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प्लास्टिक कचरा, जानवरों और इंसानों के लिए संकट कैसे बन रहा है?

प्लास्टिक कचरा जानवरों और इंसानों के पेट में जाकर गंभीर बीमारियां फैला रहा है। अपनी सेहत और पर्यावरण को बचाने के लिए फ्री प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल बंद करना बहुत जरूरी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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दुनिया भर में प्लास्टिक की थैलियों और कचरे का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। यह अब एक ऐसी बड़ी मुसीबत बन चुका है जो हमारे पर्यावरण को तेजी से खराब कर रहा है। इसके साथ ही यह प्लास्टिक बेजुबान जानवरों से लेकर इंसानों के शरीर तक पहुंच रहा है। हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा जमीन और पानी में मिल जाता है। यह कचरा धीरे-धीरे बहुत बारीक टुकड़ों में बदल जाता है जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहते हैं। खाने-पीने की चीजों और पानी के जरिए यह प्लास्टिक सीधे इंसानों और जानवरों के शरीर के अंदर जा रहा है। इससे दोनों की जान को बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

 

सड़कों पर और कचरे के ढेरों पर प्लास्टिक बैग हर जगह पड़े रहते हैं। ये बैग आवारा पशुओं, खासकर गायों और दूसरे जानवरों के लिए जान का दुश्मन बन रहे हैं। खाने की तलाश में ये जानवर कचरे के साथ पूरी प्लास्टिक की थालियां भी खा जाते हैं। पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) और  इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI) के आंकड़े बताते हैं कि गायों के पेट से डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके 70 किलो तक प्लास्टिक निकाला है। 

 

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यह प्लास्टिक उनके पेट में जमा हो जाता है और पचता नहीं है। इससे उनका पूरा पेट अंदर से बंद हो जाता है और वे बहुत ज्यादा दर्द के कारण तड़प-तड़पकर मर जाती हैं। इसके साथ ही पेटा और यूएनईपी की रिपोर्ट बताती है कि हर साल लगभग 10 करोड़ समुद्री जीव और लाखों पक्षी इस प्लास्टिक कचरे के कारण मर जाते हैं। कछुए, मछलियां और व्हेल जैसे पानी के जीव प्लास्टिक को गलती से खाना समझकर खा लेते हैं और अपनी जान गंवा देते हैं।

इंसानों के शरीर में पहुंच रहा प्लास्टिक

प्लास्टिक एक ऐसी चीज है जो कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती है। धूप और पानी के असर से यह समय के साथ बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है। ये छोटे कण हमारी मिट्टी, नदियों और समुद्र के पानी में पूरी तरह मिल चुके हैं। जब मछलियां या पानी के दूसरे जीव इन्हें खाते हैं तो प्लास्टिक उनके शरीर में चला जाता है। इसके बाद जब इंसान मछलियां खाते हैं या खराब पानी पीते हैं तो यह प्लास्टिक इंसानों के शरीर में पहुंच जाता है। साइंस डायरेक्ट पर छपी नई मेडिकल रिसर्च बताती है कि इंसानों के खून, फेफड़ों और यहां तक कि नवजात बच्चों के प्लेसेंटा में भी प्लास्टिक के ये छोटे कण पाए गए हैं।

 

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सेहत पर बुरा असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पीने के पानी में माइक्रोप्लास्टिक को लेकर 'माइक्रोप्लास्टिक्स इन ड्रिंकिंग-वाटर' नाम की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इंसानी शरीर में प्लास्टिक का पहुंचना कई बड़ी और जानलेवा बीमारियों की वजह बन रहा है। प्लास्टिक को बनाने में जो केमिकल इस्तेमाल होते हैं वे हमारे शरीर के अंदर जाकर बहुत नुकसान करते हैं।  इससे कैंसर, शुगर और लिवर की गंभीर बीमारियां होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। 


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