बिहार में ग्रामीण सड़कों और गांवों से जुड़ी योजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
ने ग्रामीण कार्य विभाग की समीक्षा बैठक की। पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ग्रामीण सड़कों की नियमित मॉनिटरिंग और बेहतर रख-रखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और सभी योजनाओं को समय पर पूरा किया जाए। बैठक में विभाग के कामकाज, चल रही परियोजनाओं की प्रगति और आगे की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
समीक्षा बैठक के दौरान ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने प्रेजेंटेशन के जरिए मुख्यमंत्री को विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष), मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना, सुलभ संपर्कता योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना समेत अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया। सचिव ने बताया कि किस योजना के तहत कितने किलोमीटर सड़क का निर्माण हुआ है, कितने पुल-पुलियों का काम पूरा हो चुका है और कितने काम अभी चल रहे हैं। उन्होंने ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण और उनके रख-रखाव को लेकर विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
यह भी पढ़ें: अररिया में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 4 गिरफ्तार, 58 सिम और डिवाइस बरामद
बाढ़ से खराब सड़कों की जल्द होगी मरम्मत
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, 'ग्रामीण क्षेत्रों का विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं देना राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है और आगे भी रहेगी। गांव में सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे का मजबूत होना बहुत जरूरी है। इससे लोगों को आने-जाने में सुविधा होती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलती है।'
सीएम ने कहा कि उनकी सरकार शुरू से ही ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देते हुए काम कर रही है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण और रख-रखाव पर राज्य सरकार हर साल बड़ी राशि खर्च कर रही है। इसलिए जरूरी है कि इस राशि का सही इस्तेमाल हो और सड़कों की गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने निर्देश दिया कि गांवों में बेहतर संपर्क बना रहे इसके लिए ग्रामीण कार्य विभाग सड़कों की लगातार मॉनिटरिंग कराए। सिर्फ सड़क बना देना ही काफी नहीं है बल्कि उसके बाद उसकी देखरेख भी उतनी ही जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ से हुए नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'हाल की बाढ़ के दौरान कई जगहों पर ग्रामीण सड़कों और पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचा है। इसका जल्द से जल्द आकलन कराया जाए। खराब हुई सड़कों और पुलों की मरम्मत का काम तेजी से पूरा किया जाए ताकि लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो। ग्रामीण कार्य विभाग के तहत जो भी योजनाएं ली गई हैं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। किसी भी योजना में बेवजह देरी नहीं होनी चाहिए। अगर कहीं जमीन या तकनीकी समस्या है तो उसे आपसी तालमेल से जल्द दूर किया जाए।'
यह भी पढ़ें: बिहार में UCC पर घमासान, RJD का नीतीश कुमार को ऑफर, BJP छोड़कर साथ आने की अपील
ओवरलोडिंग रोकने के दिए निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों के चलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, 'अक्सर ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहन चलने लगते हैं जिससे सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं। ग्रामीण सड़कों को ज्यादा ट्रैफिक के दबाव से बचाना होगा।'
उन्होंने अधिकारियों से कहा, 'सड़कों के रख-रखाव पर लगातार ध्यान दिया जाए। जहां जरूरत हो वहां बोर्ड और बैरियर लगाए जाएं। साथ ही स्थानीय प्रशासन के सहयोग से ओवरलोडिंग और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने की व्यवस्था की जाए। ग्रामीण सड़कें गांव के लोगों के आने-जाने के लिए हैं इसलिए उन्हें ट्रकों और बड़े वाहनों के दबाव से बचाना विभाग की जिम्मेदारी है।'