बिहार के मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी
के खिलाफ सफाई कर्मचारियों ने हल्ला बोल दिया है। बिहार के कई राज्यों में सफाई कर्मचारियों ने एलान किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं, वे काम नहीं करेंगे। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से कई शहरों में कूड़े का ढेर लग गया है। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, तब तक नहीं काम शुरू करेंगे, जब तक कि उन्हें कामयाबी नहीं मिल जाती है।
कर्मचारियों की कई मांगें हैं, जिन्हें सरकार सुन ही नहीं रही है। कर्मचारियों ने पहले भी हड़ताल किया है लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। अब कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सारी बातें नहीं सुन ली जाएंगी, सरकार का आश्वासन नहीं मिलेगा, दोबारा काम पर नहीं लौटेंगे। उनका कहना है कि कूड़े के बढ़ते बोझ से शायद सरकार पर असर पड़े।
यह भी पढ़ें: प्लास्टिक कचरा, जानवरों और इंसानों के लिए संकट कैसे बन रहा है?
क्या चाहते हैं बिहार के सफाई कर्मचारी?
- एक समान काम के लिए समान वेतन
- बकाया EPF का एकमुश्त भुगतान
- लंबित वेतन का तत्काल निपटारा
- आउटसोर्सिंग की व्यवस्था खत्म हो
- संविदा या काम कर रहे कर्मचारियों को स्थाई किया जाए
विपक्ष क्या कह रहा है?
राष्ट्रीय जनता दल:-
7वीं फेल मुख्यमंत्री को साफ सफाई का मतलब समझ नहीं आता है। बस हरा गमछी ढूंढना और नाम के पीछे 'यादव' पढ़ते ही फर्जी एनकाउंटर का आदेश देना आता है।
अधिकारी परेशान, कूड़े का लग रहा अंबार
पटना नगर निगम भी कर्मचारियों की हड़ताल से परेशान है। राजधानी में साफ-सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश की जा रही है लेकिन बात नहीं बन पा रही है। नगर निगम के आयुक्त यशपाल मीणा ने हड़ताली कर्मियों से काम पर लौटने की अपील की है।
सरकारी फैसले से और बढ़ रहीं हैं मुश्किलें
पटना नगर निगम ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर 22.65 करोड़ के आसपास जु्र्माना लगाया है। नगर निगम ने कपनी से जवाब मांगा है कि सफाई क्यों नहीं की जा रही है। सरकारी विभागों के आदेश भी नाराजगी की वजह बन रहे हैं। जगह-जगह निगमों के मु्ख्यालयों में जाकर प्रदर्शन कर रहे हैं। पटना में तो बवाल इतना बढ़ गया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है।
यह भी पढ़ें: सड़क पर कचरा फेंकने का वीडियो हुआ वायरल, युवक ने खुदकुशी कर ली
इस मुसीबत से कैसे निपटेगी सरकार?
अलग-अलग नगर निगमों में आउटसोर्सिंग कंपनियों को धमकी दी है कि अगर सफाई कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं तो लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि सफाई कर्मचारियों पर नीति तैयार कर सकती है लेकिन अभी वे काम पर लौट जाएं।
विपक्ष बना रहा है मुद्दा
विपक्ष ने इस मुद्दे पर बिहार सरकार को घेरने की कोशिश की है। राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि सम्राट चौधरी का साफ-सफाई पर ध्यान नहीं है। पुलिस की सबसे बड़ी परशानी यह है कि उन्हें खुद ही साफ-सफाई का इंतजाम कराना पड़ रहा है।