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बिहार कैबिनेट में 24 प्रस्तावों पर लगी मुहर, 2 यूनिवर्सिटी खोलने को मिली मंजूरी

बिहार कैबिनेट ने पटना में माता सीता महिला विश्वविद्यालय और बेगूसराय में दिनकर विश्वविद्यालय खोलने को मंजूरी दी है। दोनों के लिए 15-15 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

samrat choudhary

सम्राट चौधरी, Photo Credit- Social Media

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बिहार की राजधानी पटना में राज्य का पहला माता सीता महिला विश्वविद्यालय और बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय खुलेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में दोनों विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी गई है। दोनों नए विश्वविद्यालयों की शुरुआती स्थापना और अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते के लिए 15-15 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर मुहर लगी।

 

यह फैसला कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार ने दोनों विश्वविद्यालयों को बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के तहत स्थापित करने का फैसला लिया है। शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार किया था जिसे कैबिनेट ने पास कर दिया। अब जल्द ही दोनों विश्वविद्यालयों के लिए कुलपति और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी।

 

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पटना में खुलेगा पहला महिला विश्वविद्यालय

पटना में स्थापित होने वाला माता सीता महिला विश्वविद्यालय बिहार का पहला महिला विश्वविद्यालय होगा। यह सिर्फ छात्राओं के लिए होगा। सरकार की कोशिश है कि बिहार की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर और सुरक्षित माहौल मिले। कई बार सुरक्षा और दूसरे कारणों से बेटियां बाहर नहीं जा पाती हैं। इसी को देखते हुए राजधानी में महिला विश्वविद्यालय खोलने का फैसला लिया गया है।

 

इस विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में पटना जिले में स्थित सभी अंगीभूत और संबद्ध महिला महाविद्यालय होंगे। यानी पटना जिले में जितने भी महिला कॉलेज हैं जो पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय या दूसरे विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं वे अब माता सीता महिला विश्वविद्यालय के अधीन आ जाएंगे। हालांकि पटना विश्वविद्यालय के तहत आने वाले महिला कॉलेज इसके दायरे में शामिल नहीं होंगे। पटना विश्वविद्यालय अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखेगा।

 

सरकार ने इसके लिए 15 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि मंजूर की है। यह राशि अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और कार्यालय शुरू करने पर खर्च होगी। जल्द ही इसके लिए जमीन की तलाश शुरू होगी और अस्थायी कैंपस से इसकी शुरुआत होगी। शिक्षा विभाग को जल्द से जल्द इसका एकेडमिक कैलेंडर तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

बेगूसराय में खुलेगा दिनकर विश्वविद्यालय

दूसरा बड़ा फैसला बेगूसराय के लिए है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कर्मभूमि बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी मिली है। बेगूसराय के लोगों की लंबे समय से यह मांग थी कि यहां विश्वविद्यालय खुले ताकि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दरभंगा या पटना न जाना पड़े। अब यह मांग पूरी हो गई है।

 

इस विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार बेगूसराय और खगड़िया जिले में स्थित अंगीभूत और संबद्ध महाविद्यालयों तक होगा। यानी दोनों जिलों के सभी डिग्री कॉलेज अब इसी विश्वविद्यालय से जुड़े होंगे। हालांकि इसमें कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध और अंगीभूत कॉलेज शामिल नहीं होंगे। संस्कृत कॉलेज पहले की तरह संस्कृत विश्वविद्यालय के अधीन ही रहेंगे।

 

राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती के अवसर पर यह फैसला बेगूसराय के लिए बड़ा तोहफा माना जा रहा है। दिनकर की साहित्यिक और राष्ट्रचेतना की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में यह पहल है। इस विश्वविद्यालय के लिए भी 15 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि मंजूर की गई है। जल्द ही इसके लिए भी कैंपस और भवन की प्रक्रिया शुरू होगी।

 

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सबवे का नाम बदला 

कैबिनेट बैठक में एक और अहम फैसला लिया गया। GPO गोलंबर से जंक्शन को जोड़ने वाले सबवे को नई पहचान मिली है। नवनिर्मित भूमिगत सबवे का आधिकारिक नाम आचार्य किशोर कुणाल सबवे कर दिया गया है। आचार्य किशोर कुणाल बिहार के जाने-माने शिक्षाविद, पूर्व IPS और महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव थे। उनका हाल ही में निधन हुआ था। उनके सम्मान में सरकार ने यह फैसला लिया है।

 

यह सबवे पटना जंक्शन आने वाले यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा है। GPO गोलंबर से जंक्शन तक जाने के लिए अब लोगों को सड़क पार नहीं करनी पड़ेगी। वे सीधे भूमिगत सबवे से जंक्शन पहुंच सकेंगे। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी और यात्रियों को सुविधा मिलेगी। कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर मुहर लगी। इसमें शिक्षा के अलावा सुरक्षा और विकास से जुड़े फैसले भी शामिल हैं। पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 336.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। यह राशि जिला पुलिस, रेल पुलिस, मद्यनिषेध और स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के लिए उपकरण खरीदने पर खर्च होगी।

 

इसके अलावा 50 हाईटेक ड्रोन खरीदने के लिए 24.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इन ड्रोन का उपयोग भीड़ नियंत्रण, नक्सल अभियान और आपदा प्रबंधन में होगा। सात निश्चय-3 के तहत सुपौल, मधेपुरा और सहरसा में डेयरी विकास के लिए 126.07 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इससे कोसी क्षेत्र में दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर कैबिनेट ने शिक्षा, सुरक्षा और विकास से जुड़े कई फैसलों को मंजूरी दी है। दो नए विश्वविद्यालयों के खुलने से बिहार में उच्च शिक्षा के नए विकल्प बढ़ेंगे।


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