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'समय से नहीं आई NDRF, अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं', वैशाली नाव हादसे पर बोले लोग

बिहार के वैशाली में हुए नाव हादसे के बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि काफी देर तक पुलिस और प्रशासन की टीम ही नहीं आई। इतना ही नहीं, अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर तक नहीं था।

वैशाली हादसे के बाद बिलखते लोग

वैशाली हादसे के बाद बिलखते लोग, Photo Credit: Social Media

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बिहार के वैशाली जिले में मंगलवार देर शाम हुए नाव हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। कई लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती थे। मरने वालों में ज्यादातर बच्चे थे जो नाव में सवार होकर श्राद्ध भोज के लिए जा रहे थे। इस हादसे के बाद लोगों को बचाने में स्थानीय लोगों ने जमकर मशक्कत की क्योंकि प्रशासन की टीम, पुलिस और राज्य आपदा मोचल बल (SDRF) को आने में कई घंटे लग गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि सूचना देने के बावजूद कई घंटे तक प्रशासन और पुलिस की टीम नहीं आई। इतना ही नहीं, घंटों तक एंबुलेंस भी नहीं आई। लोगों ने शिकायत दर्ज कराई कि अस्पताल में ऑक्सीजन के सिलेंडर नहीं थे और अगर होते तो शायद कुछ और बच्चों को बचाया जा सकता था।

 

इस घटना के बाद स्थानीय राघोपुर विधानसभा के विधायक और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने दिल्ली से जारी एक वीडियो बयान में कहा कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR ) के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों के सिलसिले में दिल्ली में हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने स्थानीय प्रशासन से बात की और मुझे जानकारी मिली कि 14 शव बरामद किए गए हैं। नाव पर करीब 30 लोग सवार थे।’ हालांकि, वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 लोगों की मौत हो गई जबकि छह लोगों को बचा लिया गया है।’

 

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क्या बोले स्थानीय लोग?

हादसे के बाद लोगों की मदद करने वाले लोगों में से एक रवि यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद पंचायत के वार्ड नंबर 8 का यह भगतान टोला है। पास में ही एक श्राद्ध भोज था। बच्चे नाव में सवार होकर वहीं जा रहे थे। नाव फट जाने के कारण नाव बीच नदी में डूब गई। हम सब लोग थे, भरसक प्रयास थे लेकिन बच्चे नहीं बच पाए। हमें इसका बहुत अफसोस है।'

 

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उन्होंने आगे कहा, 'प्रशासन को इसकी सूचना दी गई और लगभग एक घंटे के बाद प्रशासन आया। ना कोई एंबुलेंस आई और ना ही NDRF आया। जब हम लोग अस्पताल गए तो वहां भी कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। ना तो वेंटिलेटर था, ना स्ट्रेचर था और ना ही ऑक्सीजन। अगर ऑक्सीजन  सिलेंडर रहते तो दो-चार बच्चे बच जाते और इतना दर्दनाक हादसा नहीं होता। नाव की स्थिति के बारे में स्थानीय सीओ को पहले भी सूचना दी गई थी कि नाव खराब है लेकिन नाव नहीं बदली गई। नाव पर लगभग 20 लोग सवार थे जिसमें से 13 बच्चे मर गए। बहुत मशक्कत करनी पड़ी। खटिया और रस्सी के सहारे लोगों को बाहर निकाला गया।'

CM, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने जताया दुख

इस हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर हादसे में  लोगों की जान जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के निकटतम परिजन को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा भी की। इस बीच, हादसे के बाद रामपुर श्यामचंद गांव में शोक की लहर दौड़ गई। नाव पर सवार ज्यादातर लोग इसी गांव के रहने वाले थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव पर सवार लोग पास के एक गांव में आयोजित भोज में शामिल होने गए थे।

इस हादसे पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी दुख जताया है।

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