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'51 साल का सूखा खत्म करेंगे...' हॉकी वर्ल्ड कप से पहले 'सरपंच साहब' की हुंकार

भारतीय मेंस हॉकी टीम ने 51 साल पहले वर्ल्ड कप खिताब जीता था। इसके बाद से टीम इंडिया सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच पाई है। कप्तान हरमनप्रीत सिंह का कहना है कि इस बार सारी कमी पूरी कर देंगे।

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भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह, Photo Credit: Hockey India/X

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हॉकी वर्ल्ड कप का आगाज 15 अगस्त से होने जा रहा है। भारतीय मेंस टीम इस दिन वेल्स के खिलाफ मैदान में उतरेगी। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली टीम की निगाहें वर्ल्ड कप में 51 साल के सूखे को खत्म करने के अभियान का शानदार आगाज करके देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस का तोहफा देने पर होंगी। 8 बार के ओलंपिक चैंपियन भारत ने इकलौता वर्ल्ड कप 1975 में कुआलालम्पुर में पाकिस्तान को हराकर जीता था। 

 

इससे पहले 1971 में ब्रॉन्ज और 1973 में सिल्वर अपने नाम किया था लेकिन पिछले 51 साल में पोडियम पर जगह बनाने में भारतीय टीम नाकाम रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय टीम के पास इस बार सबसे सुनहरा मौका है। ग्रुप स्टेज में भारत (8वीं रैंकिंग) के सामने जिन टीमों की चुनौती है, उनमें सिर्फ इंग्लैंड (तीसरी रैंकिंग) ही उससे आगे है, जबकि पाकिस्तान 12वें और वेल्स 15वें स्थान पर है। 'सरपंच साहब' यानी हरमनप्रीत ने भी टूर्नामेंट से पहले साफ कर दिया है कि टीम मेडल जीतने के जज्ब के साथ उतरेगी।

 

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'ओलंपिक की तरह वर्ल्ड कप में भी खत्म होगा सूखा'

हरमनप्रीत ने कहा कि टीम उसी मानसिकता और तैयारी के साथ उतरेगी, जो पिछले दो ओलंपिक में थी। उन्होंने कहा, 'हमें यकीन है कि जिस तरह से टोक्यो में 41 साल बाद ओलंपिक मेडल जीता था, इस बार वर्ल्ड कप में 51 साल की कमी पूरी कर देंगे। हम उसी जज्बे, उसी सोच और तैयारी के साथ यहां आए हैं। वर्ल्ड कप में मेडल जीतने का दबाव नहीं है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी है।'  

 

उन्होंने कहा, 'हमने टॉप टीमों के खिलाफ लगातार खेला है और युवा खिलाड़ी भी आत्मविश्वास से ओतप्रोत हैं। अच्छी बात यह भी है कि पिछले कुछ टूर्नामेंट्स में हमने काफी फील्ड गोल किए है।'

 

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8 भारतीय मेंस खिलाड़ियों का वर्ल्ड कप डेब्यू  

भारतीय टीम ने राजगीर में एशिया कप जीता था लेकिन प्रो लीग के पिछले सीजन में वह 9 टीमों में सिर्फ पाकिस्तान के ऊपर आठवें स्थान पर रही थी। हालांकि वर्ल्ड कप से ठीक पहले टीम ने FIH प्रो-लीग के यूरोप लेग में मौजूदा वर्ल्ड और यूरोपीय चैंपियन जर्मनी को हराया और ओलंपिक चैंपियन नीदरलैंड्स को भी मात दी थी। 

 

कोच क्रेग फुल्टन ने प्रो-लीग 2025-26 में 33 खिलाड़ियों को आजमाने के बाद वर्ल्ड कप टीम चुनी, जिसमें भारत के लिए सबसे ज्यादा 417 इंटरनेशनल मैच खेल चुके दिग्गज मिडफील्डर मनप्रीत सिंह भी हैं, तो यशदीप सिवाच, मोहित एचएस, शिलानंद लाकड़ा समेत 8 खिलाड़ियों का यह पहला वर्ल्ड कप होगा।

टीम हर हालात का सामना करने के लिए तैयार - ऑप्टन

वर्ल्ड कप से पहले स्विटजरलैंड में बूट कैंप में विषम परिस्थितियों का सामना करके मानसिक दृढता के साथ आई भारतीय टीम के मानसिक कोच पैडी ऑप्टन का मानना है कि मेडल के बारे में अभी से सोचने की बजाय मैच दर मैच रणनीति बनाई जाएगी। वर्ल्ड कप 2011 जीतने वाली क्रिकेट टीम और पेरिस ओलंपिक 2024 की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट भारतीय हॉकी टीम के साथ काम कर चुके ऑप्टन ने कहा, 'हमने इस टीम को हर हालात का सामना करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया है। मेडल तक के सफर की चुनौतियों का सामना करने में यह टीम सक्षम है और मुझे यकीन है कि ओलंपिक के बाद वर्ल्ड कप का भी पदक जीत सकती है।'

 

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श्रीजेश के संन्यास के बाद पहला बड़ा टूर्नामेंट

दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश के संन्यास के बाद यह पहला बड़ा टूर्नामेंट है और युवा गोलकीपर्स मोहित एचएस और सूरज करकेरा के सामने चुनौती आसान नहीं होगी। वहीं डिफेंस में अमित रोहिदास और कप्तान हरमनप्रीत सिंह का अनुभव काम आएगा, जिनकी ड्रैग फ्लिक पर भी भारत के गोलों का दारोमदार रहेगा। मनप्रीत और हार्दिक सिंह जैसे भरोसेमंद खिलाड़ी मिडफील्ड की कमान संभालने के लिए हैं, तो फॉरवर्ड पंक्ति में अभिषेक और मनदीप पर नजरे रहेंगी, जो 300 इंटरनेशनल मैचों से सिर्फ 12 मैच दूर हैं।

एशियन गेम्स से पहले अच्छे प्रदर्शन की जरूरत

अपनी मेजबानी में हुए पिछले दो वर्ल्ड कप में छठे और आठवें स्थान पर रही भारतीय टीम के लिए इस वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन टॉनिक का काम करेगा, जिसकी जरूरत उसे अगले महीने एशियाई खेलों में पड़ेगी, जहां गोल्ड मेडल जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना उसका लक्ष्य है। मैदान पर अच्छा प्रदर्शन टूर्नामेंट से ठीक पहले मैदान के बाहर हुए कई विवादों को हाशिए पर रखने के लिए भी जरूरी है।


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