हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए दीवाली पर एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने महंगाई भत्ते (DA) में कुल 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसमें चालू साल का 4 प्रतिशत और पिछले साल का 1 प्रतिशत बकाया शामिल है। इसके अलावा क्लास IV के कर्मचारियों को 10,000 रुपये का अरियर भी दिया जाएगा। यह 1 नवंबर को सीधा उनके बैंक खातों में आ जाएगा।
सरकार के इस कदम से राज्य के करीब 2 लाख 75 हजार कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा पहुंचेगा। इस संबंध में विभाग की तरफ से 23 अक्टूबर को ही आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दी जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, '1 नवंबर को 5% डीए दिया जाएगा। पिछली बार के बकाया 1% डीए को भी इसमें जोड़ दिया गया है। इस संबंध में आज ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।'
आगे उन्होंने लिखा, 'सभी कर्मचारी और अधिकारी अपने परिवारों के साथ हर्षोल्लास से दीपावली का त्योहार मनाएं। हमारी सरकार की ओर से आप सभी को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं।'
कर्ज पर सीएम का बयान
राज्य की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए सीएम ने कहा कि सरकार वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने के लिए खर्चे कम करने के लिए रास्ते अपना रही है। हालांकि, इन कड़े कदमों का असर समाज के कुछ हिस्सों पर पड़ सकता है। इसके साथ हम सबका साथ मिलकर प्रयास करने से ही स्थिति सुधरेगी।
इस दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि मीडिया वाले भी उनसे थोड़े नाराज रहते हैं। इसे हाल ही में विज्ञापनों में कटौती से जोड़कर देखा जा रहा है। सीएम ने राज्य के विधायकों, अफसरों, डॉक्टरों, इंजीनियरों और शिक्षकों से अपील की है कि वे आगे आएं और हिमाचल की आर्थिक सेहत को सुधारने में अपना सहयोग दें।
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विपक्ष के आरोपों पर दिया जवाब
विपक्ष की ओर से राज्य पर 1.20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज होने के आरोपों को सीएम ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश पर असल कर्ज फिलहाल करीब 99,000 करोड़ रुपये के आसपास है। उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान के बंद होने की वजह से राज्य की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव पड़ा है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ब्याज-मुक्त कर्ज ले रही है। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि कड़े आर्थिक सुधारों के दम पर हिमाचल प्रदेश साल 2030 तक स्वास्थ्य और शिक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाएगा।