उज्जैन में खड़े हनुमान की मूर्ति को हटाने की तमाम कोशिशें नाकाम हुईं हैं। भक्त सड़कों पर उतर आए और वहीं हनुमान चालिसा पढ़ने लगे। मीडिया ने जिनसे बात की, सबको एक रटा-रटाया जवाब मिला, 'हनुमान जी हटना नहीं चाहते हैं'। उज्जैन में बीते कई दिनों से यही चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण के लिए खड़े हनुमान मंदिर को नई जगह शिफ्ट करने का काम चल रहा था।
नगर निगम की टीम ने शुक्रवार को मंदिर के ढांचे का कुछ हिस्सा तोड़ दिया, लेकिन जब 8 फीट ऊंची हनुमान की मूर्ति हटाने की बारी आई तो टीम को कड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यह मूर्ति करीब 170 साल पुरानी है और जमीन के अंदर पत्थरों में गहराई तक जमी हुई मिली।
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'हनुमान जी हटना नहीं चाह रहे'
अधिकारियों को डर था कि मूर्ति को जबरदस्ती हटाने से वह टूट सकती है। इसी वजह से पुरातत्व विभाग के जानकारों को भी बुलाया गया। जानकारों ने कहा कि मूर्ति को सावधानी से हटाने की जरूरत है, जरा सी गलती, बड़ा नुकसान कर सकती है। मूर्ति के नीचे खुदाई कर उसके आधार की गहराई भी नापी गई। स्कैनिंग की जा रही है कि कितना गहरा खोदें कि बिना टूटे, हनुमान की मूर्ति सुरक्षित दूसरी जगह पहुंचाई जा सके।
तीन दिन में तीन बार कोशिश, हर बार अड़चन
खड़े हनुमान की मूर्ति को हटाने पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोग लिख रहे हैं कि पहले दिन मूर्ति के पास से चिंगारी निकली, जिसके बाद काम रोकना पड़ा। दूसरे दिन लगातार बारिश की वजह से काम में रुकावट आई। तीसरे दिन क्रेन लगाकर पूरी तैयारी के बाद भी मूर्ति अपनी जगह से हिल नहीं सकी।
क्या कह रहे हैं भक्त?
भक्तों का कहना है कि अगर बजरंगबली खुद कोई काम रोक दें तो इंसान अपने बल पर उसे कैसे कर सकता है। हनुमान को संकटमोचन कहा जाता है। उनके भक्तों का मानना है कि वह मुश्किलें दूर करते हैं और जहां रहना चाहें वहीं रहते हैं। यही भावना अब सोशल मीडिया पर एक चमत्कार की तरह फैल रही है।
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विरोध में हनुमान चालीसा पढ़ने लगे भक्त
मंदिर हटाने का विरोध पहले से ही चल रहा था। 30 अगस्त को विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। लोगों ने धरना दिया और हनुमान चालीसा का पाठ किया, जिसके बाद प्रशासन को उस समय काम टालना पड़ा था। बाद में सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास कार्यों का हवाला देकर प्रशासन ने मंदिर को सम्मान के साथ नई जगह पर स्थापित करने की योजना आगे बढ़ाई। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि मूर्ति की गरिमा और धार्मिक परंपराओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
मंदिर तोड़ने से नाराज हैं भक्त
पहले प्रशासन ने मंदिर तोड़ा, फिर मूर्ति हटाने की कोशिशें की जाने लगीं। हजारों की संख्या में भक्त पहुंचे, हनुमान के दर्शन किए और भावुक होकर विदाई दी। कई भक्त रो पड़े। भक्तों का कहना है कि 100 साल से ज्यादा पुराने इस मंदिर को हटाया जा रहा है, यह आहत करने वाली बात है।
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कितनी पुरानी हैं खड़े हनुमान?
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि इसका इतिहास करीब 1857 या उससे भी पहले का है। एक ही परिवार पिछली कई पीढ़ियों से इस मंदिर की सेवा करता आ रहा है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के लिए यह जगह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनके सामाजिक कामकाज भी यहां से होते रहे हैं।
अब लोग क्या चाहते हैं?
यह तय है कि मूर्ति वहां से विस्थापित होगी। अब लोग चाहते हैं कि मूर्ति ऐतिहासिक है, इसलिए उसे बिना नुकसान पहुंचाए विस्थापित किया जाए। कुछ भक्तों का कहना है कि मूर्ति को उसके असली जगह पर ही रहने दिया जाए। वहीं मंदिर बनाया जाए।
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अभी कहां है यह मूर्ति?
हनुमान की मूर्ति अभी अपनी मूल जगह पर ही मौजूद है। प्रशासन मूर्ति को नई जगह शिफ्ट करने की कोशिश में जुटा है, जबकि भक्त लगातार बजरंगबली की भक्ति में डूबे हुए हैं। वहां जय बजरंगबली, जय श्री राम के जयकारे लगाए जा रहे हैं।