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हरियाणा: नौकरी पक्की कराने के लिए पैदल मार्च, रोकती रही पुलिस; आगे बढ़ते रहे टीचर

हरियाणा अतिथि अध्यापक संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रधान ने कहा कि कोर्ट से उन्हें पक्का करने के आदेश हुए थे, लेकिन सरकार ने पक्का नहीं किया। अब पैदल मार्च निकालकर विरोध किया जा रहा है।

Guest Teachers marched in haryana

अंबाला में मंत्री अनिल विज के आवास के बाहर सड़क पर बैठकर नारेबाजी करते गेस्ट टीचर्स, Photo Credit: खबरगांव

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हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी हरियाणा के गेस्ट टीचर्स की नौकरी पक्की नहीं हुई तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। विरोध में रविवार को कुरुक्षेत्र की ताज पार्क से चंडीगढ़ के लिए पैदल मार्च शुरू किया गया। रविवार रात शाहाबाद में ठहराव के बाद सोमवार सुबह गेस्ट टीचर अंबाला पहुंचे। यहां कैबिनेट मंत्री अनिल विज के आवास का घेराव किया। उन्हें रोकने के लिए शाहाबाद में पुलिस ने बेरिकेडिंग भी की थी। वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया था। इन बाधाओं को पार करते हुए सोमवार सुबह गेस्ट टीचर्स ने अंबाला की सीमा में प्रवेश किया। इनके अंबाला पहुंचने से पहले ही भारी पुलिसबल तैनात हो गया।

 

अंबाला कैंट में मंत्री अनिल विज के आवास का घेराव करने के बाद सोमवार को गेस्ट टीचर्स अंबाला में रात्रि पड़ाव डालकर मंगलवार सुबह चंडीगढ़ के लिए रवाना होना था, लेकिन अंबाला में मंत्री अनिल विज ने इनसे मुलाकात की और सीएम कार्यालय में फोन कर गेस्ट टीचर्स की सीएम से 2 नवंबर को बैठक तय करवाई। जिसके बाद गेस्ट टीचर्स ने फिलहाल पैदल मार्च स्थगित कर दिया है।

 

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क्यों कहा जाता है गेस्ट टीचर?

हरियाणा अतिथि अध्यापक संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रधान कृष्ण ने बताया कि कांग्रेस सरकार के समय वर्ष 2005 में सरकारी स्कूलों में टीचर्स की काफी कमी थी। एकदम भर्ती निकालना संभव नहीं था तो सरकार ने पीरियड बेस पर वेतन देकर टीचर्स रखे। जिन्हें गेस्ट टीचर नाम दिया गया था। उस दौरान करीब 20 हजार गेस्ट टीचर रखे गए थे। उस दौरान विभाग की तरफ से विज्ञापन निकाला गया था और मेरिट के आधार पर वर्ष 2007 तक ये भर्ती चलती रही। वर्ष 2009 तक गेस्ट टीचर्स को पीरियड बेस पर वेतन मिलता रहा। 2009 में सभी गेस्ट टीचर्स को कॉन्ट्रेक्ट पर कर दिया गया था। तक तक गेस्ट टीचर्स की संख्या घटकर 15 हजार रह गई थी। कॉन्ट्रेक्ट पर करने के बाद फिक्स वेतन मिलने लगा।


इसी दौरान सरकार ने कर्मचारियों को पक्का करने के लिए 3 साल की पॉलिसी बनाई। उस पॉलिसी के तहत 5500 कर्मचारी पक्के हुए थे। उसके बाद 10 साल वाली पॉलिसी बनाई गई तो उसमें करीब 1200 कर्मचारी पक्के हुए थे। इसके बाद हरियाणा में सरकार बदली तो ये पॉलिसी होल्ड पर चली गई।

 

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'हाई कोर्ट के आदेश नजरअंदाज'

