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रेल हादसे रोकने के लिए रेलवे का बड़ा कदम, लोको पायलट के लिए प्रैक्टिस अनिवार्य

अंबाला से ट्रेन लेकर रवाना होने से पहले लोको पायलट को सिम्युलेटर पर अभ्यास करना होगा, चाहे वह किसी भी मंडल से हो। इससे सिग्नल पहचानने, समय पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता बेहतर होने के साथ रेल हादसों में भी कमी आएगी।

loco pilots will practice on simulators at Railway Stations रेल हादसा

अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर सिम्युलेटर पर अभ्यास करते लोको पायलट। (Photo Credit - खबरगांव)

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अंबाला से ट्रेन लेकर रवाना होने से पहले अब लोको पायलट को सिम्युलेटर पर अभ्यास करना होगा। चाहे वह किसी भी डिवीजन से हो। लोको पायलट श्वास परीक्षण के बाद सिम्युलेटर में अपनी पहचान डालकर करीब दो मिनट तक अभ्यास करेगा। विवरण पूरा होते ही अपने आप दर्ज हो जाएगा। उसके बाद ही लोको पायलट ट्रेन लेकर रवाना हो सकेगा।

 

अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की क्रू लॉबी में ये व्यवस्था शुरू हो चुकी है। हालांकि, इससे पहले भी लोको पायलट अभ्यास करते थे, लेकिन पहले ये मैन्युअल होता था और हर बार अभ्यास अनिवार्य भी नहीं था। अब सिम्युलेटर में ये अभ्यास अनिवार्य हो गया है। सभी यात्री और मालगाड़ियों के लोको पायलट के लिए ये अनिवार्य हो चुका है। सिम्युलेटर की इस प्रणाली में पर्दा गति के आकलन सहित अन्य उपकरण लगाए गए हैं।

 

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सिम्युलेटर में ये अभ्यास से ये होगा फायदा

बता दें कि सिम्युलेटर के अभ्यास से सिग्नल पहचानने, समय पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता बेहतर होगी। ब्रेक लगाने के बारे में भी बेहतर जानकारी मिलेगी, कि कब, कैसे और किस स्थिति में ब्रेक लगानी है। इससे रेल हादसों में भी कमी आएगी। नए सिम्युलेटर में वास्तविक इंजन के संचालन कक्ष जैसा अनुभव मिलेगा। इससे ट्रेन संचालन के दौरान आने वाली परस्थितियों में उनकी प्रतिक्रिया और तैयारी परखने और सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

 

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इन स्टेशनों पर पहले भी थी सुविधा, अब यहां हुए अपग्रेड

सीनियर डीसीएम यशनजीत सिंह ने बताया कि मंडल के अंबाला, बठिंडा और सहारनुपर रेलवे स्टेशनों पर ये सुविधा है। अंबाला सहारनपुर और बठिंडा में दिसंबर 2025 को सिम्युलेटर आधारित इमरजेंसी ब्रेक (आरएस वॉल्व) मॉडल उपलब्ध करवाए गए थे। वहीं धूरी, चंडीगढ़ व कालका में दिसंबर 2024 को सिम्युलेटर आधारित आरएस वॉल्व मॉडल उपलब्ध करवाए गए थे, ताकि रनिंग स्टाफ को सिग्नल कॉल-आउट एवं इमरजेंसी ब्रेक को आरएस वॉल्व का लोको पायलट सही संचालन का व्यावहारिक अभ्यास कर सके। अंबाला व सहारनपुर में इन सिम्युलेटर को अपग्रेड कर नए सिम्युलेटर लगाए गए। जिससे सिग्नल कॉल-आउट की प्रक्रिया में सुधार हो तथा आपातकालीन स्थिति में आरएस वॉल्व के संचालन के दौरान लोको पायलट की झिझक दूर की जा सके।

 

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इसलिए शुरू किए गए सिम्युलेटर

सिम्युलेटर शुरू करने का मुख्य उद्देश्य रनिंग स्टाफ में सिग्नल कॉल-आउट के प्रति सजगता एवं अनुशासन बढ़ाना तथा आपातकालीन स्थिति में लोको पायलट द्वारा इमरजेंसी ब्रेक को आरएस वॉल्व के द्वारा पर एवं सही संचालन का आत्मविश्वास विकसित करना है, जिससे घटनाओं की रोकथाम में सहायता मिल सके। अन्य प्रमुख क्रू बुकिंग लॉबी में भी उन्नत सिम्युलेटर उपलब्ध कराने पर परिचालन आवश्यकताओं एवं निधि की उपलब्धता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से विचार किया जा सकता है।

 

प्रमुख क्रू बुकिंग लॉबी में सिम्युलेटर आधारित आरएस वॉल्व की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अन्य छोटी लॉबी में आरएस वॉल्व के कार्यशील मॉडल तथा सिग्नल संचालन की मैनुअल व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है, क्रू सदस्य ड्यूटी पर साइन-इन करने से पूर्व सिग्नल कॉल-आउट एवं आरएस वॉल्व के संचालन का व्यावहारिक अभ्यास कर सकें। रनिंग स्टाफ में सुरक्षित कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु नियमित व्यावहारिक अभ्यास एवं काउंसलिंग भी की जा रही है।


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