हमीरपुर को मिलेगा हिमाचल का पहला साइंस कॉलेज, सीएम सुक्खू ने किया बड़ा एलान
हमीरपुर में हिमाचल प्रदेश का पहला साइंस कॉलेज बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने एलाइड एवं स्वास्थ्य सेवा महाविद्यालय और एम्स स्तर का आयुर्वेदिक संस्थान खोलने का भी ऐलान किया है।

हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू, Photo Credit- Khabargaon
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हमीरपुर में हिमाचल प्रदेश का पहला ‘साइंस कॉलेज’ खोलने की घोषणा की। इस कॉलेज के निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए 80 कनाल जमीन चिह्नित की जा चुकी है और परियोजना के लिए 20 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने हमीरपुर में एलाइड एवं स्वास्थ्य सेवा महाविद्यालय खोलने की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि जिले में 74 एकड़ जमीन पर एम्स स्तर का आयुर्वेदिक संस्थान भी बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री आज हमीरपुर स्थित राजकीय महाविद्यालय के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी का दर्जा दिया गया है जबकि हमीरपुर प्रदेश की शिक्षा राजधानी है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर के विद्यार्थी पूरे देश में प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देना प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।
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सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2021 में पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हिमाचल प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में 21वें स्थान पर था। वर्तमान कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए सुधारों के बाद प्रदेश अब पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं लेकिन गांवों में पढ़ने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उनके घर के पास अच्छी शिक्षा देने के लिए प्रदेश में 156 से अधिक सीबीएसई स्कूल खोले गए हैं।
इन स्कूलों के खुलने के बाद विद्यार्थियों के नामांकन में 24,000 की बढ़ोतरी हुई है। इन स्कूलों के संचालन और बुनियादी सुविधाओं के लिए 80 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं और एक हजार से अधिक युवाओं को करुणामूलक आधार पर रोजगार दिया गया है।
उच्च शिक्षा में शिक्षकों की कमी दूर करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए एक योजना पर काम कर रही है। साथ ही उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए महाविद्यालयों का युक्तिकरण भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके लिए राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में एक भी भर्ती परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक नहीं हुआ है। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान पुलिस भर्ती सहित कई परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक हुए थे और कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से हुई परीक्षाओं में भी कई अनियमितताएं सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद कर्मचारी चयन आयोग को भंग कर दिया गया और भर्ती प्रश्न-पत्र लीक करने वालों को जेल भेजा गया। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई भर्तियों में अनिवार्य साक्षात्कार की व्यवस्था खत्म कर मेरिट के आधार पर चयन शुरू किया है।उन्होंने कहा कि अब हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली भर्तियों में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों के अंकों को आधार बनाया जाता है जबकि पहले साक्षात्कार को ज्यादा महत्व दिया जाता था।
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स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी मुख्यमंत्री ने कही बात
सुक्खू ने कहा कि शिक्षा के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र राज्य सरकार की दूसरी बड़ी प्राथमिकता है। बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाने के लिए प्रदेश में जांच की सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है। राज्य में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है जिसमें मरीजों से 30,000 रुपये लिए जा रहे हैं जबकि राज्य सरकार की ओर से 90,000 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा बीमारियों की ज्यादा सही जांच के लिए मेडिकल कॉलेजों में 3-टेस्ला एमआरआई मशीनें लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दे रही है।
सीएम ने कहा कि विभिन्न छात्र संगठनों के कई नेताओं ने उनसे मुलाकात की है और सरकार ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा भी एनएसयूआई से शुरू हुई थी और आज वह प्रदेश की जनता की सेवा मुख्यमंत्री के रूप में कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास और मजबूत इरादे के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
किशाऊ परियोजना पर भी सीएम ने रखी बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने पिछली भाजपा सरकार द्वारा किए गए 422 मेगावाट की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के समझौते को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उस समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश को बिजली उत्पादन की लागत का एक बड़ा हिस्सा देना पड़ता। इस परियोजना पर वर्तमान सरकार के रुख के कारण अब हिमाचल प्रदेश को बिना कोई वित्तीय निवेश किए करीब 600 करोड़ रुपये सालाना राजस्व के रूप में मिलने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को तभी आगे बढ़ाएगा जब पड़ोसी राज्य अगली सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में शपथ-पत्र दाखिल कर यह सुनिश्चित करेंगे कि वे हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के बकाया भुगतान में अपना हिस्सा देंगे। उन्होंने साफ किया कि इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही परियोजना को लेकर आगे बढ़ा जाएगा।
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मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से प्रदेश में सीबीएसई स्कूल स्थापित करने की नई पहल शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी भी शुरू की गई है और शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण काम किए गए हैं। उन्होंने नीट अभ्यर्थियों पर कथित लाठीचार्ज की भी निंदा की और कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा विद्यार्थियों के साथ खड़ी रहेगी।
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