कांग्रेस ने कर्नाटक में मुख्यमंत्री तो आसानी से बदल दिया लेकिन बगावत अब शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने गुरुवार देर शाम मंत्रालयों का बंटवारा किया और अब विरोध के सुर सामने आ गए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व की कई सरकारों में मंत्री रहे रामालिंगा रेड्डी ने खुद को मिले मंत्रालय के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए मंत्री पद से ही इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि वह वीरप्पा मोइली और एस एक कृष्णा जैसे मुख्यमंत्रियों की सरकार में भी मंत्री रहे लेकिन कभी किसी से अपने लिए कोई पद नहीं मांगा। रामालिंगा का कहना है कि वह इस फैसले से बेहद हताश हैं।
डीके शिवकुमार ने 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उनके साथ कुल 13 और मंत्रियों ने शपथ ली। सिद्धारमैया सरकार के तमाम वरिष्ठ मंत्रियों को डीके शिवकुमार की कैबिनेट में भी जगह दी गई है लेकिन अब मंत्रालयों को लेकर बगावत से सुर उठने लगे हैं। वहीं, सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे का प्रमोशन हो गया है। पहली बार मंत्री बने यतींद्र को शहरी विकास और प्रियांक खड़गे को गृह मंत्रालय दिया गया है।
रामालिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है, 'कोई चिंता की बात नहीं है। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं। हम कैबिनेट में बेहद करीबी दोस्त हैं। हम इस समस्या का हल निकाल लेंगे। रामालिंगा रेड्डी ने मुझसे कहा था कि वह गांव जाकर काम नहीं कर सकते हैं इसलिए मैं उन्हें कोई और मंत्रालय दे दूं। मैं उनके बात करके सब ठीक कर दूंगा।'
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कई बड़े नेताओं के मंत्रालय बदले
नई सरकार में जो मंत्री दोबारा कैबिनेट का हिस्सा बने हैं, उनके मंत्रालयों में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है। सिद्धारमैया की सरकार में परिवहन मंत्री रहे रामालिंगा रेड्डी की जगह पर अब बी सुरेश को यह मंत्रालय दे दिया गया है। कहा जा रहा है कि वह इसी से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि मंत्रालय बंटने के कुछ घंटे बाद ही रामालिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उनका कहना है कि वह कांग्रेस में ही हैं और कहीं नहीं जा रहे हैं।
इस्तीफा देने के बाद रामालिंगा रेड्डी ने कहा है, 'मैं अभी भी कांग्रेस में ही हूं। मैंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। मैं 53 साल से कांग्रेस में रहा हूं और पार्टी में मैंने कई जिम्मेदारियां निभाई हैं। मैंने वीरप्पा मोइली और एसएम कृष्णा समेत तमाम मुख्यमंत्रियों की सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद संभाला। मैंने कभी किसी से कोई मंत्री पद नहीं मांगा।'
क्यों नाराज हो गए रामांलिगा रेड्डी?
कर्नाटक के गृहमंत्री और परिवहन मंत्री तक रहे रामालिंगा रेड्डी को इस बार वृहद और मध्यम सिंचाई विभाग दे दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामालिंगा रेड्डी कम से कम बेंगलुरु विकास वाले मंत्रालय चाहते थे लेकिन उन्हें नहीं दिया गया। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने खुद भी कहा कि उन्हें दो बार कहा गया कि यही मंत्रालय दिया गया लेकिन नहीं दिया। इसी से नाराज होकर उन्होंने मंत्री पद से ही इस्तीफा दे दिया है।
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उन्होंने आगे कहा है, 'डीके दो बार मेरे घर आए और कहा कि एक बार मैं मुख्यमंत्री बन जाऊंगा तो आपको यह मंत्रालय मिल जाएगा।' उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण से एक दिन पहले भी डीके शिवकुमार ने उनसे यही वादा किया। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि वह विधायक बने रहेंगे और वह मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार या पूर्व सीएम सिद्धारमैया से नाराज नहीं हैं। कहा जा रहा है कि वह बेंगलुरु विकास मंत्रालय के अलावा दूसरा कोई भी मंत्री पद लेने को तैयार नहीं है।
बता दें कि अभी तक यह मंत्रालय खुद डीके शिवकुमार के पास था लेकिन अब यह कृष्णा बैरेगौड़ा को दे दिया गया है। कृष्णा बैरेगौड़ा इससे पहले कर्नाटक के राजस्व मंत्री थे । वह कर्नाटक की सरकार में कृषि, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग जैसे मंत्रालय संभाल चुके हैं।
कौन हैं रामालिंगा रेड्डी?
8 बार के विधायक रामालिंगा रेड्डी पिछले चार बार से BTM लेआउट विधानसभा से चुनाव जीतते आ रहे हैं। इससे पहले वह एस एम कृष्णा की सरकार में फूड और सिविल सप्लाई मंत्री, धर्म सिंह की सरकार में साल 2004 से 2006 के बीच प्राथमिक शिक्षा मंत्री, सिद्धारमैया की सरकार में 2017 से 2018 के बीच गृहमंत्री और हाल ही में पद छोड़ने वाले सिद्धारमैया की सरकार में साल 2023 से 2026 तक कर्नाटक के ट्रांसपोर्ट मंत्री थे।