पॉलिसी होल्ड पर जाने से गेस्ट टीचर्स ने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट में बैंच ने दोनों पॉलिसी को अवैध घोषित करार दिया था। उस दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को ये डायरेक्शन दी थी कि 6 महीने में सभी कच्चे कर्मचारियों को हटाकर पक्की भर्ती की जाए। सरकार ने ऐसे न करके सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दो साल तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि 3 साल की पॉलिसी सही है। 10 साल की पॉलिसी को नियम के विरुद्ध बताया गया। हालांकि, ये भी कहा कि काम कर रहे कच्चे कर्मचारी में से किसी को भी न हटाया जाए। अगर पॉलिसी रद्द होती है तो भी किसी कर्मचारी को न हटाया जाए।


सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि जो 3 साल की पॉलिसी के तहत शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें रेगुलर किया जाए। इसके बाद सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की तो गेस्ट टीचर्स इसको लेकर फिर हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि दो महीने में सभी को रेगुलर किया जाए। एरियर व ओपीसी, 2014 से सीनियोरिटी दी जाए। हाईकोर्ट ने ये भी फैसला सुनाया था कि अगर दो महीने में इस पर अमल नहीं किया गया तो विभाग को 50 हजार रुपये जुर्माना किया जाएगा। 

 

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'स्थिति स्पष्ट करे सरकार'

प्रधान कृष्ण ने बताया कि उसके बाद सरकार ने डबल बैंच में जाने का फैसला लिया। वहां सरकार ने कहा कि 10757 लोगों की योग्यता को चेक करना पड़ेगा। सरकार ने कोर्ट ने इस पर समय मांगा। इस पर कमेटियां बनी तो गेस्ट टीचर्स की योग्यता तो पॉलिसी के अनुसार चेक नहीं किया गया। पॉलिसी में ये कहीं पर भी नहीं लिखा था कि कर्मचारी लगा कैसे है। उनसे ये पूछा गया कि सिलेक्शन कैसे हुआ।

 

इस पर गेस्ट टीचर्स ने कहा कि सरकार अपनी स्थिति सपष्ट करे। लगातार कोर्ट में सुनवाई के बाद इस वर्ष हाईकोर्ट ने सरकार को कहा कि 3 साल साल की पॉलिसी के तहत गेस्ट टीचर्स को रेगुलर किया जाए लेकिन सरकार ने इस पर अभी तक कोई रूची नहीं दिखाई। जिसके विरोध में गेस्ट टीचर्स अब पैदाल मार्च निकाल रहे हैं। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद गवर्नर को मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा। गेस्ट टीचर्स पक्के होते हैं तो नियमितीकरण की तारीख से बकाया राशि पर 6% ब्याज, पेंशन और ग्रेच्युटी मिलेगी। इसके अलावा महंगाई भत्ता मकान किराया भत्ता, मेडिकल सुविधाएं, अर्न लीव, मातृत्व व पितृत्व हॉलिडे, तेतन बढ़ोतरी जैसी कई सुविधाएं मिलेंगी। प्रधान कृष्ण ने बताया कि अगर उनकी मांगों पर सरकार अमल नहीं करती है तो एक नवंबर को फिर से रैली की जाएगी।

'समाधान नहीं निकला तो दोबारा शुरू होगी यात्रा'

प्रधान कृष्ण ने बताया कि ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ हुई बातचीत के बाद 2 नवंबर को मुख्यमंत्री के साथ बैठक का आश्वासन मिला है। फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। मंत्री अनिल विज ने उनकी बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय में संपर्क किया। मुख्यमंत्री के निजी सचिव से बातचीत कर 2 नवंबर सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री के साथ बैठक तय की है। प्रधान कृष्ण ने बताया कि, उन्होंने मंत्री से बैठक के संबंध में लिखित आश्वासन मांगा था, लेकिन मंत्री ने कहा कि यहां से लिखित आदेश जारी नहीं होते। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह खुद उनकी यात्रा में शामिल होंगे। प्रधान कृष्ण ने बताया कि मंत्री विज से उन्होंने कहा है कि यदि 2 नवंबर को बैठक में उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे उनके पास आ सकते हैं। वे यात्रा में आगे चलेंगे और गेस्ट टीचर उनके पीछे चलेंगे। प्रधान कृष्ण ने बताया कि मंत्री अनिल विज ने उन्हें कहा है कि उनके दरवाजे गेस्ट टीचरों के लिए हमेशा खुले हैं।

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