डिजिटल इंडिया के इस जमाने में यह सोचना आसान है कि बैंक अब पूरी तरह से 'पेपरलेस' हो गए होंगे लेकिन सच तो यह है कि स्टेशनरी पर बैंकों का खर्च आज भी बहुत ज्यादा है। Groww की FY25 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 14 बड़े बैंकों ने मिलकर पिछले एक साल में स्टेशनरी और प्रिंटिंग पर पूरे 3,877 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह भारी भरकम खर्च बताता है कि डिजिटल तकनीक आने के बाद भी बैंकों के लिए कागजी काम या स्टेशनरी एक बहुत बड़ी और जरूरी जरूरत बनी हुई है। बैंक की शाखाओं का बड़ा नेटवर्क और सरकारी कानूनी नियम इस खर्च की सबसे बड़ी वजह हैं।
बैंकों के रोजमर्रा के काम में स्टेशनरी का मतलब सिर्फ पेन और कागज नहीं होता है। इसमें लोन एग्रीमेंट, खाता खोलने के फॉर्म, कानूनी दस्तावेज और ऐसी ही दूसरी बहुत सी जरूरी चीजें शामिल होती हैं जो बैंक की शाखाओं में काम चलाने के लिए जरूरी हैं। अब देखते हैं कि किस बैंक ने कितना खर्च किया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने स्टेशनरी पर 986.4 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। एचडीएफसी बैंक का खर्च 922.5 करोड़ रुपये रहा है।
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एक्सिस बैंक ने 373.8 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। आईसीआईसीआई बैंक ने 318.5 करोड़ रुपये का स्टेशनरी खर्च दिखाया है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने 211.9 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक ने 173.8 करोड़ रुपये और कोटक महिंद्रा बैंक ने 167.0 करोड़ रुपये स्टेशनरी पर खर्च किए हैं। केनरा बैंक का खर्च 165.9 करोड़ रुपये रहा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 135.3 करोड़ रुपये, आडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 122.7 करोड़ रुपये, इंडसइंड बैंक ने 114.9 करोड़ रुपये, यस बैंक ने 70.0 करोड़ रुपये, ऐयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 58.3 करोड़ रुपये और फेडरल बैंक ने 56.2 करोड़ रुपये स्टेशनरी और प्रिंटिंग पर खर्च किए हैं।
डिजिटल दौर में भी स्टेशनरी की जरूरत क्यों है?
आजकल ज्यादातर लोग मोबाइल ऐप से पैसे भेजते हैं, फिर भी बैंकों को स्टेशनरी की बहुत जरूरत पड़ती है। बैंक के कई काम आज भी शाखाओं में जाकर ही होते हैं। गांव में रहने वाले लोग और बुजुर्ग ग्राहक आज भी ऑनलाइन के मुकाबले कागज पर साइन करना और रसीद लेना ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद समझते हैं। इसके अलावा सरकारी नियम और ऑडिट की वजह से बैंकों को अपने हर रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए फिजिकल कागज और फाइलें रखनी ही पड़ती हैं। ये कानूनी जरूरतें ऐसी हैं कि बैंक इन्हें चाहकर भी पूरी तरह बंद नहीं कर सकते हैं।
स्टेशनरी खर्च का गणित
स्टेशनरी पर होने वाला यह खर्च बैंकों के मुनाफे पर भी असर डालता है। बड़े बैंकों के लिए यह खर्च उनके कुल मुनाफे का करीब 1% के आसपास रहता है। कुछ बैंक जैसे आडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपने मुनाफे का 8.05% हिस्सा स्टेशनरी में खर्च किया है। इंडसइंड बैंक ने अपने मुनाफे का 4.46% हिस्सा स्टेशनरी पर खर्च किया है। यस बैंक का यह खर्च 2.86% और ऐयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का 2.77% रहा है।
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एक्सिस और फेडरल बैंक ने अपने मुनाफे का 1.33% हिस्सा स्टेशनरी पर खर्च किया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का यह आंकड़ा 1.22% है और एचडीएफसी बैंक का 1.26% है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1.02%, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक ने 0.94%, कोटक महिंद्रा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 0.75% और आईसीआईसीआई बैंक ने अपने मुनाफे का 0.58% हिस्सा स्टेशनरी पर खर्च किया है। ये बैंक नए इलाकों में अपनी शाखाएं बढ़ा रहे हैं और ज्यादा ग्राहकों को जोड़ना चाहते हैं, इसलिए वे फिजिकल काम और ब्रांच की सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
