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KYC के चक्कर में बैंक ने नहीं निकालने दिए पेंशन के पैसे, बुजुर्ग की मौत

झारखंड में व्यक्ति अपने बैंक खाते से 8000 रुपये निकालना चाहते थे लेकिन बैंक की ईकेवाईसी (E-KYC) प्रक्रिया के चक्कर में वह बैंक से रुपये नहीं निकाल पाया। आरोप है कि इसी वजह से समय पर इलाज नहीं हो सका और उनकी जान चली गई।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

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झारखंड के गढ़वा जिले में एक बुजुर्ग को वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिली, जिससे उनकी मौत हो गई। बुजुर्ग पिछले कई महीनों से टीबी की बीमारी से जूझ रहे थे और पेंशन के रुपये से अपना इलाज करवाना चाहते थे लेकिन बैंक से उन्हें पेंशन नहीं मिली, जिससे सही समय पर इलाज नहीं हो पाया। बुजुर्ग की बहू पिछले कुछ महीनों से बैंक से अपने ससुर की पेंशन लेने की कोशिश कर रही थी। परिवार ने आरोप लगाया है कि बैंककर्मियों की वजह से बुजुर्ग की जान गई। इसी वजह से परिवार के लोग बुजुर्ग का शव लेकर बैंक के सामने पहुंचे और बैंककर्मियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। अब इस मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी जांच के आदेश दिए हैं।

 

यह मामला गढ़वा जिले के बदगढ़ गांव का है, जहां रहने वाले 75 साल के रतन लकरा का निधन हो गया। जानकारी के मुताबिक, टीबी की बीमारी का इलाज नहीं करवा पाने की वजह से 6 जुलाई को उनकी मृत्यु हो गई। रतन की बहू फुलमणि पिछले कई महीनों से बैंक के चक्कर लगा रही थी ताकि उन्हें रुपये मिल जाएं। जानकारी के लिए बता दें कि फुलमणि अपने परिवार की इकलौती कमाने वाली महिला हैं, जो मजदूरी करके घर चलाती हैं। उनके पति दृष्टिहीन हैं। इसी वजह से उन्हें ससुर के इलाज के लिए पेंशन के रुपयों का इंतजार करना पड़ा।

 

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महीनों तक करना पड़ा पेंशन का इंतजार?

फुलमणि ने बताया कि रतन लकरा के बैंक खाते में 8000 रुपये की वृद्धावस्था पेंशन जमा थी, जिसे वह निकालना चाहते थे। नियमों के अनुसार, पैसे निकालने के लिए बैंक में EKYC अपडेट करवाना जरूरी था। यही प्रक्रिया पूरी करवाने में फुलमणि को महीनों तक बैंक के चक्कर लगाने पड़े। फुलमणि ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने बैंककर्मियों से मदद मांगी, तो उन्होंने कोई सहायता नहीं की थी।

 

फुलमणि ने कहा कि वह ससुर की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें डाल्टनगंज सदर अस्पताल में भर्ती कराना चाहती थीं। उनके पास एम्बुलेंस बुक करने तक के रुपये नहीं थे। इसी वजह से वह बैंक मैनेजर से मिलने गई थीं, तो बैंक मैनेजर उनसे नहीं मिले, जिस कारण उन्हें रुपये नहीं मिल पाए।

 

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बैंककर्मियों ने किया दावा

इस मामले को लेकर बैंक अधिकारियों ने पीड़ित परिवार के आरोपों को नकार दिया है। बैंक अधिकारियों का दावा है कि रतन के खाते की E-KYC 9 जून को ही पूरी हो चुकी थी, जिसके बाद बैंककर्मियों ने फुलमणि को खाते से रुपये निकालने की जानकारी दे दी थी। बैंक में काम करने वाले अरुण कुमार ने कहा कि फुलमणि के परिवार में किसी की शादी थी, जिस वजह से वह खाते से रुपये निकालने नहीं आए। फिलहाल, इस मामले की पुलिस जांच कर रही है।


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