जौहर यूनिवर्सिटी की 426 करोड़ की संपत्ति अटैच, कहां-कहां फंसा पेच?
आजम खान की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 426.46 करोड़ की संपत्ति को अटैच की है।

आजम खान, गौहर यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं। Photo Credit: Jauhar University
उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत ईडी के लखनऊ जोन ने यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। इसमें जमीन और इमारतें शामिल हैं। अटैच की गई संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई से आजम खान और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
ईडी की जांच में यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च, जमीन के स्वामित्व और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, आयकर विभाग की मूल्यांकन रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर की इमारतों के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जबकि ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के दौरान अपने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया। दोनों आंकड़ों के बीच 416.14 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया है। ईडी इस अंतर और निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत की जांच कर रही है।
ठेकेदारों से चंदे का मामला
जांच में सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों और जौहर ट्रस्ट के बीच वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की गई है। ईडी के मुताबिक, करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके हासिल करने वाले एक ठेकेदार ने बयान में बताया कि ठेके से जुड़ी राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण में सामग्री खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी ने इससे संबंधित निर्माण सामग्री की कीमत करीब 55.8 करोड़ रुपये आंकी है। इसके अलावा, एक अन्य ठेकेदार की ओर से ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान देने की बात भी सामने आई है। एजेंसी इन लेन-देन के स्रोत और इस्तेमाल की जांच कर रही है।
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विधायक निधि से भी खर्च
ईडी की जांच के अनुसार, यूनिवर्सिटी परिसर में विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से भी 6.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इन पैसों से उत्तर प्रदेश जल निगम के जरिए विभिन्न निर्माण कार्य कराए गए थे। उस समय आजम खान जल निगम के अध्यक्ष थे। इसके अलावा, राज्य सरकार ने यूनिवर्सिटी परिसर में पंडाल, ओबीसी लड़कों के छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। ईडी यह जांच कर रही है कि सार्वजनिक धन से निजी परिसर में कराए गए इन कार्यों में निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन हुआ था या नहीं।
पंडाल के स्वामित्व पर सवाल
जांच में यूनिवर्सिटी परिसर में सरकारी धन से बने पंडाल के स्वामित्व का मामला भी सामने आया है। वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने पंडाल के निर्माण के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। उस समय शर्त थी कि पंडाल का स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहेगा और इसे सरकार के उपयोग के लिए मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। इसे बेचने या हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं थी। आरोप है कि वर्ष 2016 में जारी एक अन्य सरकारी आदेश के जरिए शर्तों में बदलाव किया गया और पंडाल का स्वामित्व जौहर यूनिवर्सिटी को दे दिया गया। उस समय आजम खान प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और उनके पास शहरी विकास विभाग का प्रभार था।
34 एकड़ शत्रु संपत्ति का मामला
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े जमीन विवाद की जांच में रामपुर के सिंहानखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे का मामला भी सामने आया था। शत्रु संपत्ति वह संपत्ति होती है, जो कानूनी प्रावधानों के तहत सरकार के संरक्षण में होती है। जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, प्रशासन की मदद से शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन ने संबंधित जमीन पर दोबारा कब्जा ले लिया था। जमीन के स्वामित्व और यूनिवर्सिटी के निर्माण से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है।
26 एफआईआर से शुरू हुई जांच
आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों की जांच पहले से चल रही है। रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोप था कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए किसानों से जबरन जमीन ली गई और वित्तीय अनियमितताएं हुईं। जांच के दौरान ईडी ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की। इसके बाद 13 अक्टूबर को आजम खान, जौहर ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में अजीमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इससे पहले ईडी की टीम रामपुर जेल में आजम खान से पूछताछ भी कर चुकी है।
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आगे की कार्रवाई पर नजर
जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने के बाद ईडी जमीन, इमारतों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है। एजेंसी सरकारी धन के इस्तेमाल, ठेकेदारों से जुड़े भुगतान, ट्रस्ट को मिले चंदे और निर्माण पर हुए खर्च की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है। फिलहाल यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी और मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
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