हरियाणा के बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी
CBI
ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के तत्कालीन सीनियर अकाउंट्स ऑफिस प्रवीण कुमार को गिरफ्तार किया है। यह मामला भी चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़ा है।
सीबीआई को जांच में पता चला है कि प्रवीण कुमार ने बैंक में चुपके से अकाउंट खोला था। इसका विभाग में कोई रिकॉर्ड और मंजूरी नहीं थी। इस अकाउंट का इस्तेमाल बाद में धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन में किया गया। चेक/डेबिट नोट का इस्तेमाल करके बोर्ड के फंड का गलत इस्तेमाल किया गया और निकाली गई रकम को आरोपी की नियंत्रण और संचालन वाली शेल कंपनियों में खपाया गया।
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सीबीआई के मुताबिक प्रवीण कुमार ने साइन करने वाले अधिकारी (सिग्नेटरी) के तौर पर अकाउंट खोला था, लेकिन धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन का पता न चले, इस कारण से अकाउंट में एक ऐसे दूसरे आरोपी का मोबाइल नंबर रजिस्टर किया गया, जो विभाग में काम ही नहीं करता था।
जांच और सबूत के आधार पर उनकी सक्रिय भूमिका मिली। इसके बाद गुरुवार यानी दो जुलाई को उन्हें गिरफ्तार किया गया। बता दें कि इस मामले सीबीआई की टीम हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े दो अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
बता दें कि चंडीगढ़ के सेक्टर-32 में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की ब्रांच है। हरियाणा के सैकड़ों करोड़ रुपये के घोटाले के तार इसी ब्रांच से जुड़े हैं। जानकारी के मुताबिक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की इसी शाखा से हरियाणा सरकार के 8 विभागों की लगभग 504 करोड़ रुपये की धनराशि फर्जी, अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट व डेबिट नोट माध्यम से निकाली गई और फर्जी कंपनियों में खपाई गई।
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पंचकूला नगर निगम का लगभग 79.46 करोड़ का गबन भी इसी ब्रांच से जुड़ा है। इस मामले में सीबीआई आईएएस अधिकारी आरके सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा सीबीआई 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारी, 2 कंपनियां और 6 निजी व्यक्ति शामिल हैं। अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।