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'वोटर ID नहीं तो कांग्रेस की गारंटी नहीं', SIR से पहले DK ने लोगों को चेताया

सीएम डीके शिवकुमार ने अपील की है कि सभी लोग यह पक्का कर लें कि उनका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं। ऐसा नहीं होने पर चेतावनी देते हुए लोग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और फायदों से भी हाथ धो बैठेंगे।

DK shivkumar

डीके शिवकुमार।

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कर्नाटक में मतदाता सूची को ठीक करने के लिए मंगलवार से विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR ) प्रक्रिया शुरू हो गई। अधिकारी ने लोगों के घर-घर जाकर गणना का अभियान शुरू कर दिया। चुनाव आयोग का कहना है कि आगामी चुनावों के लिए स्वच्छ और बगैर गलती के वोटर लिस्ट तैयार करने और यह सुनिश्चित करने के मकसद से यह अभियान चलाया जा रहा है कि अपात्र वोटरों के नाम लिस्ट में शामिल ना हो पाएं।

 

इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बड़ा बयान देकर बीजेपी खेमें में खलबली पैदा कर दी। सीएम शिवकुमार ने जनता को सावधान करते हुए अपील की है कि सभी लोग यह पक्का कर लें कि उनका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं। ऐसा नहीं होने पर चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग अपना वोट देने का अधिकार खो देंगे, वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और फायदों से भी हाथ धो बैठेंगे।

 

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5 गारंटी और दूसरे सरकारी फायदे नहीं मिलेंगे

उन्होंने कहा कि वोटर कार्ड नहीं होने पर ऐसे लोगों को कांग्रेस सरकार की 5 गारंटी और दूसरे सरकारी फायदे नहीं मिलेंगे। सीएम ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में गणना प्रपत्र जमा नहीं करने पर मताधिकार समाप्त हो सकता है और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी आ सकती हैं।

इसी समय मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के सभी पात्र मतदाताओं से 30 जून से शुरू हुए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में अनिवार्य रूप से भाग लेने की अपील भी की। 

 

 

 

'मतदान का अधिकार, जीने का अधिकार

शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने चुनाव आयोग के एक महीने लंबे अभियान के दौरान मतदाताओं की मदद के लिए हजारों सुविधा केंद्र, हेल्पलाइन और ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। उन्होंने कहा, 'मतदान का अधिकार, जीने का अधिकार है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने मताधिकार की रक्षा करनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो मतदान का अधिकार खो देंगे। साथ ही सरकार की कई योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।'

 

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वोटर आईडी कार्ड के लिए जरूरी दस्तावेज

चुनाव आयोग ने एक आदेश में वोटर कार्ड की पात्रता तय करने के लिए कई आधार बताए हैं। इनमें कर्नाटक में जन्म, राज्य में कम से कम 10 साल का सामान्य निवास, कक्षा 12 या समकक्ष तक कर्नाटक के मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कम से कम 10 शैक्षणिक सालों तक पढ़ाई, माता-पिता या जीवनसाथी का राज्य में निवास, आवासीय संपत्ति का स्वामित्व या वैध कब्जा, मतदाता सूची, आधार या राशन कार्ड जैसे सरकारी रिकॉर्ड्स में नाम, कर्नाटक में कम से कम सात साल तक सरकारी या सार्वजनिक सेवा, पात्र निवासी से विवाह तथा अन्य विश्वसनीय दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक या मौखिक साक्ष्य शामिल हैं, जो यह साबित करें कि कर्नाटक ही आवेदक का मुख्य और स्थायी निवास है।


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