ी मान्यताएं।

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देवरियाताल, उत्तराखंड(Photo Credit: Wikimedia Commons)

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भगवान शिव समर्पित तीर्थस्थलों में उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में देवरियाताल तीर्थस्थल है। यह झील अपनी पवित्रता और सुंदरता के लिए जानी जाती है। इस स्थान से जुड़े कई मान्यताएं प्रचलित हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र झील का संबंध भगवान शिव से है, जिन्होंने यहां तपस्या की थी। आइए जानते हैं, इस स्थान से जुड़ी पौराणिक कथा और मान्यताएं।

देवरियाताल की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, महादेव, सदैव ध्यान और तपस्या में लीन रहते थे, उन्होंने एकांत स्थान की खोज की जहां वे अपनी साधना कर सकें। अंत में उन्हें हिमालय की गोद में यह पवित्र स्थान मिला, जहां उन्होंने वर्षों तक घोर तपस्या की।

 

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इस दौरान, भगवान शिव ने इस झील के पास बैठकर गहन ध्यान लगाया। उनकी ऊर्जा और तप के कारण इस स्थान की पवित्रता और दिव्यता बढ़ती चली गई। शिव की उपासना से यहां की प्रकृति भी इतनी निर्मल और शांत हो गई कि यह झील साक्षात देवताओं के स्नान स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गई। मान्यता है कि इस झील का पानी स्वयं देवताओं द्वारा पवित्र किया गया था, इसलिए इसे ‘देवरियाताल’ कहा जाने लगा, जिसका अर्थ है ‘देवताओं की झील’।

 

एक अन्य कथा के अनुसार, जब महाभारत के समय पांडव अज्ञातवास के दौरान हिमालय में विचरण कर रहे थे, तब वे भी इस झील के पास आए थे। कहा जाता है कि इस झील का पानी इतना पवित्र और चमत्कारी था कि इसका सेवन करने से आध्यात्मिक शुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती थी।

देवरियाताल का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

इस झील से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां आकर ध्यान और साधना करने से मन शांत होता है और आत्मिक उन्नति होती है। साथ ही हर साल शिवरात्रि और अन्य पवित्र अवसरों पर श्रद्धालु यहां आकर भगवान शिव का पूजन करते हैं। झील के किनारे बैठे साधु-संत और योगी ध्यान करते हैं। सुबह और शाम के समय जब सूरज की किरणें इस झील के पानी पर पड़ती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरी झील सोने की तरह चमक रही हो।

 

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देवरियाताल पर पूजा का महत्व

मान्यता यह भी है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ इस झील के जल से आचमन करता है, उन्हें विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। कहा यह भी जाता है कि यहां आकर ध्यान और जप करने से मन की अशांति दूर होती है और व्यक्ति को आंतरिक शांति का अनुभव होता है। देवरियाताल को धार्मिक स्थल मानते हुए यहां सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि यह झील भगवान शिव की तपस्या स्थली मानी जाती है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। Khabargaon इसकी पुष्टि नहीं करता।


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