मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार, किसानों के निशाने पर है। किसान सड़कों पर हैं और सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। यह आंदोलन ठीक वैसे ही है, जैसे जंतर मंतर पर 'जेन जी' प्रदर्शनकारियों के दबाव से केंद्र सरकार परेशान हो गई थी। किसान जिद पर अड़ी है, वहीं मोहन यादव सरकार, इस आंदोलन से निपटने की तैयारी में है।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले हजारों किसान भोपाल की ओर मार्च कर रहे हैं। वे मूंग की फसल की 100 फीसदी खरीदारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने और खाद वितरण के ई-टोकन सिस्टम को बंद करने की मांग कर रहे हैं। किसानों और पुलिस में कई दौर की झड़प हो चुकी है।
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क्या चाहते हैं किसान?
किसान कह रहे हैं कि मूंग की फसल MSP पर खरीदी जाए। किसानों की यह भी मांग है कि ई-टोकन की वजह से खेती के मौसम में खाद नहीं मिल पा रही है, इसे दुरुस्त किया जाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार इस आंदोलन को रोकने की कोशिश में है।
सरकार, दिल्ली जैसा तनाव नहीं चाहती है। दिल्ली में छात्रों के आंदोलन की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद तक गंवाना पड़ा था। दिलचस्प बात यह है कि किसान इस्तीफा नहीं, अपने लिए MSP मांग रहे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मध्य प्रदेश से ही हैं।
मोहन यादव ने क्या कदम उठाया है?
मोहन यादव ने किसानों के साथ आनन-फानन में बैठक की और दो बड़े फैसले लिए। अब हर किसान अपनी मूंग का 60 फीसदी हिस्सा, लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ सरकारी खरीद में बेच सकेगा। साथ ही ई-टोकन सिस्टम को तुरंत बंद कर दिया गया है और खरीदारी की तारीख भी 10 दिन बढ़ा दी गई है।
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केंद्र सरकार ने क्या नसीहत दी?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को साफ जवाब दिया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को इस साल मूंग की खरीद के लिए देश का सबसे बड़ा कोटा दिया गया है। सरकार ने 4.54 लाख मीट्रिक टन का कोटा दिया है, यह पूरे देश के कुल कोटे का 87 फीसदी है, फिर भी राज्य सरकार ने अब तक सिर्फ 60,000 टन ही खरीदा है।
शिवराज ने क्यों मोहन यादव को फटकार लगाई?
शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि केंद्र 25 फीसदी से ज्यादा उत्पादन की खरीद नहीं कर सकता, बाकी राज्य सरकार को खुद खरीदनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि समस्या केंद्र की मंजूरी की नहीं, बल्कि राज्य की खरीद की रफ्तार की है। इसलिए राज्य को जल्दी से जल्दी मूंग खरीदने की सलाह दी गई।
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किसानों से डर क्यों गए हैं मोहन यादव?
किसान लगातार भोपाल पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी है। सरकार और किसान मोर्चा के बीच बातचीत जारी है। यह मोहन यादव सरकार के खिलाफ यह किसानों का सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है। अगर किसान राजधानी भोपाल तक पहुंचे तो मोहन यादव के लिए बीच का रास्ता निकालना और मुश्किल हो जाएगा।