दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगातार दूसरे दिन महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच में सामने आए कई तथ्यों और रिकॉर्ड के बीच अंतर पर सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि 14वीं मंजिल से गिरने के बाद चोटों का पैटर्न और घटनास्थल से जुड़े सबूत जांच के निष्कर्ष से कैसे मेल खाते हैं।
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हुई थी। सुनवाई में कोर्ट ने पूछा कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद खोपड़ी में फ्रैक्चर क्यों नहीं हुआ और केवल दांत टूटने की बात कैसे सामने आई। सरकारी वकील शिशिर हिरे ने जवाब में कहा कि मेडिकल रिकॉर्ड में चेहरे, खोपड़ी और पसलियों में गंभीर चोटें दर्ज हैं।
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खून के निशान और बारिश पर सवाल
कोर्ट ने घटनास्थल पर खून के निशान नहीं मिलने को लेकर भी सवाल किया। सरकारी वकील ने कहा कि मानसून की बारिश के कारण खून के निशान मिट गए होंगे। इस पर कोर्ट ने कहा कि बारिश सुबह करीब 9:40 बजे हुई थी, जबकि घटना उससे लगभग छह घंटे पहले हुई थी।
कोर्ट ने घटनास्थल पर खून के निशान नहीं मिलने को लेकर भी सवाल किया। सरकारी वकील ने कहा कि मानसून की बारिश के कारण खून के निशान मिट गए होंगे। इस पर कोर्ट ने कहा कि बारिश सुबह करीब 9:40 बजे हुई थी, जबकि घटना उससे लगभग छह घंटे पहले हुई थी। कोर्ट ने दिशा के कपड़ों को लेकर भी रिकॉर्ड में अंतर की ओर ध्यान दिलाया। कोर्ट के अनुसार, पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव पर कपड़े नहीं होने की बात दर्ज थी, जबकि अस्पताल और मुर्दाघर की तस्वीरों में वह कपड़े पहने दिखाई दे रही थीं। कोर्ट ने कहा कि इन पहलुओं में उचित संदेह की गुंजाइश है हालांकि अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा है।
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पिता ने लगाया था हत्या का आरोप
मुंबई पुलिस ने दिशा की मौत के मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया। हालांकि, दिशा के पिता सतीश सालियान ने पिछले साल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया था। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि सतीश सालियान ने 15 जनवरी 2024 को दिए बयान में दिशा की मौत को आर्थिक तनाव के कारण आत्महत्या बताया था और किसी के खिलाफ शिकायत नहीं होने की बात कही थी।
मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस जांच पर बहस
सरकारी वकील ने दिशा के साथ लॉकडाउन में रहने वाले रोहन राय के बयान का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक, राय ने हत्या की संभावना को खारिज किया था और दिशा के तनाव में होने की बात कही थी। डॉक्टर जाधव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CrPC की धारा 164 के तहत दर्ज बयान का हवाला देते हुए सरकारी वकील ने कहा कि यौन उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को ज्यादा विस्तार से आगे बढ़ाने से रोक दिया और कहा कि इस स्तर पर इतनी गहराई में जाने की जरूरत नहीं है।
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कोर्ट ने CrPC की धारा 174 के तहत हुई पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए। वहीं, आदित्य ठाकरे की ओर से वकील सुदीप पसबोला ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले पुलिस में शिकायत जैसे कानूनी विकल्प अपनाए बिना सीधे हाई कोर्ट को रुख किया है।