हरियाणा की अनाज मंडियों में फसल खरीद, पोर्टल की जटिलताओं और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद को लेकर आ रही परेशानियों को लेकर किसान नाराज हैं। किसानों ने सरकार से इन खामियों को दूर करने की मांग करते हुए बुधवार को पूरे हरियाणा की अनाज मंडियों में मार्केट कमेटी कार्यालयों के सामने धरना-प्रदर्शन किया। किसान नेताओं ने कहा कि फसल उठान को लेकर कई तरह की खामियां आने से किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। फसल का रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी सत्यापन नहीं हो पा रहा है। जिस कारण गेट पास भी नहीं कट पा रहे हैं।
वहीं धान खरीद पर प्रति एकड़ धान की सीमा तय करने पर भी किसानों में रोष है। उन्होंने कहा कि तकनीकी खामियों के कारण किसानों को कई दिनों तक मंडी में फसल के उठान का इंतजार करना पड़ रहा है।किसानों की तरफ से बुधवार को पूरे हरियाणा की आनज मंडियों में प्रदर्शन किया गया। इस बीच अंबाला की अनाज मंडियों में भी किसानों ने धरना दिया। सुबह करीब 10 से दोपहर करीब 2 बजे तक किसान मार्केट कमेटी दफतर के बाहर धरने पर जुटे रहे। उच्चाधिकारियों के आश्वासन के बाद धरना सामप्त किया गया। इस बीच कई जिलों में किसानों ने मार्केट कमेटी ऑफिस के मुख्य गेट पर ताला भी जड़ दिया।
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खरीद पर शर्त हटाने की मांग
किसानों का कहना है कि सरकार की तरफ से फसल खरीद पर लगाई गई प्रति एकड़ धान की शर्त हटानी चाहिए, क्योंकि अगर किसी किसान के पास सरकार की तरफ से जारी शर्त से ज्यादा धान निकलती है तो वह उस धान को कहां बेचेगा। उन्होंने मांग की कि प्रति एकड़ धान की सीमा बढ़ाई जाए, ताकि किसान आराम से अपनी फसल बेच सके।
पोर्टल पर मिसमैच में सुधार की सलाह
अंबाला के शहजादपुर मार्केट कमेटी कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे किसानों का आक्रोश बढ़ता देख अंबाला के नारायणगढ़ से एसडीएम शिवजीत भारती कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ शहजादपुर की अनाजमंडी पहुंचे। यहां किसानों ने उनके समक्ष फसलों के गलत सत्यापन की बात रखी। जिस पर संबंधित अधिकारियों ने उन्हें (मेरी फसल) पोर्टल पर जाकर मिसमैच सुधार का अनुरोध डालने की सलाह दी। एसडीएम ने किसानों को आश्वस्त किया कि पोर्टल पर आ रही खामियों को दूर किया जाएगा। जिसके बाद किसानों ने धरना समाप्त किया।
इधर यमुनानगर में धरने के दौरान टिकैत गुट से भारतीय किसान यूनियन नेता हरपाल सुढैल ने भी नमी की कड़ी शर्तों, गेट पास और पोर्टल वेरिफिकेशन में आ रही परेशानियों को लेकर सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि तकनीकी खामियों के चलते किसानों को मंडी में फसल लेकर पहुंचने के बाद भी कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं बीच-बीच में बेमौसमी बरसात होने से खुले में पड़ी धान की फसल भी बरसात में भीगने की चिंता सताती रहती है।
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बाहर से आ रही धान खरीद का आरोप
इधर, रतिया में किसानों ने आरोप लगाया कि स्थानीय किसानों की धान नहीं खरीदने के बजाय बाहर से आ रही धान को खरीदा जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर स्थानीय किसानों की धान नहीं खरीदी गई तो वे दो दिन बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जिला कार्यालय के सामने हाइवे जाम कर सरकार का पुतला फूंकेंगे। किसानों के आरोपों के बीच मार्केट कमेटी सचिव ओमप्रकाश चहल ने का कहना है कि अधिकारियों की तरफ से मंडियों का निरीक्षण लगातार जारी है। वहीं खरीद भी नियमानुसार की जा रही है।