तमिलनाडु में जब से
जोसेफ विजय
की सरकार बनी है तब से ही वह चर्चा में रही है। कभी विधायकों के पाला बदलने का मामला हो या फिर विधानसभा में जोरदार बहस। अब सूचना के अधिकार (RTI) कानून में एक बदलाव को लेकर विजय की सरकार बैकफुट पर चली गई है। दबाव के चलते विजय सरकार ने इस बदलाव को वापस ले लिया है। विजय के लिए इस मामले में मुश्किल तब और बढ़ गई थी जब उसकी तमिलागा वेट्री कड़गम (TVK) की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने भी विरोध जताया था। मामला गंभीर होते देखा तमिलनाडु की TVK सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।
यह मामला RTI ऐक्ट, 2005 की सीमा से राज्य के कानून विभाग को बाहर करने से जुड़ा है। राज्य में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) समेत तमाम विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ सत्ता में शामिल कांग्रेस और विदुतलाई चिरुतैगल काची (VCK) ने भी सवाल उठाए। यह आदेश राज्य के मानव संसाधन प्रबंधन विभाग ने 21 सितंबर को जारी किया था लेकिन रविवार यानी 27 अक्तूबर को इसे वापस ले लिया गया।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, तमिलनाडु सरकार के पहले के आदेश में राज्य के कानून विभाग को पारदर्शिता कानून की दारा 24 (4) के तहत 'इंटेग्रिटी एंड सिक्योरिटी आर्गनाइजेशन' कैटगरी में रखकर इसे RTI से बाहर करने की कोशिश की गई थी। इसका मतलब होता कि अगर कोई भी व्यक्ति RTI के जरिए सवाल पूछता तो उसे जानकारी नहीं मिल पाती।
यही वजह थी कि इसका शुरुआत से ही विरोध हो रहा था। दरअसल, कस्टोडियल डेथ और कानून से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी कानून विभाग के पास ही होती है। अपराध और न्याय से जुड़ी कई अन्य जानकारी भी यही विभाग देता है। ऐसे में अगर यह विभाग RTI के दायरे से बाहर हो जाता तो उसकी जानकारी छिपाई जा सकती थी। यही वजह है कि इसके खिलाफ तमाम विपक्षी दल और अन्य संगठन सवाल उठा रहे थे। वहीं, TVK सरकार के कई मंत्री इस फैसले का बचाव भी कर रहे थे लेकिन आखिर में सरकार ने इसे वापस लेना ही सही समझा।
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सहयोगियों ने ही TVK को घेरा
कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के सहारे तमिलनाडु की सरकार चली रही TVK की मुश्किल तब बढ़ी जब ये दल ही इस फैसले के खिलाफ आ गए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस फैसले की आलोचना की और कहा कि RTI के दायरे को बढ़ाने की कोशिश होनी चाहिए, उसे कम करने की नहीं। बाद में जब सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया तो कार्ति चिदंबरम ने इस फैसला का स्वागत भी किया।
इसी तरह VCK ने भी इस फैसले को हैरान करने वाला बताया था। विपक्षी DMK ने इस फैसले को अपनी नाकामी छिपाने वाला बताया था। हालांकि, अब विजय की सरकार ने इसे वापस लेकर खुद को इस मुश्किल से निकाल लिया है और अपने सहयोगियों की नाराजगी भी शांत कर दी है।