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ऋषिकेश में पेड़ों के लिए सिर मुंडाकर अधिकारियों से भिड़ने वाली माना कौन हैं?

माना ने उत्तराखंड में पेड़ों की कटाई के विरोध में अपना सिर मुंडा लिया है। वह कौन हैं, क्यों चर्चा में हैं, आइए जानते हैं।

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पेड़ों की कटाई का विरोध करतीं माना। AI एडिट। Photo Credit: Mana/INSTA

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अगर आप सोशल मीडिया यूजर हैं तो उत्तराखंड की एक रील जरूर देखी होगी। एक महिला चीख-चीखकर पेड़ काटने वाले लोगों से भिड़ रही है, उन्हें फटकार रही है। हजारों लोग उसे देख रहे हैं, वह सरकारों को कोस रही है। ऋषिकेश में 3 हजार से ज्यादा पेड़ों को काटने की योजना पर उत्तराखंड सरकार से लेकर नरेंद्र मोदी सरकार को खरी-खोटी सुनाने वाली यह महिला माना हैं। माना सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं लेकिन अब अध्यात्म की राह पर हैं। उन्होंने सरकार के खिलाफ अपने बाल उतार दिए हैं। उनका कहना है कि अगर पेड़ ही नहीं रहेंगे तो बाल रहकर क्या करेंगे।

'अपनी मां पर आरी चला रहे हो तुम लोग। देश द्रोही हो तुम लोग। नपुंसक हो तुम। तू निर्दोष पेड़ को काट रहा है, नपुंसक है? कितने पैसे चाहिए, तेरा जमीर जिंदा है? कम से कम मरने से पहले अच्छा काम करके मरो।' 

यह कहने वाली महिला का नाम माना है। माना का पूरा नाम मानवी है। उन्होंने रविवार को देहरादून-ऋषिकेश हाईवे के लिए 3 हजार से ज्यादा पेड़ों को काटने की योजना के विरोध में सिर मुंडवाने का फैसला लिया। वह कई दिनों से आंदोलन में शामिल थीं, सरकार और कर्मचारियों पर भड़कती थीं, खरी-खोटी सुनाती थीं। सोशल मीडिया पर हर तरफ उनकी रील वायरल हो रही है। 

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माना:-
मेरे घरवाले मुझे ताना दे रहे हैं। मैं हारी हुई फील कर रही हूं। मैं गंजी हो जाती हूं। मुझे इसे रोकने के लिए कोई अरेस्ट नहीं कर सकता है। मैं गंजी हो जाती हूं। पेड़ गए, बाल गए।

माना ने कैसे सरकार की मुश्किलें बढ़ाई हैं?

माना की अपील पर हजारों लोग सड़कों पर उतरे। ऋषिकेश में उन इलाकों की ओर पहुंचे जहां पेड़ काटे जा रहे हैं। अब मानवी का कहना है कि सरकार यह प्रोजेक्ट तत्काल रोक दे, यह विकास किसके लिए है, अगर उत्तराखंड की प्रकृति ही नहीं बचेगी तो सड़कें किसके लिए बनेंगी। विकास, विनाश की कीमत पर नहीं चाहिए। 

 

 

 

कौन हैं माना? इतनी चर्चा क्यों है

माना फैशन की दुनिया में रही हैं, अब आध्यात्मिक धर्मगुरु हैं। उन्होंने ग्लैमर की राह छोड़कर साध्वी का जीवन अपनाया है। अब माना खुद को आध्यात्मिक गुरु, सफल उद्यमी और लेखिका बताती हैं। वह कहती हैं कि वह भारत को धनवान और ज्ञानी बनाने का ख्वाब देखती हैं। उनके शिष्य'न्यू एज मैनिफेस्टर्स' कहलाते हैं। ये लोग माना की सलाह पर पूरा भरोसा करते हैं। माना, भारत बदलने का दावा करती हैं लेकिन उनके ज्यादातर शिष्य और क्लाइंट विदेशी ही होते हैं।  माना का दावा है कि वह अध्यात्म की राह पर बचपन से चल रहीं हैं।

माना कहती हैं कि 16 साल की उम्र से वह आध्यात्मिक योग और वैदिक साधनाओं से जुड़ीं। माना अपने जीवन का तीसरा दशक पार कर चुकी हैं। उनका दावा है कि उन्हें ऐसे आध्यात्मिक अनुभव हो रहे हैं कि वह अपनी आत्मा का साक्षात्कार कर चुकी हैं। अब वह अपना जीवन लोगों के लिए समर्पित करने की बात कहती हैं। माना ऋषिकेश में रहती हैं, अपना आध्यात्मिक केंद्र चला रहीं हैं। वह लोगों को आध्यात्म और सफतला दोनों सिखा रही हैं। 

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उपलब्धियां क्या हैं?

माना का दावा है कि वह मास्टर ऑफ बिजनेस मैनेजमेट में गोल्ड मेडलिस्ट हैं, NIFT दिल्ली से डिजाइनिंग में ग्रेजुएट हैं, UCLA लॉस एंजेलिस से एक्टिंग और फिल्म मेकिंग का कोर्स कर चुकी हैं। फ्रेंच में वह बीए कर चुकी हैं। 

माना का दावा है कि वह ट्रेनिंग, आर्किटेक्चरल डिजाइन, रियल एस्टेट, एक्टिंग और हेल्थकेयर क्षेत्रों में सफल बिजनेस चला चुकी हैं। साल 2023 में आत्मा की आवाज पर वह ऋषिकेश चली गईं। अब वह अगली पीढ़ी को तैयार कर रहीं है। 

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कौन सी किताबें लिखी हैं?

माना ने 'रूल्स ऑफ लक्ष्मी: ब्लूप्रिंट ऑफ एंबंडेंस' नाम से किताब लिखी है। यह किताब, धन और समृ्द्धि के वैदिक सिद्धांतों पर आधारित है। माना खुद को गृहस्थ योगिनी बताती हैं। उनके 2 बच्चे हैं। वह वेल्थ क्रिएशन, लीडरशिप साइकोलॉजी, तंत्र, योग, ध्यान और वैदिक विज्ञान जैसे कोर्स चलाती हैं। वह 'कॉन्सियस पूंजीवाद', AI युग में मानव विकास, महिला सशक्तिकरण और उद्देश्यपू्र्ण जीवन जैसे विषयों पर लोगों को प्रशिक्षत करती हैं। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग कोर्स भी तैयार किए हैं। इन्हें जानने के लिए आपको 2500 से 30 हजार तक खर्च करने पड़ सकते है। 

 

 

माना का कारोबार कितना बड़ा है?

माना लोकप्रिय हैं। उनके उनके इंस्टाग्राम चैनल पर लगभग 4 लाख लोग हैं, यूट्यूब पर 40 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट को लाखों लोग देखते हैं।

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