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लखनऊ अग्निकांड: जहां जलकर मर गए 15 लोग, उस इमारत का क्या होगा?

जांच में यह सामने आया है कि इमारत का व्यापारिक इस्तेमाल हो रहा था, जबकि इसे सिर्फ रिहायशी मकसद के लिए मंजूरी मिली थी।

Lucknow Case

अलीगंज, लखनऊ। Photo Credit: PTI

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उत्तर प्रदेश के लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की अदालत ने अलीगंज के एक तीन मंजिला मकान को गिराने का आदेश दे दिया है। यह वही इमारत है, जहां 22 जून को भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी और 9 लोग घायल हुए थे।

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने कहा है कि इस इमारत को सिर्फ आवासीय मकसद के लिए मंजूरी मिली थी, लेकिन इसे व्यावसायिक उपयोग में लाया जा रहा था। आग के बाद हुई जांच में पता चला कि बिना अनुमति के अवैध निर्माण भी किया गया था।

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15 दिनों में खुद ढहानी होगी इमारत

अदालत के आदेश के बाद LDA अधिकारियों ने शुक्रवार को मौके पर पहुंचकर नोटिस चस्पा कर दिया। मकान के मालिकों को 15 दिनों के अंदर अवैध निर्माण हटाने का समय दिया गया है। अगर उन्होंने खुद नहीं हटाया तो LDA खुद बुलडोजर चला देगा और खर्चा मालिकों से वसूलेगा।

किस कानून के आधार पर लिया गया फैसला?

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27(1) के तहत की गई है। मकान का नंबर MS-102, सेक्टर-D, जोन-4, अलीगंज है। यह 1992 वर्ग फुट के प्लॉट पर बना है।

 

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LDA ने क्या कहा है?

LDA अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला शहर में अवैध निर्माण और आवासीय मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी था। 23 जून को इस प्रकरण में मकानमालिकों को नोटिस दिया गया। 7 जुलाई को LDA कोर्ट में केस की सुनवाई हुई। शुक्रवार को अदालत ने इमारत को अवैध माना और गिराने का आदेश दिया। मकान मालिक, 15 दिनों के भीतर अपील कर सकते हैं। 

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22 जून को हुआ क्या था?

तीन मंजिला इस इमारत में ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप थी। यहीं एक वेटरनरी क्लिनिक था और ऊपरी मंजिलों पर एनीमेशन, गेमिंग और सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग सेंटर चल रहा था। 

20 से 24 वर्ष के बीच के ज्यादातर छात्रों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 सदस्यीय SIT गठित कर सात दिनों में रिपोर्ट मांगी थी। इमारत की मंजूरी, फायर सेफ्टी और व्यावसायिक उपयोग के नियम सही पाए गए हैं।

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