इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि 'निकाह हलाला' और 'तीन तलाक' जैसी प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की इजाजत नहीं दी जा सकती। साथ ही कहा कि पर्सनल लॉ की आड़ में अपराधों को बचाया नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रथाएं समाज का काला पन्ना हैं, जो संवैधानिक मूल्यों, समानता और मानवीय गरिमा के खिलाफ हैं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोरने वाले हैं। जस्टिस जेजे मुनीर और तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने एक महिला के पूर्व पति, चाचा और एक मौलवी सहित अन्य दूसरे आरोपियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए ये बातें कहीं।
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गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग
इन सभी याचिकाओं में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी। यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का है। जहां एक महिला ने कम उम्र में शादी, तीन तलाक, निकाह हलाला और दूसरी शादी की आड़ में बार-बार यौन शोषण का आरोप लगाया था।
'प्रथाएं समाज का एक काला पन्ना हैं'
आरोपियों की दलीलों को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपों में बहुत गंभीर बातें सामने आई हैं। पहली नजर में ये कानून के खिलाफ लगते हैं। बेंच ने कहा कि इस मामले में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई प्रथाएं समाज का एक काला पन्ना हैं और संवैधानिक मूल्यों, बराबरी और इंसानी इज्जत के खिलाफ हैं।
कोर्ट ने कहा, 'ये काम न केवल कानून की आड़ में किए गए अपराध हैं, बल्कि समाज की सोच को भी हिला देते हैं। पर्सनल लॉ को क्रिमिनल कामों को बचाने के लिए ढाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।'
नौ लोगों पर निकाह हलाला करने का आरोप
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें नौ लोगों पर एक महिला का निकाह हलाला और उससे जुड़े तरीकों का गलत इस्तेमाल करके यौन शोषण करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। आरोपियों ने केस के पेंडिंग रहने तक गिरफ्तारी से बचने की भी मांग की थी।
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हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले में कोई दखल नहीं दिया क्योंकि उसे कोई आधार नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से पहली नजर में लगता है कि यह एक नाबालिग के साथ पहले से सोची-समझी गैंग रेप का मामला है और इसकी पूरी जांच जरूरी है।
निकाह हलाला क्या है?
निकाह हलाला के तहत एक तलाकशुदा महिला को अपने पुराने पति से दोबारा शादी करने से पहले दूसरे आदमी से शादी करके अलग होना जरूरी होता है। तीन तलाक वह रिवाज है जिसमें एक मुस्लिम शख्स एक बार में तीन बार तलाक बोलकर अपनी पत्नी को तलाक दे देता है। इस रिवाज को 2019 में भारत में गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया था।